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    विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस 15 जून पर विशेष | #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    • बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार की गंभीरता को रेखांकित करना वर्तमान समय की मांग 
    • बड़े बुजुर्गों की सेवा और सम्मान के तुल्य इस सृष्टि में कोई पुण्य और आध्यात्मिक सुख नहीं - एड किशन भावनानी 
    गोंदिया। किस्मत वाले होते हैं वह लोग जिनके सिर पर बुजुर्गों का हाथ होता है, वह घर घर नहीं रहता जहां कोई बुजुर्ग नहीं रहता, बुजुर्गों का आशीर्वाद अंणखुट खजाना है, घर में बुजुर्ग खुशी से हंसते हुए मिलते तो समझ लेना तुम से अमीर इस दुनिया में कोई नहीं!! 
    साथियों यह है हमारे बड़े बुजुर्गों का सम्मान! उनकी हुजूरी की खनक! जिसमें हमारा घर परिवार, गांव, शहर खुशहाली से हरा भरा रहता है, गमों की कोई सिलवट नहीं होती क्योंकि हमारे बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद, उनकी खुशी, दुआ हमारे लिए वह अंणखुट ख़ज़ाना है जिसके सामने सांसारिक मायावी खजाना कुछ नहीं है क्योंकि हमारी हजारों वर्षों पूर्व की संस्कृति नें ही हमें सिखाया है, बड़े बुजुर्गों की सेवा उनका सम्मान के तुल्य इस सृष्टि में कोई पुण्य और आध्यात्मिक सुख नहीं! 
    साथियों मेरा मानना है कि इनके सामने हमारे ईश्वर अल्लाह गुरुवर आचार्य का पक्ष भी अपेक्षाकृत छोटा होता है क्योंकि हमारे सर्वश्रेष्ठ ईश्वर अल्लाह हमारे माता-पिता और बुजुर्ग हैं परंतु बदलते परिवेश में और पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रकोप से इस आधुनिक डिजिटल युग में माता-पिता बड़े बुजुर्गों का आंकलन कम होते जा रहा है और दिखावों के स्तर पर बाहरी माहौल में आर्थिक शारीरिक मानसिक सेवाएं प्रदान कर अपने आप को महादानी करार दिए जाने की प्रथा चल पड़ी है जबकि घर के बड़े बुजुर्गों को हाशिए पर रखकर उनके विचारों को पुराना ज़माना बताकर अपमानित किया जाता है घर से निकाल दिया जाता है, वृद्धआश्रम में शिफ्ट किया जाता है! अब समय आ गया है कि बड़े बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार की गंभीरता को रेखांकित करना वर्तमान समय की मांग है इसलिए हम इस आर्टिकल के माध्यम से विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के उपलक्ष में बड़े बुजुर्गों का सम्मान करने की चर्चा करेंगे।
    साथियों बात अगर हम वर्तमान परिपेक्ष्य की करें तो, आज हमारे समाज में हमारे ही बुजुर्ग एकाकी रहने को विवश हैं उनके साथ उनके अपने बच्चे नहीं हैं। गावों में तो स्थिति फिर भी थोड़ी ठीक है लेकिन शहरों में तो स्थिति बिलकुल भी विपरीत है।ज्यादातर बुजुर्ग घर में अकेले ही रहते हैं, और जिनके बच्चे उनके साथ हैं वो भी अपने अपने कामों में इस हद तक व्यस्त हैं की उनकेपास अपने माता - पिता से बात करने के लिए समय ही नहीं है। लेकिन कुछ परिवार ऐसे भी हैं जहां वास्तव में बुजुर्गों की अवहेलना की जाती है अपमान किया जाता है। उनको तिरस्कृत किया जाता है। हालांकि हर परिवार की स्थिति भिन्न हो सकती है इसलिए किसी भी पीड़ी को दोष देना कठिन है। लेकिन जब भारत के इतिहास पर नजर डालें तो हम पाएंगे कि हमारे पूर्वजों ने जीवन के अंत समय में जब व्यक्ति के दायित्वों की पूर्ती हो जाती थी वानप्रस्थ की व्यवथा दी थी शायद ये वृद्धाश्रम वानप्रस्थ का आधुनिक रूप हों सकता हैं। 
    साथियों बात अगर हम वैश्विक स्तरपर बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार की करें तो, बड़े दुर्व्यवहार को संबोधित करनाबड़े दुर्व्यवहार को एक एकल, या दोहराया कार्य, या उचित कार्रवाई की कमी के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो किसी भी रिश्ते के भीतर होता है जहां विश्वास की उम्मीद होती है जो किसी बड़े व्यक्ति को नुकसान या परेशानी का कारण बनती है। यह एक वैश्विक सामाजिक मुद्दा है जो दुनिया भर में लाखों वृद्ध व्यक्तियों के स्वास्थ्य और मानवाधिकारों को प्रभावित करता है, और एक ऐसा मुद्दा जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करता है। 
    दुनिया के कई हिस्सों में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार बहुत कम मान्यता या प्रतिक्रिया के साथ होता है। कुछ समय पहले तक, यह गंभीर सामाजिक समस्या सार्वजनिक दृष्टिकोण से छिपी हुई थी और इसे ज्यादातर एक निजी मामला माना जाता था। आज भी, बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार एक वर्जित बना हुआ है, जिसे दुनिया भर के समाजों द्वारा ज्यादातर कम करके आंका जाता है और अनदेखा किया जाता है। हालांकि, साक्ष्य जमा हो रहे हैं, यह इंगित करने के लिए कि वृद्ध दुर्व्यवहार एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक समस्या है। 
    साथियों बात अगर हम 15 जून को यह दिवस मनाने की करें तो, इस दिन को उन बुजुर्गों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है जिन्हें दुर्व्यवहार और नुकसान पहुंचाया जाता है। इस दिन का प्राथमिक लक्ष्य दुनिया भर के समुदायों को वरिष्ठ दुर्व्यवहार और उपेक्षा को प्रभावित करने वाले सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय कारकों के बारे में जागरूकता बढ़ाकर बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार और उपेक्षा की बेहतर समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करना है। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मुद्दे को उजागर करने के लिए समर्पित है। 
    साथियों बात अगर हम बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार और अपमान की करें तो, बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार हिंसा के सबसे कम जांच वाले रूपों में से एक है, और इसे राष्ट्रीय कार्य योजनाओं में शायद ही कभी संबोधित किया जाता है। हमारी संस्कृति में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार को व्यापक रूप से एक बढ़ती और महत्वपूर्ण समस्या के रूप में स्वीकार किया जाता है। दुर्भाग्य से, कम रिपोर्टिंग, बड़े दुर्व्यवहार की परिभाषा में अंतर और देशव्यापी सुसंगत रिपोर्टिंग प्रणाली की कमी के कारण इस समस्या के पैमाने का निर्धारण करना मुश्किल है। नेशनल सेंटर ऑन एल्डर एब्यूज के अनुसार, उन्होंने सात श्रेणियों के बड़े दुर्व्यवहार को अलग करता है। शारीरिक शोषण, यौन शोषण, भावनात्मक शोषण, वित्तीय/भौतिक शोषण, उपेक्षा, परित्याग और आत्म-उपेक्षा सभी इस प्रकार के दुरुपयोग के उदाहरण हैं। 
    साथियों बात अगर हम इस 2022 अवसर की थीम और व्यवहारिकता की करें तो थीम सभी उम्र के लिए डिजिटल इक्विटी है । वर्तमान अध्ययनों के अनुसार, वयस्क बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, यह दर्शाता है कि बुजुर्गों के खिलाफ हिंसा ज्यादातर घर पर होती है। पारिवारिक तनाव, दोनों मनोवैज्ञानिक और वित्तीय, को बड़े दुर्व्यवहार का एक योगदान कारण माना गया है। यदि छोटे बच्चे अपने परिवार में इस प्रकार की आक्रामकता के संपर्क में आते हैं, तो इसका उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। शोध के अनुसार, हिंसा के संपर्क में आने वाले बच्चे, चाहे लक्षित लक्ष्य के रूप में या हिंसा के गवाह के रूप में, व्यवहार संबंधी मुद्दों को विकसित करने की अधिक संभावना रखते हैं और बाद में खुद आक्रामकता और हिंसा के अपराधी बन जाते हैं। 

    बुजुर्गों की भी अजीब कहानी है 
    न खाने को रोटी आंखों से बरसा पानी है 
    शरीर के हाथों हारे ये मन के जवान हैं 
    घर में बुजुर्ग जरूरी है क्योंकि यह भगवान है

    अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस 15 जून 2022 पर विशेष है। बुजुर्गों को के साथ दुर्व्यवहार की गंभीरता को रेखांकित करना वर्तमान समय की मांग है। बड़े बुजुर्गों की सेवा और सम्मान के तुल्य इस सृष्टि में कोई पुण्य और आध्यात्मिक सुख नहीं है। 

    -संकलनकर्ता लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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