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    हृदयांगन साहित्यिक संस्था की सजी दीप-मंजरी,शाम धनतेरस के नाम | #NayaSaberaNetwork



    नया सबेरा नेटवर्क
    मुंबई। राष्ट्रीय संस्था हृदयांगन साहित्यिक एवं  सामाजिक पंजीकृत संस्था ने मंगलवार दिनांक 2 नवम्बर 2021 को सजाई दीप मंजरी शाम धन तेरस के नाम।
    लगभग चार घंटे गूगल मीट पर इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कानपुर की वरिष्ठ कवियित्री डा0 प्रमिला पाण्डेय तथा संचालन देश की सुप्रसिद्ध मंच संचालिका डा0 अलका अरोड़ा ने देहरादून से की। मंच की शोभा बढाई जाने माने श्रीमदभागवत महापुराण कथा प्रवक्ता साहित्याचार्य,साहित्यरत्न श्रीकृष्ण द्विवेदी महाराज ने, जिनकी वेदवाणी युक्त अक्षय आशीर्वाद तथा श्रीराम के अयोध्या आगमन तथा गोपी गीत का लयबद्ध गायन कर हृदयांगन मंच को धन्य कर दिया।इस दीप मंजरी महोत्सव का श्रीगणेश संस्थाध्यक्ष ने सभी आमंत्रितो का स्वागत  दीपावली की शुभकामनायें देते हुए किया।तत्पश्चात संचालन की भूमिका प्रोफेसर डा0 अलका अरोड़ा ने संभाली, जिन्होने अपने चिर परिचित अंदाज में जानदार मंच संचालन किया।
    डा0 अरूण प्रकाश मिश्र अनुरागी ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम आगे बढाया।
    मां सरस्वती की कृपा मंच को मिल जाये तो फिर कहना ही क्या।
    महफिल यौवन की दहलीज छूने लगी।अध्यक्षा श्रीमती प्रमिला पाण्डेय से ही दीपावली अभिनंदन शुरू हुआ। एक सूरज उगा ले तथा मां की ममता के शब्दो ने उनकी उपस्थिति को सार्थक कर दिया।यह अलका का नया प्रयोग था उन्होने नई परम्परा डालते हुये सीधे कैप्टन को ही पहले मैदान मे उतारा। नागदा उज्जैन से निकिता डोले ने दीवाली सब त्योहारो की रानी , घर पर आया स्वर्ग  उतार कर गीत सुनाकर बहुत तालिया बटोरी।।वैसे भी वे मीठी आवाज की धनी मानी जाती है।।श्रृंगार के सुप्रसिद्ध कवि डा0 अरूण प्रकाश मिश्र अनुरागी की‌पायल की झनकार तो सबके दिल मे ऐसी छाई कि अलका जी मंत्रमुग्ध हो गयी। संस्थाध्यक्ष को लगा कि क्या करे तभी उन्होने रस परिवर्तन करते हुये हास्य-व्यंग्य के हस्ताक्षर कानपुर के लुल्ल कानपुरी अजीत सिंह राठौर को बुलाने का निर्णय लिया। कैक्टस के फूल और बेटी पर उनका हास्य एक करारी चोट थी समाज पर ।। अलीगढी ताले कब खुलेगे ? उन्होने प्रश्न कर सबको विचारमग्न कर दिया। अब पधारे श्री सदाशिव चतुर्वेदी मधुर।सब मिलकर इस बार दीवाली में,आओ इक संकल्प करे।खूब मिठाई बांटे पर, मन मे मधुर मिठास रहे।रिश्ते नाते खूब निभायें, दर्द का भी अहसास करे।।कुछ भी बोले उससे पहले, मन में खूब विचार करें।।  तनूजा जी नवीं मुंबई से  गुरू महिमा के बाद मेरे लिये जीना एक सजा हो गया।
    प्यार मेरा मुझसे जुदा हो गया। जाने किस बात से वो ख़फा हो गया।
    (मै पत्थर ) वह देखते ही देखते खुदा हो गया।। 
    पूजा अग्रवाल मुजफ्फरनगर उप्र ने इतिहास मे पहली बार दसकंधर की पीड़ा को इस दीवाली पर समझा। दस सिर के साथ उसका चलना फिरना कपड़े पहनना नहाना धोना  आदि आदि।। सच आखिर विधुजी को कहना पड़ा कि रावण का दर्द पूजा तुम्ही ने समझा। अगर मुंबई के 10×10 के फ्लैट मे रहता तो क्या होता। लखनऊ से किरण मिश्रा ने दर्द अनोखा दे गया गीत गाकर परदेशी से बचकर रहने की नसीहत दी। सीमा वार्णिक जी कानपुर से दीपावली अभिनंदन पर अच्छी कविता सुनाई ।।हम और एक कविता सुनना चाहते थे पर घड़ी तेजी से चल रही थी। आज की विशिष्ट अतिथि कानपुर से ही श्रीमती कुसुम सिंह चन्देल अविचल जी (अध्यक्ष संयोजक श्री सत्य संदेश संस्था) उन्होने राम पर अनुपम काव्य की प्रस्तुति दी। प्रतिध्वनित है व्योम व्योम में,
    राम समाये है रोम रोम मे और देखिये 
    राम मर्यादा के पर्याय है ।अविचल ने राम के अस्तित्व पर प्रश्न उठाने वालो पर कलम की तलवार चलाते हुये तीखा सवाल किया - वाचालो को मूक कर दिया सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय लाकर ।।
    अब बारी आई संस्था की संरक्षिका विद्युत प्रभा मंजू  का देहरादून से। उन्होने फरमाया जब बुराई पर अच्छाई का वास हो तब मनाये दीवाली और देखिये देश की मिट्टी से निर्मित स्वयं का दीपक जलाये ।। चलते चलते अपने नव प्रकाशित काव्य संकलन 'अंतर्मन के स्वर' का गीत इक हूक सी उठती है,  ये कैसी विरानी छाई है।
    हृदयांगन संस्थाध्यक्ष ने सभी की और से उनकी पुस्तक अंतर्मन के स्वर की सफलता की कामना करते हुये उन्हे बधाई दी।। 
    कार्यक्रम अपनी ऊंचाई पर था तभी विनय शर्मा दीप जो पत्रकार है और जाने माने कवि है सवैया तो उनकी पहचान है उन्होने आचार्य जी का वंदन कर सुन्दर सवैया प्रस्तुत की। यद्यपि विनय दीप से और भी हम कुछ सुनना चाहते थे पर उन्होने आचार्य की वाणी सुनने पर जोर दिया।तभी विधुजी ने आवाज दी बुला रहा हू अलका जी को,
    आये कुछ गीत प्यार के हमे सुनायें।
    स्वर लहरी वीणा वादिनि बन
    सबके अंतर्मन में छा जाये।।
    एक बेहतरीन गीत के साथ उन्होने आमंत्रित किया आचार्य श्रीकृष्ण द्विवेदी महाराज को जिन्होने हारमोनियम पर राम भजन गोपी गीत तथा अपने श्रीमुख से सबको अक्षय आशीर्वाद दिया। संस्था की ओर आचार्य जी को ससम्मान शाल श्रीफल रजत सिक्का और मानद राशि की उद्घोषणा विधुभूषण अध्यक्ष हृदयांगन संस्था द्वारा की गयी। उन्होने बताया कि 19 अक्टूबर 2021 को संस्था के सदस्य चिरंजीव ऐश्वर्य के विवाह के अवसर पर संस्था की संरक्षिका श्रीमती विद्युत प्रभा चतुर्वेदी मंजू अपने कर कमलो से इस सम्मान से आचार्यजी को सुशोभित करेगी। मंच संचालिका ने इस बार आभार प्रदर्शन का भी नियम बदला।डा0 प्रमिला पाण्डेय ने सभी को धन्यवाद देते हुये कार्यक्रम मे आचार्यश्री की उपस्थिति तथा उनके श्रीमुख से देववाणी से आशीर्वाद को अमूल्य निधि कह कर उन्हे नमन तथा उनका आभार व्यक्त किया। श्रीमती तृप्ति डोले और श्री विश्वनाथ डोले, आशुतोष जी आदि  ने कार्यक्रम मे अपनी उपस्थिति दर्ज की तथा  सैकड़ो की संख्या में श्रोताओ ने कार्यक्रम को सुना कमेन्ट लिखे और सराहा

    *वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के समन्वयक डॉ. राकेश कुमार यादव की तरफ से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं*
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