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    सरकार से चुनाव में कोरोना से गयी जान के बदले जान की मांग : डॉ० जेपी सिंह | #NayaSaberaNetwork

    फैज अंसारी
    धर्मापुर, जौनपुर। उत्तर प्रदेश के ब्यूरोक्रेसी में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को या तो गिनती नहीं आती या फिर संवेदनशीलता मर चुकी है । सारी मीडिया चिल्ला चिल्ला कर कह रही है कि पंचायती चुनाव में कोरोना संक्रमण से मरने वाले बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा व उच्च शिक्षा में कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों की संख्या लगभग 1630 हो चुकी है और कई अभी भी मौत से जूझ रहे हैं। परन्तु निर्वाचन अधिकारी व उच्च पदों पर बैठे कार्यपालक अधिकारी कोरोना से मृतकों की संख्या केवल 3 बता रहें हैं। काश! यही सच हो जाता और सभी मृतकों को सरकार जिंदा वापसी कर देती। हमें हमारे प्रिय जान मिल जाते नही चाहिए हमे अनुग्रह राशि मृतकाश्रित नोकरी चाहिए। मंत्री और विधायक अपनी जान बचाने में होम कोरोटिन हैं।


    उच्च अधिकारी मुख्यमंत्री को बहका रहें है अथवा गलत सलाह देकर महामारी से ठोस बचाव हेतु रणनीतिक कवच नही तैयार कर पा रहें हैं। चुनाव को भले 6 माह टाल देते या फिर कराना ही था तो चुनाव ड्यूटी को सम्पन्न कराने वालों को कोरोना वारियर्स घोषित करके, 10 दिन पूर्व तक डबल डोज वैक्सीन अनिवार्य रूप से लगवाते। 50 --50 लाख का जीवन बीमा, मृतकाश्रित नोकरी आदि की गारंटी की घोषणा करनी चाहिए थी। परंतु बहुत बड़ी चूक हुई है। जिससे बीमारों व गर्भवती कर्मचारियों की भी ड्यूटी संवेदनहीन अधिकारियों ने नही काटा, जिससे उन्हें अपने प्राण चुनाव के बाद ही गवाने पड़े और कोई भी स्पेशल सुरक्षा व इलाज नही हुआ। हमारे लोगों को जिंदा वापस तो ला नही सकती है सरकार। अतः सरकार से हमारी मांग है कि उक्त प्रकरण की तत्काल सुचनाओं को सज्ञान में लेते हुए मृतकाश्रित की नियुक्ति, आर्थिक सहायता और पारिवारिक पेंशन आदि अविलम्ब प्रदान करे।

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