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    महर्षि दयानंद कॉलेज में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न | #NayaSaberaNetwork

    महर्षि दयानंद कॉलेज  में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न   | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    मुंबई।  'आजादी के अमृत महोत्सव' कार्यक्रम की श्रृंखला में  महर्षि दयानंद कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स साइंस एंड कॉमर्स, परेल, मुंबई द्वारा 'एक दिवसीय राष्ट्रीय ई संगोष्ठी' का आयोजन तीन सत्रों में किया गया। संगोष्ठी का विषय था  'इक्कीसवीं सदी की महिला कथाकार' कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र रुईया कॉलेज मुंबई की प्राचार्या  डॉ. संतोष कौल की अध्यक्षता में हुआ। इन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि, " महिला कथाकारों को अपनी जमीन बनाने में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा परंतु इक्कीसवीं सदी आते - आते उन्होंने समाज में व्याप्त किसी भी विषय को अनछुआ नहीं रहने दिया। यही उनके लेखन की सार्थकता है।" केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा, नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. उमापति दीक्षित मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए और वक्तव्य दिया। सोनू भाऊ बसवंत कॉलेज शहाड के प्राचार्य तथा हिंदी अध्ययन मंडल मुंबई विद्यापीठ के अध्यक्ष प्रो. डॉ. अनिल सिंह अतिथि के रुप में उपस्थित हुए और मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि,"संगोष्ठी का विषय बहुत ही प्रासंगिक है और इस विषय द्वारा कार्यक्रम नई सोच की ओर अग्रसर होगा।" कार्यक्रम का प्रारंभ शोधार्थी भारती श्रीवास्तव द्वारा सरस्वती वंदना से  हुआ। उद्घाटन सत्र में महर्षि दयानंद कॉलेज, परेल, मुंबई की प्राचार्या डॉ. छाया पानसे ने स्वागत भाषण दिया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ उमेश चंद्र शुक्ल ने प्रास्ताविकी प्रस्तुत की। बीज वक्तव्य दिया देश की प्रसिद्ध कथाकार एवं समीक्षक  श्रीमती सुधा अरोड़ा जी ने। उन्होंने अपने बीज वक्तव्य में बीसवीं सदी से इक्कीसवीं सदी तक की महिला कथाकारों के विषयों , सरोकारों , विमर्शों तथा इनमें निरंतर हो रहे परिवर्तनों को उदाहरण सहित व्यक्त किया और कहा कि आदिवासी जीवन पर कविता लिखने वाली जेसिंटा केरकेट्टा जैसा लेखन हिंदी कथाओं में भी होना चाहिए। इस सत्र का संचालन महर्षि दयानंद कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. उषा दुबे ने किया तथा आभार प्रदर्शन शोधार्थी श्रीमती अनुपमा तिवारी ने किया।कार्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रो. डॉ.उमापति दीक्षित अध्यक्ष के रूप में तथा प्रो. डॉ अनिल सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। प्रो. डॉ. उमापति दीक्षित ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि,"इस सत्र में पढ़ें गए प्रपत्रों द्वारा इक्कीसवीं सदी की महिला कथाकारों द्वारा उठाए गए  भ्रष्टाचार, सामाजिक विद्रूपताओं, पारिवारिक और सांस्कृतिक पक्षों ,वृद्ध विमर्श जैसे विषयों को स्पर्श करना ही महिला कथाकारों की लेखनी की सार्थकता को सिद्ध करता है।"
    इस सत्र में भवंस कॉलेज हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. रेखा शर्मा, विल्सन कॉलेज गिरगांव की हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. सत्यवती चौबे, झुनझुनवाला कॉलेज घाटकोपर की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश शर्मा, एस. आई. एस. कॉलेज सायन के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश पाठक, रुईया कॉलेज माटुंगा के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ प्रवीण बिष्ट, ने  '21 वीं सदी की महिला कथाकार' विषय पर अपने-अपने प्रपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी श्रीमती भारती श्रीवास्तव ने तथा आभार शोधार्थी श्रीमती नेहा त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता स्कूल ऑफ लैंग्वेज सोमैया विश्वविद्यालय विद्या विहार के अधिष्ठाता डॉ. सतीश पांडेय ने की । उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि,   "आज की संगोष्ठी में किए गए प्रपत्र वाचन की उल्लेखनीय बात यह थी कि 21वीं सदी की महिला कथाकारों द्वारा सिर्फ नारी विमर्श की बातें नहीं हुई बल्कि लेखिकाओं द्वारा जीवन के विभिन्न अनछुए पहलुओं जैसे कि भूमंडलीकरण, उपभोक्तावाद, बाजारवाद, वेश्यावृत्ति, और कॉर्पोरेट जगत से उत्पन्न समस्याओं को स्पर्श किया गया। जो महिला कथाकारों के लेखन की व्यापकता को दर्शाता है।" रुइया कॉलेज हिंदी विभाग की अध्यक्ष एवं प्राचार्या डॉ संतोष कौल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुईं और महिला कथाकारों के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए । इस सत्र में खालसा कॉलेज हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मृगेंद्र राय, महाराष्ट्र कॉलेज मुंबई सेंट्रल हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. रमा सिंह, साठे कॉलेज के सहायक आचार्य प्रो. डॉ. महात्मा पांडेय, महर्षि दयानंद कॉलेज की शोधार्थी श्रीमती पूर्णिमा पांडेय ने 'इक्कीसवीं सदी की महिला कथाकार' विषय पर अपने-अपने प्रपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन  बिरला कॉलेज, कल्याण के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. बाल कवि सुरंजे तथा आभार प्रदर्शन महर्षि दयानंद कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ उमेश चंद्र शुक्ल ने किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से विद्वान, लेखक, पत्रकार, प्रोफेसर्स, शोधार्थी  तथा  कॉलेज के विद्यार्थी  अंत तक जुड़े रहे। कार्यक्रम बहुत ही सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।

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