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    पिता! | #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    उँगुली पकड़के चलना सिखाता है पिता,
    छोटे से परिन्दे का गगन होता है पिता।
    संघर्ष की आंधियों से वह लड़ -लड़कर,
    अनुशासन में रहना सिखाता है पिता।

    जब आता है वो मौसम मेले -ठेले का,
    मनचाहा खिलौना भी देता है पिता।
    पढ़ाता-लिखाता वो सुलाता पेट पर,
    हौसला औलाद का बढ़ाता है पिता।

    हँसी और खुशी का तो है वो पिटारा,
    सोने के जैसे आग में तपाता है पिता।
    सूरज, चाँद, सितारों से भरा है गगन,
    पर असली पहचान दिलाता है पिता।

    बदलती हैं सारी ऋतुयें, मगर वो नहीं,
    धूप-छाँव के दांव-पेंच से बचाता है पिता।
    मधुव्रत, मधुरस से भरता तो है ही वो,
    निःसर्ग को बचाना सिखाता है पिता।

    सूखने नहीं देता उम्मीदों की नदी,
    रोटी-कपड़ा-मकान बन जाता है पिता।
    पितृ ऋण से उऋण पुत्र हो नहीं सकता,
    रक्षा-कवच बनके खड़ा रहता है पिता।
    रामकेश एम. यादव (कवि, साहित्यकार), मुंबई

    बाबू जी!
    घुट-घुटके आजकल,
    क्यों रोते हो बाबू जी, (2)
    क्या आज तेरा कोई नहीं।

    सबको पढ़ा-लिखा के, 
    रस्ता दिखाए तुम,
    बेटी से कहीं ज्यादा,
    बेटों को चाहे तुम।
    बेटों ने ऐसे हाल में,
    क्यों छोड़ा है बाबू जी, (2)
    क्या आज तेरा कोई नहीं।
    घुट-घुटके आजकल,
    क्यों रोते हो बाबू जी, (2)
    क्या आज तेरा कोई नहीं।
    निचोड़ कर जवानी,
    खड़ा किए महल।
    जैसे उगे हैं पंख,
    परिन्दे किए वो छल।
    रो-रो के बुनियाद,
    कुछ कह रही है बाबू जी,
    क्या आज तेरा कोई नहीं।
    घुट-घुटके आजकल,
    क्यों रोते हो बाबू जी, (2)
    क्या आज तेरा कोई नहीं।
    बच्चों के अरमान और 
    आसमान बने तुम।
    चलती-फिरत बैंक,
    और दुकान बने तुम।
    फाँके में कट रहे,
    क्यों दिन ये बाबू जी,
    क्या आज तेरा कोई नहीं।
    घुट-घुटके आजकल,
    क्यों रोते हो बाबू जी, (2)
    क्या आज तेरा कोई नहीं।

    पाते नहीं हो आजकल,
    सूखी भी रोटियाँ।
    किस बिल में जा छुपी हैं,
    फूलों की डालियाँ।
    आंसू के सैलाब में,
    क्यों डूबे हो बाबू जी,
    क्या आज तेरा कोई नहीं।
    घुट- घुटके आजकल,
    क्यों रोते हो बाबू जी, (2)
    क्या आज तेरा कोई नहीं।

    कुछ दिन के हो मुसाफिर,
    हक़ीक़त को जान लो।
    पैसे से रखती यारी,
    दुनिया को जान लो।
    जख्मों की ये तुरपाई,
    न होगी बाबू जी,
    क्या आज तेरा कोई नहीं।
    घुट-घुटके आजकल,
    क्यों रोते हो बाबू जी, (2)
    क्या आज तेरा कोई नहीं।

    अच्छाइयों का रोज-रोज,
    हो रहा है खून।
    माता-पिता को छोड़के,
    वो बस रहे रंगून।
    खून अपना पानी,
    क्यों हुआ है बाबू जी।
    क्या आज तेरा कोई नहीं।
    घुट-घुटके आजकल,
    क्यों रोते हो बाबू जी, (2)
    क्या आज तेरा कोई नहीं।

    जो बो रहे हैं कांटे,
    उनको धंसेंगे वो।
    बेटे भी उनके साथ में,
    कैसे रहेँगे वो।
    उधार कोई आंसू,
    न देगा बाबू जी,
    क्या आज तेरा कोई नहीं। 
    घुट-घुटके आजकल,
    क्यों रोते हो बाबू जी, (2)
    क्या आज तेरा कोई नहीं।
    रामकेश एम. यादव (कवि, साहित्यकार) मुंबई।

    *Admission Open : UMANATH SINGH HIGHER SECONDARY SCHOOL | SHANKARGANJ (MAHARUPUR), FARIDPUR, MAHARUPUR, JAUNPUR - 222180 MO. 9415234208, 9839155647, 9648531617*
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    *प्रवेश प्रारम्भ-सत्र 2022-23 | निर्मला देवी फार्मेसी कॉलेज |(AICTE, UPBTE & PCI Approved) | Mob:- 8948273993, 9415234998 | नयनसन्ड, गौराबादशाहपुर, जौनपुर, उ0प्र0 | कोर्स - B. Pharma (Allopath), D. Pharma (Allopath) | द्विवर्षीय पाठ्यक्रम योग्यता, योग्यता - इण्टर (बायो/मैथ) And प्रवेश प्रारम्भ-सत्र 2022-23 | निर्मला देवी पॉलिटेक्निक कॉलेज | नयनसन्ड, गौराबादशाहपुर, जौनपुर, उ0प्र0 | ● इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग | ● इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग | ● सिविल इंजीनियरिंग | ● मैकेनिकल इंजीनियरिंग ऑटो मोबाइल | ● मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रोडक्शन | ITI अथवा 12 पास विद्यार्थी सीधे | द्वितीय वर्ष में प्रवेश प्राप्त करें। मो. 842397192, 9839449646 | छात्राओं की फीस रु. 20,000 प्रतिवर्ष | #NayaSaberaNetwork*
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    *Nehru Balodyan Sr. Secondary School | Kanhaipur, Jaunpur | Admission Open 2022-23 | 10+2 | Level | Contact- 9415234111, 9415349820, 9450089310 | Transport Incharge: 9554586608, 8736006564  | #NayaSaberaNetwork*
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