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    पता अधूरा, कैसे वितरित हो मतदाता पहचान पत्र | #NayaSaberaNetwork

    पता अधूरा, कैसे वितरित हो मतदाता पहचान पत्र  | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    सरकार ने बीएलओ की जगह डाक विभाग को सौंपी है जिम्मेदारी
    पोस्टमैन किस पते पर वितरित करे इसको लेकर है असमंजस में
    आखिर मतदाताओं को कैसे मिल पायेगा उनका पहचान पत्र
    हिम्मत बहादुर सिंह/सैयद फ़ैज़ान आब्दी
    जौनपुर। आगामी 2022 में देश के सबसे बड़े आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। चुनाव को लोकतंत्र का पर्व कहा जाता है और वोट को आम आदमी का हथियार माना जाता है। चुनाव को लेकर सभी राजनैतिक दल के कार्यकर्ता दिन रात एक कर लोगों का नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए जुट गए हैं। निर्वाचन आयोग के नियमानुसार 18 वर्ष से ज्यादा उम्र का व्यक्ति वोट डाल सकता है लेकिन इसके लिए वोटर आईडी कार्ड यानी मतदाता पहचान पत्र होना जरूरी है। लोगों को पहले वोटर कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। निर्वाचन आयोग ने सहूलियत देते हुए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी। जिसमें एक भी रूपया खर्च किए बगैर लोग घर बैठे ऑनलाइन वोटर आईडी बनवा सकते हैं। बस इसके लिए मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और एक एड्रेस प्रूफ होना चाहिए। भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर सीधे राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल लिंक पर जाकर रजिस्ट्रेशन करके फॉर्म भरना होता है। विधानसभा चुनाव से पहले जो लोग 18 साल के हो गए हैं या हो जायेंगे उन नए मतदाताओं को पहली बार वोट डालने का मौका मिलेगा। इसके लिए यह जरूरी है कि उनका वोटर कार्ड बनकर समय से उन तक पहुंच जाए। जिले में हर साल विधानसभा मतदाता सूची पुनरीक्षण का अभियान  चलता है। इसमें नए मतदाता बनने के साथ-साथ पुराने नाम काटने और त्रुटियों को ठीक किया जाता है। हर साल हज़्ाारों की संख्या में नए मतदाता बनते हैं। मतदाता पहचान पत्र के लिए भाग दौड़ न करनी पड़े और समय से लोगों को वोटर कार्ड मिल सके इसके लिए निर्वाचन विभाग ने वोटर कार्ड वितरण की जिम्मेदारी बीएलओ की जगह डाक विभाग के पोस्टमैन को दे रखी है। अब डाकिया लोगों के घरों तक उनका वोटर आईडी कार्ड पहुंचाएगा। गौरतलब हो कि पहले बीएलओ के माध्यम से वोटर कार्ड का वितरण कराया जाता था। जहां काफी मतदाताओं की शिकायत रहती थी कि उनका पहचान पत्र नहीं मिला। इस कमी को दूर करने के मकसद से आयोग ने पहचान पत्र घर-घर पहुंचाने का फैसला लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ डाक विभाग का एमओयू हस्ताक्षर होने के बाद नई व्यवस्था के तहत निर्वाचन विभाग पहचान पत्र डाक विभाग को उपलब्ध कराएगा। इसके एवज में डाक विभाग निर्वाचन विभाग से प्रति कार्ड 41 रु पए स्पीड पोस्ट बुकिंग शुल्क के तौर पर लेगा। आनन फानन में जिला निर्वाचन कार्यालय ने मुख्य डाक घर के अलावा अन्य उपडाकघरों में ढाई से तीन हजार पहचान पत्र बुकिंग के लिए सौंप दिया। डाक विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ एक डाकघरों को छोड़ दिया जाये तो जिले के अधिकांश डाकघर सिंगल हैंडेट सिस्टम पर चल रहे हैं। इन डाकघरों में एक ही कर्मचारी एसबी,आरडी, जमा निकासी, खाता खोलना व बंद करना, अभिकर्ताओं की लाट जमा करने से लेकर अन्य कार्य एक ही कम्प्यूटर पर होता है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में बुकिंग के लिए मिल रहे मतदाता पहचान पत्र को कर्मचारी वर्किंग ऑवर से पहले व बाद में ओवरटाईम करके प्रतिदिन औसतन सौ से डेढ़ सौ तक बुक कर पा रहे हैं। इस हिसाब से दो से ढाई हजार मतदाता पहचान पत्र बुक होने में बीस से पच्चीस दिन लग जायेंगें। देखा जाये तो निर्वाचन विभाग की जल्दबाजी में की गई गलती का खामियाजा अधिकांश मतदाताओं को भुगतना पड़ेगा। प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर रामकुमार यादव ने बताया कि निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं को भेजे गए लिफाफे पर पते के कालम में डाकघर का उल्लेख न करके थाना लिख दिया है। यानी नाम ग्राम,थाना व जिला लिख कर बुकिंग के लिए दिया गया है। जिस कारण पोस्टमैनो को संबंधित व्यक्ति के घर को ढूंढ़ने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार ढूंढ़ने पर जब पता नहीं चलता है तो पोस्टमैन द्वारा आर्टिकिल प्रेषक को रिमार्क लगाकर वापस कर दिया जाता है। यदि निर्वाचन विभाग द्वारा लिफाफे पर मतदाताओं का मोबाइल नंबर लिखा गया होता तो उसके वितरण में सहूलियत होती। जिसका नतीजा यह है कि 30 से 40 प्रतिशत पहचान पत्र बिना वितरित हुए डाकिया द्वारा निर्वाचन विभाग को वापस लौटा दिया जा रहा है। जिस कारण निर्वाचन कार्यालय में बिना वितरित हुए पहचान पत्र डंप हो रहे हैं। इन पहचान पत्रों का क्या होगा इसको बताने के लिए जिम्मेदार कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। दीगर बात ये है कि जब पता पूर्ण नहीं था तो फिर डाक विभाग ने बुकिंग क्यों की। जो भी हो दोनो विभागों के चक्कर में मतदाता ऊहाफोह की स्थिति में हंै कि आखिर उनका पहचान पत्र मिलेगा तो कैसे। निर्वाचन आयोग इस मामले को गंभीरता से अगर नहीं लिया तो बना बनाया मतदाता पहचान पत्र मतदाताओं तक पहुंचना संभव नहीं दिख रहा है।

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