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    ट्राइब्यूनलों के खाली पदों को भरने में केंद्र की मनमानी से भड़का सुप्रीम कोर्ट | #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
     नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की ट्राइब्यूनल में खाली पड़े पदों को भरने के मामले में केंद्र सरकार के प्रति गहरी नाराजगी जताई है और कहा कि सेलेक्शन कमिटी ने जिन नामों की सिफारिश की थी उनमें से नाम चुनने में केंद्र सरकार ने अपनी मनमर्जी चलाई है।
     सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज की अगुवाई में चयन प्रक्रिया के बाद नाम की सिफारिश की गई थी, लेकिन चयनित सूची से कुछ नाम केंद्र ने चुन लिए और बाकी नाम वेटिंग लिस्ट से ले लिया। चीफ जस्टिस ने रोष जाहिर करते हुए कहा कि हम लोकतांत्रित देश में हैं, यहां कानून का राज है और हम संविधान के तहत काम करते हैं। आप (केंद्र सरकार) यह नहीं कह सकते हैं कि हम नामों को स्वीकार नहीं कर सकते।
     इस पर केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार का अधिकार कि वह सिफारिश को न माने। तब चीफ जस्टिस एनवी रमन ने कहा, 'कानून का राज है, आप नाम अस्वीकार करने की बात नहीं कर सकते।'
      दरअसल, सुप्रीम कोर्ट देशभर के न्यायाधिकरणों (Tribunals) में खाली पदों से काफी खफा है। उसने कहा कि जिस तरह से नियुक्तियां की गई हैं, वे 'अपनी पसंद के लोगों का चयन' किए जाने का स्पष्ट संकेत देती हैं। न्यायालय ने केंद्र को दो सप्ताह के भीतर उन ट्राइब्यूनल्स में नियुक्तियां करने का निर्देश दिया है, जहां पीठासीन अधिकारियों के साथ-साथ न्यायिक एवं तकनीकी सदस्यों की भारी कमी है।
     देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्र से यह भी कहा कि यदि अनुशंसित सूची में शामिल व्यक्तियों को नियुक्त नहीं की जाती है, तो वह इसका कारण बताए। प्रधान न्यायाधीश (CJI) एन वी रमण, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि न्यायाधिकरणों में रिक्तियों के कारण स्थिति 'दयनीय' है और वादियों को अधर में नहीं छोड़ दिया गया है।
     सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- यह किस तरह की नियुक्ति है?
    पीठ ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा, 'जारी किए गए नियुक्ति पत्र इस ओर स्पष्ट इशारा करते हैं कि उन्होंने चयन सूची (Selection List) से अपनी पसंद से तीन लोगों और प्रतीक्षा सूची (Waiting List) से अन्य लोगों को चुना तथा चयन सूची में अन्य नामों को नजरअंदाज किया। सेवा कानून (Service Law) में आप चयन सूची को नजरअंदाज करके प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति नहीं कर सकते। यह किस प्रकार का चयन एवं नियुक्ति है?'
     'हमने देशभर की यात्रा की। हमने इसमें बहुत समय दिया। कोविड-19 के दौरान आपकी सरकार ने हमसे जल्द-से-जल्द इंटरव्यू लेने का अनुरोध किया। हमने समय व्यर्थ नहीं किया।
    एनवी रमन, प्रधान न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय
     वेणुगोपाल ने पीठ को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार खोज और चयन समिति की ओर से अनुशंसित व्यक्तियों की सूची से दो सप्ताह में न्यायाधिकरणों में नियुक्तियां करेगा। वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा कि आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) के लिए खोज एवं चयन समिति ने 41 लोगों की सिफारिश की, लेकिन केवल 13 लोगों को चुना गया और यह चयन किस आधार किया गया, यह 'हम नहीं जानते'। पीठ ने कहा, 'यह कोई नई बात नहीं है। हर बार की यही कहानी है।'
     चीफ जस्टिस ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों ने कोविड-19 के दौरान नामों का चयन करने के लिए व्यापक प्रक्रिया का पालन किया और सभी प्रयास व्यर्थ जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हमने देशभर की यात्रा की। हमने इसमें बहुत समय दिया। कोविड-19 के दौरान आपकी सरकार ने हमसे जल्द-से-जल्द इंटरव्यू लेने का अनुरोध किया। हमने समय व्यर्थ नहीं किया।'
     प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ताजा नियुक्ति के तहत सदस्यों का कार्यकाल केवल एक साल होगा। उन्होंने कहा, 'एक साल के लिए कौन सा न्यायाधीश यह काम करेगा?' चयन समिति द्वारा अनुशंसित नामों को अस्वीकार किए जाने के मामले पर वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार के पास सिफारिशों को स्वीकार नहीं करने का अधिकार है। सीजेआई ने कहा, 'हम एक लोकतांत्रिक देश हैं, जहां कानून के शासन का पालन किया जाता है और हम संविधान के तहत काम कर रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि मैं स्वीकार नहीं करता।' पीठ ने कहा, 'यदि सरकार को ही अंतिम फैसला करना है, तो प्रक्रिया की शुचिता क्या है? चयन समित नामों को चुनने की लिए एक विस्तृत प्रक्रिया का पालन करती है।'
     विभिन्न प्रमुख न्यायाधिकरणों और अपीली न्यायाधिकरणों में लगभग 250 पद खाली हैं। सुप्रीम कोर्ट इन ट्राइब्यूनलों में खाली पदों से संबंधित याचिकाओं और अर्ध न्यायिक निकायों को नियंत्रित करने वाले नए कानून संबंधी मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

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