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    भारत में तेज़ी से बढ़ती इंधन की मांग - कच्चे तेल के आयात पर बढ़ती निर्भरता भविष्य की तीव्र विकास गति क्षमता को बाधित कर सकती हैं | #NayaSaberaNetwork




    एथेनॉल, बायोडीजल, कंप्रेस्ड बायोगैस जैसे घरेलू इंधन के विकास में उर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने की क्षमता कर तीव्रता से दोहन ज़रूरी - एड किशन भावनानी
    नया सबेरा नेटवर्क
    गोंदिया - वैश्विक रूप से गहराते जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से चिंतित विश्वके हर देश ने अपने - अपने देशों में इस संबंध में सकारात्मक कदम उठाते हुए अपनी नीतियों और योज़नाओं के माध्यम से उपायों पर कार्य करना शुरू कर दिया है, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा और पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव डालने वाले मानवीय सुविधाओं की आदत बन चुके संसाधनों का पर्यायवाची साधन जुटाने पर अनेक देश काम कर रहे हैं। जैसे पेट्रोल डीजल इत्यादि उत्सर्जन कार्बन के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है और उस देश की आर्थिक स्थिति व्यवस्था भी गड़बड़ा जाती है क्योंकि इसके लिए कच्चे तेल, गैस पर बाहरी देशों पर निर्भरता विकास की क्षमता को बाधित करती है।... साथियों बात अगर हम भारत की करें तो भारत ने भी कच्चे तेल के आयात पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए एथेनॉल, बायोडीजल कंप्रेस्ड, बायोगैस (सीबीजी) जैसे घरेलू इंधन के विकास में उर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने की क्षमता पर बल दिया है।...साथियों बात अगर हम घरेलू उपयोगी गैस की करें तो कुछ वर्षों से जो हमने देखा है कि किस तरह लाखों लोगों को गैस योजना के अंतर्गत जोड़ा गया और चूल्हा धुआं से मुक्ति दिलाई गई थी। उसी तरह वर्तमान बदलते परिवेश में आज पेट्रोल डीजल को की मांग कई गुना बढ़ गई है क्योंकि आज़ हर मानव गाड़ी से घूमने को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बनाया है या फिर आज़ पैदल चलने का प्रचलन बंद हो गया है। इस तरह आज़ मानवीय सुविधाओं में भी पेट्रोलियम पदार्थों का उपयोग बढ़ते चला है, जिसके कारण पेट्रोलियम आयात में हमारी निर्भरता बढ़ती जा रही है, जो हमारी अगली पीढ़ियों के लिए घातक सिद्ध होगी, इसलिए घरेलू ईंधन के विकास में ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने और नए वर्जन की प्रौद्योगिकीयों पर तीव्रता से संज्ञान लेकर उनका क्रियान्वयन करना होगा। हालांकि इस दिशा में माननीय पीएम और यातायात मंत्री बहुत ही गंभीरता से अपनी योजनाओं को प्राथमिकताओं में शामिल कर इन घरेलू इंधन के निर्माण में अधिकतम उपलब्धता पर जोर दे रहे हैं। पीआईबी की 7 अक्टूबर 2021 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पिछले छह वर्षों के दौरान, इस सरकार ने इथेनॉल उत्पादन के लिए अतिरिक्त गन्ना आधारित कच्चे माल (जैसे गन्ने का रस, चीनी, चीनी सिरप) के रूपांतरण की अनुमति देकर तरलता की कमी वाले चीनी उद्योग में 35, हज़ार करोड़ रुपये का सफलतापूर्वक निवेश किया है। इससे निश्चित रूप से गन्ना किसानों के बकाया के जल्द निपटान में मदद मिली है और उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। मौजूदा सीज़न के लिए, यह उम्मीद की जाती हैकि अकेले इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम के माध्यम से 20, हज़ार करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया जाएगा, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विकास को बढ़ावा देगा,जो चुनौतीपूर्ण कोरोना काल में सबसे अनुकूल क्षेत्र है।...साथियों बात अगर हम घरेलू इंधन के विकास में ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने की करें तो इन क्षेत्रों में बहुत ही तीव्रता से काम शुरू है और रणनीतिक रोडमैप बनाकर काम को तीव्रता से अंजाम देना ज़रूरी है और जिस की डेडलाइन 2025 तक रखी गई थी जिसे फिर बदलकर 2023 किया गया था पर उम्मीद है कि यह 2022 के मध्य में ही हम हासिल कर लेंगे।सबसे बड़ा कार्य पेट्रोलमें एथेनॉल के मिश्रण की प्रतिशत को बढ़ाना है जिसके लिए एथेनॉल का भारी उत्पादन ज़रूरी है जिसको अनेक विकल्पों जैसे कचरा,गन्ना सहित अनेक वेस्ट मटेरियल से बनाने की प्रक्रिया पर संज्ञान संबंधित विभाग द्वारा लिया गया है और तेजी से कार्य चालू है।...साथियों बात अगर हम इन घरेलू इंधन के विकास में अतिरिक्त उत्पादन में गन्ना आधारित विकल्प की करें तो पीआईबी के अनुसार, सबसे तेज़ी से बढ़ते अपने देश में ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है और कच्चे तेल के आयात पर लगातार बढ़ती निर्भरता हमारी भविष्य की विकास क्षमता को काफी हद तक बाधित कर सकती है। एथनॉल, बायोडीजल, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) जैसे घरेलू ईंधन के विकास में ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने की क्षमता है। हमें यह समझना बहुत जरूरी है कि भारत जैसे युवा देश के लिए, जहां भोजन की जरूरतों को पूरा करना सर्वोपरि है, वहीं हर तरह से ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करना भी महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, बदले हुए परिदृश्य में, ईंधन के साथ आहार, होना चाहिए न कि आहार बनाम ईंधन। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारत में तेजी से बढ़ती ईंधन की मांग और कच्चे तेल के आयात पर बढ़ती निर्भरता भविष्य की विकास क्षमता को बाधित कर सकती है इसलिए एथेनॉल बायोडीजल कंप्रेस्ड बायोगैस जैसे घरेलू इंधन के विकास में ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने की क्षमता का तीव्रता से दोहन करना तात्कालिक ज़रूरी है। 

    -संकलनकर्ता लेखक कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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