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    सहमी जिन्दगी को ठहाकों की दोलत्ती रसीद करो यार | #NayaSaberaNetwork

    सहमी जिन्दगी को ठहाकों की दोलत्ती रसीद करो यार  | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    कुमार सौवीर
    नन्हा इंटरव्यू, जिसमें जिन्दगी को मौत ने जिन्दादिली समझा दिया। जब तुममें जिंदगी से ऊर्जा लेने-देने की क्षमता नहीं, तब मैं ही रास्ता हूँ। दौलत, अनाज, अनुभूतियां, संवेदना और खुशियां मिल-बांट कर जिन्दगी महसूस करें। उपभोक्तावाद, मोक्षवाद, निर्वाणवाद के बजाय खुद बुद्ध बन मुक्ति की डगर थामो, मुक्त हो जाओ।
    लखनऊ। कोरोना से कराहती, चिल्लाती, बौखलायी जिंदगी ने चिल्लाते हुए मौत से पूछा- तुम हजार बहाने करके हमको अपने पास क्यों बुला ले जाती हो?
    बर्फ की मानिंद मौत की सर्द आवाज गूंजी- जब तुममें जिंदगी की ऊर्जा लेने और किसी को ऊर्जा देने की औकात नहीं बचती है, तब मैं ही तो इकलौता रास्ता बचती हूँ।
    मौत की इस दोलत्ती ने कोरोना से चारों खाने चित्त जिन्दगी को जिन्दगी का असल अर्थ समझा दिया। इस दोलत्ती से जिन्दगी पहले तो कराह पड़ी लेकिन फिर उस जिन्दगी ने जिन्दगी के मर्म को गले से लगा लिया। हा! हा! हा!
    जाहिर है कि अधिकांश लोगों के लिए कोरोना मौत का ही पर्याय है, इसीलिए लोग कोरोना का सुनते ही सहम जाते हैं, अवसाद में जाना शुरू कर देते हैं लेकिन हम लोग मौत का खतरा होने के बावजूद धूम्रपान और मद्यपान का व्यसन पाले हैं। धूम्रपान कितना खतरनाक है, इस सच को देखने के लिए आप किसी भी मेडिकल कालेज के सर्जरी विभाग के वार्ड में घूम आइये। कैंसर के वार्ड में तो अधिकांश मरीज धूम्रपान के चलते जिन्दगी और मौत के बीच झूलते दिखायी पड़ते हैं लेकिन ऐसे भी लोगों की तादात कम नहीं है जो मौत की दहलीज तक पहुंचकर भी जिन्दगी की गोद में वापस लौटे। वजह है उनमें जिजीविषा, मस्ती, और जूझने का माद्दा।
    मसलन लखनऊ के पत्रकार संजोग वाल्टर और शाहगंज के पत्रकार रविशंकर वर्मा। इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने बहुत खोया भी है लेकिन जितना भी उनके पास बचा है, वे न केवल उसे ही अपनी अकूत संपदा मानते हैं, बल्कि उनकी कोशिश यही रहती है कि वे बाकी लोगों को जिन्दगी से महरूम होने से रोकें और उनकी यह कोशिश का पहला फलसफा है कि खुद भी खुश रहो और दूसरों को भी खुश रहने की कोशिश करो, उनको खुश रहने में मदद करो।
    तो दोस्तों! कोरोना से डरने बजाय, उसे समझने, दूसरों को समझाने और लोगों की डरी, दुबकी और सहमी हुई जिन्दगी को मस्त और बिन्दास जिन्दगी में तब्दील करने की कोशिश कीजिए। अपनी ही नहीं, अपने आस-पास भी रहने वाली जिंदगियों को ऊर्जा से परिपूर्ण करने की कोशिश कीजिये। मस्त रहिये और दूसरों को भी ऊर्जा से सराबोर करने में कोताही मत कीजिये।
    दूरी बनाना तो कोरोना से सुरक्षित बचने का एक तरीका भर है लेकिन मिल-बांटकर खाना-पीना और जिंदगी को खुशहाल ठहाके लगाना तो टैक्स-फ्री ही तो होता है। हां, इतना जरूर समझ लीजिए कि अकूत धन-दौलत और बेहिसाब भरा डेहरियों में जमा अनाज और टोकरियों भर की खुशियां अपने साथ लेकर कोई भी ऊपर नहीं जाता। जो भी इस धरती, प्रकृति और प्राणियों ने आपको दिया है, उसे ऊपर ले जाने का लोभ संवरण मत कीजिये। चाहे दौलत हो, अनाज हो, अनुभूतियां हों, संवेदना हों या फिर खुशियां, सब कुछ आपस में बांटकर जिन्दगी को महसूस करने की कोशिश कीजिए। यकीन मानिये कि इस प्रक्रिया में आप अपने आपको सबसे मजबूत और बलिष्ठ ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से परिपूर्ण और सम्पन्न बन जाएंगे। इतने कि मुकेश अम्घ्बानी और गौतम अडाणी भी आपके सामने पानी भरते दिखेंगे। वजह यह कि आपके पास सम्पूर्णता में सम्पन्नता होगी जबकि अम्बानी और अडाणी के पास केवल धन ही है। निहायत एकांगी। सोचिये कि कोरोना में आपके आस-पास के लोगों ने ही आपकी मदद की है जबकि अम्बानी-अडाणी और उनके गॉड फादरों ने केवल अपनी तिजोरी को विशालकाय बनाया है।
    समझने की कोशिश कीजिए कि पश्चिम देशों का उपभोक्तावाद आपको अति और जीत-हार के बीच सिर्फ जीतने की होड़ दिलाता है जिसमें असफलता केवल मृत्यु का मार्ग दिखाती है। भारतीय दर्शन का मोक्षवाद अधिकांश लोगों को समझ में ही नहीं आता है। यही हालत बुद्ध के निर्वाणवाद की है जिसमें भिक्खु-जन हमेशा बुद्ध की राह पर ही परिक्रमा करते हैं। नये बुद्ध को या खुद बुद्ध बनने की कोशिश तक नहीं करते तो फिर मेरा अनुरोध है कि पुरानी परम्पराओं से अलग हटकर आप मुक्ति की डगर पकड़ लीजिए। छोड़िये भी लिप्सा, लालच, घृणा, क्रोध, अनावश्यक संचय, लज्जा, अहंकार, अहमन्यता और दर्प वगैरह-वगैरह।
    तो सहज बनिये, खुश रहिये और दूसरों को भी खुश रखने और सहज बनाये रखने का भरसक प्रयास कीजिये, वरना आपके पड़ोस में हुई किसी की मौत आपमें अवसाद पैदा करेगी। उस पाप का भागीदार मत बनिये। पाप को दोलत्घ्ती मारिये। व्यष्टि में ही नहीं, समष्टि में भी खुश रहिए, मस्त रहिये। हा, हा, हा, दे ताली।
    (लेखक उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

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