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    राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - पाम ऑयल - खानें के तेल में आत्मनिर्भरता पाने के लिए विशेष योजना - किसान, ग्रामीण प्रतिभा को बढ़ावा दें | #NayaSaberaNetwork

    राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - पाम ऑयल - खानें के तेल में आत्मनिर्भरता पाने के लिए विशेष योजना - किसान, ग्रामीण  प्रतिभा को बढ़ावा दें   | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    आत्मनिर्भर भारत को तेज़ी से बनाने, कृषि सहित कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर के रणनीतिक रोडमैप पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी - एड किशन भावनानी
    गोंदिया - भारत एक कृषि प्रधान, गांव प्रधान देश है। भारत के आत्मनिर्भर भारत के सपनों को साकार करने के लिए हमें कृषि क्षेत्र और गांवों में इस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी का निर्माण एक रणनीतिक रोडमैप बनाकर करना होगा ताकिकिसान तथा ग्रामीण प्रतिभा को बढ़ावा मिल सकें, जो वस्तुएं हम सबसे अधिक आयात करते हैं, उन्हें इस ढांचागत प्रणाली के अंतर्गत भारत में निर्माण करने के लिए कृषकों और ग्रामीणों को प्रोत्साहित करना जरूरी है और उनके कार्यबल का पूर्ण सहयोग लिया जाना अत्यंत जरूरी है।...साथियों बात अगर हम जापान और विस्तार वादी नीति वाले देश की करें तो वहां गांव-गांव घर-घर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, खिलौने इत्यादि अनेक वस्तुओं का निर्माण होता है। इसी तर्ज पर भारत में भी अनेक खाद्य पदार्थों के आयात वाली वस्तुओं का भारत में ही उत्पादन करने के लिए कृषकों, गांववासियों के कार्य बल पर जोर देना होगा जिससे रोजगार के अवसर तो उत्पन्न होंगे ही और आत्मनिर्भर भारत के बल पर हमारे पीएम के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने का सपना भी साकार होगा...। साथियों बात अगर हम तेल क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की करें तो दिनांक 9 अगस्त 2021 को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत वित्तीय लाभ की किस्त के वितरण के अवसर पर पीएम ने खाने के तेल में आत्मनिर्भरता लाने के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम की घोषणा की, पीआईबी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पीएम ने कहा, इस मिशन के माध्यम से खाने के तेल से जुड़े इकोसिस्टम पर 11 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया जाएगा। सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि किसानों को उत्तम बीज से लेकर टेक्नॉलॉजी, उसकी हर सुविधा मिले। इस मिशन के तहत ऑयल-पाम की खेती को प्रोत्साहन देने के साथ ही हमारी जो अन्य पारंपरिक तिलहन फसलें हैं, उनकी खेती को भी विस्तार दिया जाएगा। आज भारत कृषि निर्यात के मामले में पहली बार दुनिया के टॉप-10 देशों में पहुंचा है। कोरोना काल में ही देश ने कृषि निर्यात के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। आज जब भारत की पहचान एक बड़े कृषि निर्यातक देश की बन रही है, तब हम खाद्य तेल की अपनी ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहें, ये बिल्कुल उचित नहीं है।इसमें भी आयातित ऑयल-पाम, का हिस्सा 55 प्रतिशत से अधिक है। इस स्थिति को हमें बदलना है। खाने का तेल खरीदने केलिए हमें जो हज़ारों करोड़ रुपए विदेश में दूसरों को देना पड़ता है, वो देश के किसानों को ही मिलना चाहिए। भारत में पाम – ऑयल की खेती के लिए हर ज़रूरी संभावनाएं हैं। नॉर्थ ईस्ट और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में, विशेष रूप से इसे बहुत बढ़ाया जा सकता है। ये वो क्षेत्र हैं जहां आसानी से पॉम की खेती हो सकती है। पाम-ऑयल का उत्पादन हो सकता है। खाने के तेल में आत्मनिर्भरता के इस मिशन के अऩेक लाभ हैं। इससे किसानों को तो सीधा लाभ होगा ही, गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सस्ता और अच्छी क्वालिटी का तेल भी मिलेगा। यही नहीं, ये मिशन बड़े स्तर पर रोजगार का निर्माण करेगा, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बल देगा। विशेष रूप से फ्रेश फ्रूट बंच प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योगों का विस्तार होगा। जिन राज्यों में पाम-ऑयल की खेती होगी, वहां ट्रांसपोर्ट से लेकर फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में युवाओं को अनेक रोज़गार मिलेंगे। पिछले छह सालों में दाल के उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जो काम हमारे किसानों ने दलहन में किया है, वही काम हमें तिलहन में भी करना होगा। इसके लिए हमें तेजी से काम करना है ताकि देश इसमें भी आत्मनिर्भर बन सके। खाने के तेल में आत्मनिर्भरता पाने के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (पाम ऑयल) का संकल्प लिया गया है। इसके तहत किसानों को हर तरह की सुविधा दी जाएगी। वहीं, पारंपरिक तिलहन की खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा नेशनल एडिबल ऑयल मिशन के तहत केंद्र सरकार का पाम ऑयल उत्पादन बढ़ाने पर जोर रहेगा। भारत में तैलीय बीजों वाले पेड़-पौधों की उपज बहुत कम होती है। अब इसे बढ़ाकर इतना करने की योजना बनी है, जिससे किसानों की आय को भी दोगुना किया जा सके,इससे पहले भी भारत को दालों की उपज के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश हो चुकी है। भारत सरकार ने कृषि मंत्रालय को ऐसी योजना बनाने को कहा था कि जिससे आने वाले सालों में खाद्य तेलों का आयात बंद किया जा सके।... साथियों बात अगर हम इस तेल की करें तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अनुसार, भारत अपनी घरेलू खपत के लिए पाम ऑयल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से मंगाता है। क्रूड पाम ऑयल इंडोनेशिया से जबकि रिफाइंड पाम ऑयल मलेशिया से आयात किया जाता है। विदेशों से मंगाए गए पाम ऑयल को कई घरेलू कारोबारी दूसरे तेलों के साथ मिलाते हैं और इस तरह अपने तेल उत्पादन के खर्च को कम रखते हैं। सूर्यमुखी का तेल यूक्रेन और रूस से मंगाया जाता है। बीते करीब 20 सालों में भारत के रसोइघरों में रिफाइंड तेलों का इस्तेमाल काफी बढ़ा है और उसमें भी सूर्यमुखी के तेल वाले ब्रांड बहुत ज्यादा लोकप्रिय हुए है। भारत में सोया और पामऑयल का सबसे ज्यादा आयात होता है। खाने वाले तेलों में जहां पाम ऑयल यानि ताड़ का तेल कुल आयात का 40 फीसदी होता है वहीं सोयाबीन का तेल करीब 33 फीसदी होता है।सोयाबीन का तेल अर्जेंटीना और ब्राजील से आयात होता है। पाम ऑयल वनस्पति तेल है। दुनिया में इसका व्यापकपैमाने पर इस्तेमाल होता है। होटल,रेस्तरां में भी पाम तेल का इस्तेमाल खाद्य तेल की तरह होता है। इसके अलावा कई उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है। नहाने वाले साबुन बनाने में भी पाम तेल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।पाम तेल ताड़ के पेड़ के बीजों से निकाला जाता ह।इसमें कोई महक नहीं होती। जिसकी वजह से हर तरह का खाना बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह बहुत ऊंचे तापमान पर पिघलता है, इसमें सैचुरेटेड फैट बहुत अधिक होता है। यही वजह है कि इससे मुंह में पिघल जाने वाली क्रीम और टॉफी-चॉकलेट बनाये जाते हैं। फिलहाल दुनिया भर में 8 करोड़ टन के आसपास पाम ऑयल पैदा होता है। पीएम ने कहा भारत 75 वीं स्वर्णम जयंती मना रहा है, इस अवसर पर हमें ये तय करना है कि आने वाले 25 वर्षों में हम भारत को कहां देखना चाहते हैं। देश जब आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा 2047 में,तब भारत की स्थिति क्या होगी,ये तय करने में हमारी खेती, हमारे गांव, हमारे किसानों की बहुत बड़ी भूमिका है। ये समय भारत की कृषि को एक ऐसी दिशा देने का है, जो नई चुनौतियों का सामना कर सके और नए अवसरों का भरपूर लाभ उठा सके। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे के राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-पाम-ऑयल खाने के तेल में आत्मनिर्भरता लाने केलिए विशेष योजना की जो घोषणा की गई है, इसमें किसानों ग्रामीणों की प्रतिभा को बढ़ावा देना होगा। आत्मनिर्भर भारत को तेजी से बढ़ाने के लिए कृषि सहित कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर के रणनीतिक रोडमैप पर ध्यान केंद्रित करना होगा। 
    संकलनकर्ता कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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