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    पतरही बाजार में दिखी रौनक,छठ पर्व सोमवार को नहाय खाय से हुआ शुरू | #NayaSaberaNetwork

    पतरही बाजार में दिखी रौनक,छठ पर्व सोमवार को नहाय खाय से हुआ शुरू  | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    कृष्णा सिंह
    पतरही, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोपा में स्थित पतरही बाजार में छठ पूजा खरीदारी काे लेकर दिखी रौनक,बाजार में छठ पूजा के निमित सामग्री की दुकानें रविवार से ही सज गईं।छठ पूजा की शुरूआत 8 नवंबर सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गई। नहाय-खाय के बाद दूसरे दिन मंगलवार को खरना होगा. इस पूजा में खरना का बहुत ही महत्व होता है।कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना मनाया जाता है।खरना में दिन भर व्रत के बाद व्रती महिलाएं रात को पूजा के बाद गुड़ से बनी खीर खाकर उसके बाद से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करती हैं खरना का महत्व- खरना को लोहंडा भी कहती हैं. छठ पर्व में इस दिन का विशेष महत्व होता है. नहाय-खाय वाले दिन घर को पवित्र कर व्रती अगले दिन की तैयारी करती हैं. जब खरना आता है तो सुबह व्रती महिलाएं स्नान ध्यान करके पूरे दिन का व्रत रखती हैं. इसी दौरान अगले दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए प्रसाद भी बनाया जाता है. शाम को पूजा के लिए गुड़ से बनी खीर बनाई जाती है. इस खीर को कुछ जगहों पर रसिया भी कहते हैं. इस प्रसाद को मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी से आग जलाकर बनाया जाता है. हालांकि सबके घरों में मिट्टी के चूल्हे की उपलब्धता न हो पाने की स्थिति में कुछ लोग नए गैस चूल्हे पर भी इसे बनाते हैं. पर चूल्हा नया हो और अशुद्ध न हो इसका खास ध्यान रखा जाता है.खरना की पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करने का भी विशेष नियम है. पूजा करने के बाद व्रती के प्रसाद ग्रहण करने के दौरान घर के सभी लोगों को बिल्कुल शांत रहना होता है.मान्यता है कि शोर होने के बाद व्रती खाना खाना बंद कर देता है. पूजा का प्रसाद व्रती के प्रसाद ग्रहण करने के बादी ही परिवार के अन्य लोगों में बांटा जाता है और परिवार उसके बाद ही भोजन करता है।तीसरे दिन बुधवार को छठ पर्व का मुख्य दिन है। इसमें षष्ठी तिथि पर शाम के समय सूर्यदेव को अर्ध्य दिया जाता जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने से पहले नदियों के किनारे लोग एकत्रित होकर बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ, लड्डू और अन्य पूजन सामग्री को सूप में सजाया जाता है। व्रती छठी माई की पूजा करती हैं और सूर्य को अर्घ्य देते हुए अपने परिवार के सुख समृद्धि की कामना करती है।चौथे दिन बृहस्पतिवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा। छठी माई को याद करते हुए माताएं अपने परिवार की सुख और समृद्धि का वर मांगती हैं।और प्रसाद खाकर व्रत का पारण करती हैं। छठ पूजा का संध्या अर्घ्य समय 10 नवंबर (संध्या अर्घ्य)सूर्यास्त का समय :17:30:16 व 11 नवंबर (उषा अर्घ्य) सूर्योदय का समय :06:40:10गौरतलब हो कि पतरही बाजार में खासताैर से मिट्टी के चूल्हें, जलावन के लिए आम की लकड़ी, दउरा-सूप, मिट्टी के दीये, कलश आदि सामग्रियाें की भरमार है। भारतीय सनातन धर्म में प्रत्यक्ष देवता सूर्य के आराधना छठ व्रत के रूप में किया जाता है।लाेकआस्था का पर्व छठ ही एकमात्र ऐसा पर्व है, जिसमें पंडित-पुराेहिताें के बगैर ही लाेग सूर्य देव की आराधना करते हैं।

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