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    भारत में जैव इंधन एथेनॉल को बढ़ावा देने का रोडमैप तैयार - पेट्रोल के आयात में कमी, पेट्रोल का विकल्प और प्रदूषण पर नियंत्रण की सटीक रणनीति | #NayaSaberaNetwork

    भारत में जैव इंधन एथेनॉल को बढ़ावा देने का रोडमैप तैयार - पेट्रोल के आयात में कमी, पेट्रोल का विकल्प और प्रदूषण पर नियंत्रण की सटीक रणनीति   | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    एथेनॉल उपयोग से पेट्रोलियम पदार्थों के लिए विदेशी निर्भरता में कमी होगी - 1अप्रैल 2023 से योजना लागू होने का अनुमान - एड किशन भावनानी
    गोंदिया - भारत में पिछले कई दिनों से हम देख रहे हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है और कई राज्यों और शहरों में पेट्रोल 100 बार हो चुका है, यहां तक कि हमारी गोंदिया जैसी छोटी सिटी में भी पेट्रोल 102.45 रुपए प्रति लीटर है। साथियों, हालांकि इस आर्टिकल के माध्यम से हम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों, सेंट्रल जीएसटी, स्टेट जीएसटी, सेस, इत्यादी टैक्सों में नहीं जाना चाहेंगे, परंतु हम चर्चा करेंगे इस साल वैश्विक रूप से विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2021 को पूरे विश्व में मनाया गया। भारत में भी पीएम महोदय के सानिध्य में वर्चुअल समारोह के द्वारा मनाया गया जिसमें बेहतर पर्यावरण के लिए जैव ईंधन को बढ़ावा देने के विषय पर आधारित समारोह में, हमें बहुत जानकारी दी और हमें पता चला कि भारत में जैव इंधन एथेनॉल को बढ़ावा देने का रोडमैप तैयार है। जिससे पेट्रोल के आयात में कमी आएगी पेट्रोल का विकल्प तैयार होगा और भारत में प्रदूषण पर नियंत्रण की सटीक रणनीति भी तैयार है और भारतीय किसानों को भी बहुत बेहतर लाभ मिलेगा और गन्ने तथा अन्य वेस्ट चीजों से जैव ईंधन एथेनॉल से तैयार करने की योजना क्रियान्वयन करने के लिए, पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में कहा, केंद्र सरकार यह निर्देश देती है कि तेल कंपनियां सभी राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों में भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों के अनुरूप 20 प्रतिशत एथनॉल के सम्मिश्रण वाला पेट्रोल बेचेंगी। यह अधिसूचना एक अप्रैल2023 से प्रभाव में आएगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी मांग के 85 प्रतिशत हिस्से के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है।..बात अगर हम भारत में जैव इंधन एथेनॉल को बढ़ावा देने की करेंतो विश्व पर्यावरण दिवस पर पीएम ने, इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर 2025 तक का रोडमैप जारी किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में इथेनॉल ब्लेंडिंग भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और 2025 तक 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग वाला पेट्रोल बेचने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले ये लक्ष्य 2030 का था, जिसे घटाकर 2025 कर दिया गया है. इस मौके पर पीएम महोदय ने पुणे में तीन जगहों पर इथेनॉल के उत्पादन और वितरण से जुड़े E100 पायलट प्रोजेक्ट को भी लॉन्च किया। सरकार ने अगले दो साल में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने ये कदम इसलिए उठाया है ताकि देश को महंगे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सके। पहले सरकार ने 2025 तक इसे हासिल करने का लक्ष्य रखा था, जिसे अब और नजदीक करते हुए 2025 और संभावना नजर आ रही है कि यह 2023 तक हो जाना चाहिए। पिछले साल सरकार ने 2022 तक के लिए पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल मिलाने (10 प्रतिशत इथेनॉल को 90 प्रतिशत पेट्रोल के साथ मिलाना) का लक्ष्य रखा था, उसके बाद एथनॉल मिश्रण की मात्रा को 2030 तक बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा था। इस साल की शुरुआत में इसे 2030 के बजाय 2025 कर दिया। पीएम ने कहा कि 7-8 साल पहले भारत में एथेनॉल पर चर्चा दुर्लभ थी, लेकिन अब एथेनॉल भारत की 21वीं सदी की प्राथमिकताओं से जुड़ गया है। यह पर्यावरण के साथ-साथ किसानों के जीवन की भी मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमने 2025 तक पेट्रोल में 20 फीसद एथेनॉल ब्लेंडिंग को पूरा करने का संकल्प लिया है। 2014 तक औसतन सिर्फ 1-1.5 फीसदी एथेनॉल ब्लेंड किया जा रहा था और आज यह करीब 8.5 फीसदी पर पहुंच गया है।... साथियों मेरा यह मानना है कि साथ ही देश की सभी तेल कंपनियों के लिए 1 अप्रैल, 2023 से इस योजना को लागू करने के लिए गाइडलाइन भी जारी की जा सकती है। पीएम के अनुसार, क्लाइमेट चेंज की वजह से जो चुनौतियां सामने आ रही हैं, भारत उनके प्रति जागरूक भी है और सक्रियता से काम भी कर रहा है। 6-7 साल में रिन्यूएबल एनर्जी की हमारी कैपेसिटी में 250 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इंस्टॉल्ड रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी के मामले में भारत आज दुनिया के टॉप-5 देशों में है। इसमें भी सौर ऊर्जा की कैपेसिटी को बीते 6 साल में लगभग 15 गुना बढ़ाया है...। बात अगर हम भारत में प्रदूषण कम करने की करें तो,गौरतलब है कि एथेनॉल एक इको -फ्रेंडली फ्यूल है, जिसे पेट्रोल में मिलाया जाता है। एथेनॉल को गन्ने से तैयार किया जाता है। इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने से प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है वहीं जहरीली गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है। कोरोना महामारी के कारण हर जगह परेशानी हो रही हैं। साथियों,, मेरा मानना है कि इसके मुख्य कारण में जाएं तो हम पाएंगे कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने का ही ये नतीजा है। आज पेड़ और सांस कम हो रही है। चारों तरफ ऑक्सीजन की मांग इतनी बढ़ गई थीं कि सिलेंडर के लिए लोग लाइनों में लगे थे। परंतु इस पेट्रोल के विकल्प के रूप में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने से प्रदूषण में भी भारी कमी आने की संभावना है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का विश्लेषण करें तो भारत में जैव इंधन एथेनॉल को बढ़ावा देने का रोडमैप तैयार है, और पेट्रोल के आयात में कमी होगी क्योंकि पेट्रोल का विकल्प हो जाएगा और प्रदूषण पर नियंत्रण की सटीक रणनीति तैयार है। एथेनॉल के उपयोग से पेट्रोलियम पदार्थों के लिए विदेशी निर्भरता में कमी होगी और उम्मीद है 1 अप्रैल 2023 से योजना लागू होगी। जो एक अच्छी रणनीति का सूचक है।
    -संकलनकर्ता लेखक कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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