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    बदलते दौर में महिलाओं का सम्मान | #NayaSaberaNetwork

    आज हम 21वी सदी में जी रहे है, जहाँ महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी की हिस्सेदारी की बात तो की जाती है लेकिन जब वही महिला उस बराबरी को हासिल करना चाहती है तो हमारा अपना समाज उसको रोकने के लिये क्या कुछ नहीं करता, अगर बात शिक्षा की आये तो हमारा समाज दो खेमो में बँट जाता है कोई कहता है शिक्षा सभी का अधिकार है और वही समाज यह भी कहता है कि महिला शिक्षा लेकर करेगी क्या? यही महिलाओं की अशिक्षा का सबसे बड़ा कारण है, आज हम उस समाज में रह रहे है जहाँ महिलाओं को देवी तो माना जाता है लेकिन उसी देवी का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते है! क्या हम इस समाज को महिलाओं को सम्मान वाला समाज कहेंगे? मेरे हिसाब से ये समाज महिला विरोधी है और इस महिला विरोध में सबसे बड़ा हिस्सा भी महिला का ही होता है और इस बात को समझने के लिए अपने ही समाज के घरों के भीत्तर झांकना पड़ेगा जहां पे एक मां अपने सुपुत्रों को तो घर के चिराग के रूप में स्वीकारती है लेकिन अपनी सुपुत्री को पराया धन मानती है , क्योंकि हमारा समाज महिला को ऊपर जाते नही देख सकता है, उसको ये लगता है महिला कमजोर है और वो कुछ नहीं कर सकती है इसलिए वे सभी पूर्ण रूप से एक महिला को मजबूत नहीं मानते है।मेरे स्वयं के विचार यह है कि महिला वह सबकुछ कर सकती है जो एक पुरुष कर सकता, चाहे शिक्षा की बात हो, चाहे नौकरी-व्यापार की बात हो या फिर सामाजिक-राजनीतिक जीवन जीने की बात हो! एक महिला वह सबकुछ कर सकती है जो एक पुरुष कर सकता है और इसमें निसंदेह महिला को आगे किया जा सकता है।


    मोहम्मद आमिद(छात्र बीएचयू)
    पूर्व राष्ट्रीय संयोजक(SM)NSUI

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