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    14 अगस्त विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस घोषित - भेदभाव, दुर्भावना, वैमनस्य खत्म होगा और मानव सशक्तिकरण, सामाजिक सदभाव, एकता की भावना मजबूत होगी | #NayaSaberaNetwork



    अपनी जड़ों से विस्थापित पीड़ितों के ज़जबे को सलाम - विभाजन में झेले गए दर्द, संघर्ष और पीड़ा बलिदान से कम नहीं - एड किशन भावनानी
    नया सबेरा नेटवर्क
    गोंदिया - भारत के इतिहास के बारे में हम बचपन में स्कूलों में पढ़ते आ रहे हैं कि भारत वर्षों से अंग्रेजों के आधिपत्य में था याने गुलाम बना हुआ था उस अवधि की पूरी परिचर्चा इतिहास में दर्ज है।...साथियों बात अगर हम भारत के विभाजन और उसकी विभीषिका कि करें तो सबसे पहले, दिसंबर में मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के उत्पीड़न की जाँच के लिए एक समिति बनाई पाकिस्तान बनने की कड़ी में एक अहम पड़ाव 23 मार्च 1940 को आया। इस दिन मुस्लिम लीग ने लाहौर में एक प्रस्ताव रखा जिसे बाद में पाकिस्तान प्रस्ताव के नाम से भी जाना गया। भारत का विभाजन माउंटबेटन योजना के आधार पर निर्मित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के आधार पर किया गया। इस अधिनियम में कहा गया कि 15 अगस्त 1947 को भारत व पाकिस्तान अधिराज्य नामक दो स्वायत्त्योपनिवेश बना दिए जाएंगें और उनको ब्रिटिश सरकार सत्ता सौंप देगी।स्वतंत्रता के साथ ही 14 अगस्त को पाकिस्तान अधिराज्य (बाद में जम्हूरिया ए पाकिस्तान) और 15 अगस्त को भारतीय संघ (बाद में भारत गणराज्य) की संस्थापना की गई।साथिया बात यहीं समाप्त नहीं हुई। 14 अगस्त 2021 को माननीय पीएम महोदय ने जो 14 अगस्त को हर साल विभाजन की भीषण विभीषिका का स्मृति दिवस घोषित किया है, यह पीड़ितों के संघर्ष और बलिदान की याद हर साल 14 अगस्त को दिलाएगा। हम इस दिन को याद कर यह ज़रूर सीखेंगे कि किसी से भी भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना नहीं करनी चाहिए और इस ज़हर को समाप्त करने की प्रेरणा मिलेगी। जिसके कारण एकता, सामाजिक सदभाव, और मानव सशक्तिकरण की भावना मजबूत होगी।... साथियों बात अगर हम 14 अगस्त की विभाजन विभीषिका की करें तो हमारा परिवार और समाज भी इस विभाजन विभीषिका का दंश झेलने में शामिल है। हमारे पिता और बड़े बुजुर्गों ने जो बातें हमें बताई, वह याद करके हम सिहर उठते हैं कि, किस तरह कत्लेआम मचा हुआ था,ऐसी हिंसा का वर्णन मैंने खुद ने अपने पिता और बुजुर्गों से सुना था कि विभाजन के दौरान हिंसा में लाखो लोग मारे गए थे और करीब डेढ़ करोड़ लोग विस्थापित हुए, जिसमें हमारा परिवार और समाज भी शामिल था। 14 अगस्त 2021 को विभाजन विभीषिका दिवस मनाने की घोषणा से हमारे पिता और बुजुर्गों द्वारा बताए गए हिंसात्मक मंजर की याद फिर से ताज़ा हो गई। पीएम की इस अपार सहानुभूति से,पीड़ितों और उनकी पीढ़ियों के, साहस और ज़जबे को सशक्त बल मिला।...साथियों बात अगर हम पीएम महोदय के ट्वीट की करें तो, देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफ़रत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है।पीएम ने कहा, लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। राष्ट्र के विभाजन के कारण अपनी जान गंवाने वाले और अपनी जड़ों से विस्थापित होने वाले सभी लोगों को उचित श्रद्धांजलि के रूप में, सरकार ने हर साल 14 अगस्त को उनके बलिदान को याद करने के दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। इस तरह के दिवस की घोषणा से देशवासियों की वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को विभाजन के दौरान लोगों द्वारा झेले गए दर्द और पीड़ा की याद आएगी। तदनुसार, सरकार 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्‍मृति दिवस के रूपमें घोषित करती है। 14-15 अगस्त,2021 की आधी रात को पूरा देश ने 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाया, लेकिन इसके साथ ही विभाजन विभीषिका का दर्द और हिंसा भी देश की स्मृति में गहराई से अंकित है। हालांकि, देश बहुत आगे बढ़ गया है और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। लेकिन देश के विभाजन के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। अपनी आज़ादी का जश्न मनाते हुए एक कृतज्ञ राष्ट्र, मातृभूमि के उन बेटे-बेटियों कोभी नमन करता है, जिन्हें हिंसा के उन्माद में अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी विभाजन मानव इतिहास में सबसे बड़े विस्थापनों में से एक है, जिससे लगभग 20 मिलियन लोग प्रभावित हुए। लाखों परिवारों को अपने पैतृक गांवों/कस्बों/शहरों को छोड़ना पड़ा और शरणार्थी के रूप में एक नया जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ा। भारत को 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश शासनसे आज़ादी मिली स्वतंत्रता दिवस, जो हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है, किसी भी राष्ट्र के लिए एक ख़ुशी और गर्व का अवसर होता है। हालाँकि स्वतंत्रता की मिठास के साथ-साथ देश को विभाजन का आघात भी सहना पड़ा। नए स्वतंत्र भारतीय राष्ट्र का जन्म विभाजन के हिंसक दर्द के साथ हुआ, जिसने लाखों भारतीयों पर पीड़ा के स्थायी निशान छोड़े। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हम पाएंगे कि 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस घोषित करके पीएम ने भेदभावज दुर्भावना, वैमनस्य खत्म करने की कोशिश की है और मानव सशक्तिकरण,सामाजिक सदभाव, एकता की भावना से मजबूत होगी तथा अपनी जड़ों से विस्थापित पीड़ितों के ज़जबे को सलाम करना होगा, जिन्होंने विभाजन में झेले गए दर्द और पीड़ा सही यह भी बलिदान से कम नहीं है। 

    -संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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