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    सरकारी डॉक्टर की डेंगू से हुई मौत, सैकड़ों बीमार | #NayaSaberaNetwork



    नया सबेरा नेटवर्क
     हरदोई । यूपी के हरदोई जिले में डेंगू बेकाबू हो गया है। डेंगू के प्रकोप से एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग प्राइवेट चिकित्सकों के पास इलाज करवा रहे हैं। वहीं, राजधानी लखनऊ में भी बड़ी संख्या में लोग भर्ती हैं। मंगलवार को हरदोई की बिलग्राम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर सबा फारूकी का भी डेंगू से निधन हो गया।
     बिलग्राम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर सबा फारूकी पिछले एक हफ्ते से बुखार से पीड़ित थीं और लखनऊ में उनका इलाज चल रहा था। जहां मंगलवार को उनका उपचार के दौरान निधन हो गया। डॉक्टर सबा फारुखी कोविड के दौरान लंबे अरसे तक कोविड अस्पताल लखनऊ में रह कर अपनी सेवाएं दी थीं। इस बीच वो कोविड पॉज़िटिव भी हुईं, लेकिन इलाज के बाद ठीक हो गई थीं।
     सरकारी आंकड़ों की यदि बात की जाए तो वह सच्चाई से बहुत दूर हैं। जिले के हर कोने में डेंगू का प्रकोप है। हर दूसरे घर में कोई न कोई सदस्य बुखार से पीड़ित है, लेकिन टेस्टिंग नहीं हो पा रही है। हालांकि, जिला प्रशासन का कहना है कि एनएस वन टेस्ट हर सीएचसी में हो रहे हैं, लेकिन चिकित्सक खुद कह रहे हैं कि यह विश्वनीय नहीं समझे जा सकते। लिहाजा एलाइजा टेस्ट ही डेंगू की पुष्टि कर सकता है। वहीं, एलाइजा टेस्ट केवल जिला चिकित्सालय में ही हो पाते हैं। जहां भी नाममात्र के टेस्ट हो रहे हैं। सोमवार को 135 टेस्ट हुए। जिनमें 45 पॉजिटिव पाए गए। वहीं, सरकारी आंकड़ों में अभी तक करीब 928 लोगों को डेंगू की पुष्टि हुई है और कोई भी मौत नहीं होने की बात प्रशासन कर रहा है।
     डेंगू के रोगी लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल में मात्र दस रोगियों के भर्ती होने की ही व्यवस्था है। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पांच-पांच बेड की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक बेड को मच्छरदानी से ढका गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि आठ मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं, बाकी मरीजों का इलाज उनके घर में ही चल रहा है।
     दरअसल, डेंगू तो लगातार बढ़ ही है तो वहीं मलेरिया ने भी लोगों को परेशान कर रखा है। सबसे अधिक खराब स्थिति बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों की है। इन क्षेत्रों में पानी जरूर उतर चुका है, लेकिन मलेरिया और डेंगू तेजी से फैल रहा है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि बाढ़ ग्रस्त इलाकों में स्वास्थ्य कैंप लगाए गए हैं। जहां चिकित्सक लगातार लोगों का इलाज कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकतर लोग प्राइवेट इलाज करवा रहे हैं।
     डेंगू और मलेरिया के बढ़ते प्रकोप से निजी पैथालॉजी में भारी भीड़ उमड़ रही है। पैथालॉजी डेंगू की जांच के लिए 1060 रुपये चार्ज कर रहीं हैं। शायद ही कोई निजी अस्पताल हो जहां डेंगू के मरीज नहीं भर्ती हों। सभी बड़े निजी अस्पतालों की अपनी पैथालॉजी हैं। वहीं, जिन निजी अस्पतालों की पैथालॉजी नहीं है, वह किसी न किसी पैथोलॉजी से जांच करवाते हैं और मरीजों से मन माफिक रुपये वसूल रहे हैं।

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