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    प्रमोद शास्त्री को मिला बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड

    भोजपुरी फ़िल्म जगत में प्रयोगधर्मिता के साथ सिनेमा निर्माण की पहचान रखने वाले निर्देशक प्रमोद शास्त्री को बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड मिला है। उन्हें यह अवार्ड प्रसिद्ध  दिल्ली प्रेस की महत्वपूर्ण पत्रिका सरस सलिल के द्वारा आयोजित भोजपुरी सिने अवार्ड में इस सम्मान से नवाजा गया है।  यह अवार्ड उन्हें उनकी फिल्म 'प्यार तो होना ही था' में बेतरीन डायरेक्शन के लिए दिया गया। वहीं इस फ़िल्म के हिस्से और भी कई अवार्ड आए। बता दें कि प्रमोद शास्त्री के लिए सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड यह दूसरी बार हुआ है कि उनके कार्यों को इस सम्मान से सराहा गया है। उन्हें इससे पहले भोजपुरी फ़िल्म छलिया के लिए बेस्ट डायरेक्टर (क्रिटिक) का अवार्ड मिल चुका है।

    प्रमोद शास्त्री ने अपने क्रिएशन क्षमता को कभी बांध कर नहीं रखा और एक के बाद एक बेहतरीन व सराहनीय फिल्मों के निर्माण में वे आज भी लगे हैं। प्रमोद शास्त्री इन दिनों अपनी डेब्यू हिंदी फिल्म की शूटिंग में बिजी हैं, जिसका नाम है "तुम तक"। उन्होंने हाल ही में इस फ़िल्म के 35 दिनों का शूटिंग शेड्यूल पूरा किया। इस शेड्यूल की शूटिंग नैनीताल उत्तराखंड हुई है, जबकि मई प्रथम सप्ताह में गानों की शूटिंग के लिए वे कश्मीर जाने वाले हैं, जहां की मनोरम वादियों को वे अपने सिनेमाई स्कोप से दर्शकों को सामने लाने वाले हैं। 

    प्रमोद शास्त्री का कल्चरल एक्टिविटी में रुचि स्कूल के दिनों से ही रही है। उसके बाद कॉलेज के दिनों में वे नाटक लिखते और निर्देशित करते थे, जिसे यूनिवर्सिटी स्तर के साथ - साथ राज्य स्तर पर भी सराहा गया। इसके बाद डॉ राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी कॉलेज से उन्होंने स्नातक की और फिर प्रमोद शास्त्री सपनों के शहर बॉम्बे चले गए, जहां उन्होंने नवोदित फिल्म और टेलीविजन उद्योग में शामिल हो गए। यहां एक सहायक के रूप में शुरुआत की और निर्देशक बनने के लिए अपने तरीके से काम किया। इसके बाद निर्देशक प्रमोद शास्त्री ने "किसे रोके रुका है सवेरा" टीवी धारावाहिक लिखा और निर्देशित किया जो डीडी किसान चैनल पर बहुत लोकप्रिय हुआ।


    उन्होंने मेगास्टार रवि किशन अभिनीत फिल्म आपन माटी आपन देस का निर्माण किया, जिसे 'भोजपुरी फिल्म अवार्ड्स' के लिए सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में प्रमुख पुरस्कार जीते। इसके बाद प्रमोद शास्त्री ने फिल्मों का निर्देशन करने का रुख कर लिया। फिर उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और उन्होंने रब्बा इश्क ना होवे, छलिया, प्यार तो होना ही था जैसी फिल्मों का सफल निर्देशन किया। इन फिल्मों में भोजपुरी सिनेमा के बड़े नाम थे। उनकी फिल्मे सामाजिक रूप से प्रासंगिक विषयों के इर्द-गिर्द केंद्रितरहती है, जो कमर्सियल के साथ सार्थक भी होती है। उनकी फिल्मों ने जनता के दिलों को छुआ और बॉक्सऑफिस पर उनका जलवा बरकरार है प्रमोद शास्त्री द्वारा लिखित और निर्देशित मल्टी स्टारर मेगा बजट फिल्म "आन बान शान" जल्द ही सिनेमा हॉल में दस्तक देने वाली है...





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