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    समाजसेवा के बाद जैविक खेती को बनाया हथियार | #NayaSaberaNetwork



    समाजसेवा के बाद जैविक खेती को बनाया हथियार  | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    वर्मी कम्पोस्ट से जैविक खेती को दे रहे बढ़ावा, लोगो के लिए  बने प्रेणना
    चेतन सिंह
    बरसठी, जौनपुर।  पहले ग्राम प्रधान के रूप में गांव की सेवा के प्रति अपना फर्ज निभाया और फिर जैविक खेती से न सिर्फ शुद्ध अन्न उपजा रहे है बल्कि तमाम बीमारियों से परिवार की सुरक्षा के साथ-साथ लोगो के लिए प्रेणना का सबब बने है। ऐसे जांबाज शख्स बरसठी विकास खंड के सरसरा गांव निवासी पूर्व प्रधान 57 वर्षीय गणेश प्रताप यादव है। वह जैविक खेती को अपनाकर धान, गेंहू की खेती तो कर ही रहे है साथ ही बागवानी के रूप में सब्जी व फलो कि खेती कर लोगो को सिख भी दे रहे है। उनसे क्षेत्र के तमाम किसान प्रेणना लेकर जैविक खेती करना शुरू कर चुके है। यही नही पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी उनका विशेष लगाव है। यही वजह है कि उन्होंने बागवानी के रूप में विभिन्न पौधरोपण भी किया है। गणेश प्रताप यादव वर्ष 2005 में गांव के प्रधान चुने गए 5 वर्षो के कार्यकाल के बाद विरासत में मिली खेती को उन्होंने अपने जीवन का हथियार बना लिया। जैविक खेती करने का बीड़ा उठाया तो आगे बढ़ते गए। गणेश प्रताप यादव बताते है कि, पहले उन्होंने बरसठी कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर जैविक खेती के गुर सीखे उसके बाद अवसर मिला तो वे गोरखपुर, नागपुर, दिल्ली, बिहार, लखनऊ सहित अन्य स्थानो पर जाकर प्रशिक्षण प्राप्त किए। रविवार को राष्ट्रीय सहारा से ख़ास बातचीत में किसान गणेश प्रसाप यादव बताते है कि, केचुआ प्राचीन काल से ही किसानों का मित्र रहा है। लेकिन कीटनाशक रसायनों का इस्तेमाल करने से केचुआ धरती की कोख से गायब होता जा रहा है। यही वजह है कि, खेत की मिट्टी बीमार और जीवांश खत्म होते जा रहे है। पांच वर्ष पूर्व उनके मन मे केंचुए से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने की इच्छा जागृत हुई जिसके लिए उन्होंने स्थानीय कृषि विभाग के अधिकारियों के संपर्क कर प्रशिक्षण प्राप्त किया। आइसीनिया फोटिडा (रेड वर्म) नामक भारतीय केंचुए को लाकर वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया। इस प्रजाति के केंचुए की विशेषता है कि रख-रखाव आसान व उत्पादन क्षमता अधिक होने के कारण पांच किलो केंचुआ दो महीने में लगभग दो कुंतल खाद तैयार कर देता है। किसान गणेश वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर लगभग तीन एकड़ से ज्यादा खेत मे खाद बनाकर गन्ना, गेंहू, धान, मकाई, सब्जी, फूलों तथा फलों के पौधों व अन्य खेती में इस्तेमाल में डालने लगे। शुरू में उपज कुछ कम हुई लेकिन जब खेत संपूर्ण रूप से जैविक खाद मिश्रित हो गया तो उर्वरता अपने आप बढ़ गई। इससे खेत की फसल लहलहाने लगी। उपज भी भरपूर मिलने लगी। उन्होंने बताया कि, जैविज खेती के लिए वर्मी कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है। जबकि रासायनिक उर्वरकों से खेत की मिट्टी कमजोर व सख्त हो जाती है। धीरे-धीरे पैदावार भी घट जाता है। उन्होंने किसानों को वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर स्वस्थ्य रहने के लिए ज्यादा से ज्यादा जैविक खेती करने की सलाह दी है।

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