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    शीतलाष्टमी पर होती है विशेष पूजाः विपिन सैनी | #NayaSaberaNetwork

    शीतलाष्टमी पर होती है विशेष पूजाः विपिन सैनी  | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    चौकियां धाम, जौनपुर। चैत्र मास की शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की पूजन का शुभ मुहूर्त में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं भोर में ही उठकर स्नान ध्यान करने के बाद पूरे विधि विधान से पूरी हलुवा, रोट बनाकर बसिऔरा पूजन करती हैं। हिंदू धर्म में हर साल होली के आठवें दिन शीतला अष्टमी मनाई जाती है। उक्त बातें मां शीतला चौकियां धाम के निवासी विपिन सैनी ने कही। उन्होंने आगे बताया कि इस वर्ष शीतला अष्टमी 25 मार्च को पड़ रहा है। कृष्ण पक्ष की इस शीतला अष्टमी को बासौड़ा पूजन और शीतलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता का स्वरूप अत्यंत शीतल व शांत है जो तेज ज्वर चेचक रोग दोष को हरने वाली हैं। माँ शीतला माता रानी विस्फोटक मर्दनी है। पीड़ा दुःख को हरने वाली है। शीतला माता के हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते हैं और वे गधे की सवारी करती हैं। शीतला अष्टमी पूजन मुहूर्त सुबह 6 बजकर 29 मिनट से शाम 6 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। पूजन की कुल अवधि 12 घंटे 12 मिनट की है। उन्होंने बताया कि इस दिन शीतला अष्टमी व्रत पूजन का महत्व माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है। शीतला अष्टमी के दिन शीतला मां का पूजन करने से चेचक, खसरा, ज्वर बुखार, बड़ी माता, छोटी माता जैसी बीमारियां नहीं होती हैं। चैत्र मास की अष्टमी के दिन से ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है। यही वजह है कि इस बदलाव से बचने के लिए साफ-सफाई का पूर्ण ध्यान रखना होता है। माना जाता है कि इस अष्टमी के बाद बासी खाना नहीं खाया जाता है। पूजन पाठ करने के लिए सबसे पहले शीतला अष्टमी के दिन सुबह भोर में जल्दी उठकर नहा लें। श्री सैनी ने बताया कि पूजा की थाली में हलुवा, पूरी, चना, दही, हल्दी का ऐपन बनाये घर में पूजा स्थान एक कलश लेकर उसके ऊपर चावल आम के पत्तों पर रखकर दीप प्रज्वलित कर पूजन करें। दूसरी थाली में आटे से बना दीपक, रोली, वस्त्र, अक्षत, हल्दी, मोली, माला, सिक्के रखें। दोनों थालियों के साथ में ठंडे पानी का लोटा भी रख दें। अब शीतला माता की पूजा करें। माता को सभी चीजे चढ़ाने के बाद खुद और घर से सभी सदस्यों को हल्दी का टीका लगाएं। मंदिर में पहले माता को जल चढ़ाकर रोली और हल्दी ऐपन का तिलक लगाएं। माता को मोली और वस्त्र अर्पित करें। घर आने के बाद रसोईघर पूजा की जगह पर पूजा करें। घर के मुख्य द्वार पर भी गोला बनाकर हल्दी लेपन कर रोली लगाकर हलवा, पूरी, धूप, दीप रखकर पूजन करें। इस प्रकार के पूजन करने वाले लोगों ऊपर मातारानी जी कृपा दृष्टि बनी रहेगी सुख, शान्ति, धन, यश, वैभव, ऐश्वर्य वे वृद्धि होती है।

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