• Breaking News

    " कला में मेरी अभिव्यक्ति हमेशा अमूर्त रूप में आती है..." - चित्रकार विजय मा ढोरे | #NayaSaberaNetwork

    नया सबेरा नेटवर्क
    हमेशा से कलाकारों ने विभिन्न तरीकों से परिदृश्य चित्रों की कल्पना की क्योंकि प्रकृति ही वह स्रोत है जहाँ से समस्त साधन प्राप्त होते हैं।चित्रकला में एक विषय वस्तु के रूप में लैंडस्केप पेंटिंग (प्रकृति चित्रण) प्राकृतिक दृश्यों का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें पहाड़, आकाश, जंगल, नदी, खेत और इन सभी प्राकृतिक रूपों का संयोजन शामिल है। इन प्राकृतिक रूपों के साथ जुड़ाव के माध्यम से कलाकार का इरादा या तो नकल करना है या दृश्य की नकल करना है जैसा कि उनके द्वारा माना जाता है कि यह लगभग फोटोग्राफिक दिखाई देता है। जबकि कुछ कलाकार ऐसे भी थे जिनकी रूचि प्रकाश, रंग और बनावट के रूप में विभिन्न सौंदर्य तत्वों के अध्ययन और अन्वेषण में केंद्रित थी। प्रकृति के भौतिक पहलुओं का प्रतिनिधित्व करने में आगे बढ़ते हुए, कुछ कलाकार प्रकृति को एक रूपक रूप में संलग्न करते हैं और एक आदर्श उदाहरण भारतीय लघुचित्र होंगे, जहाँ प्रकृति के आकर्षण प्रेम और अलगाव में इसके नायक के मन और दिल के विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह विचार आज लखनऊ में एक प्रदर्शनी उद्घाटन के अवसर पर दृश्य रूप में दिखलाई पड़ी।   
    " कला में मेरी अभिव्यक्ति हमेशा अमूर्त रूप में आती है..." - चित्रकार विजय मा ढोरे  | #NayaSaberaNetwork





    लखनऊ स्थित सराका आर्ट गैलरी होटल लेबुआ में वंदना सहगल के संयोजन में हैदराबाद के चित्रकार विजय मा ढोरे  के लगभग 15 चित्रों की एक प्रदर्शनी शनिवार को लगाई गई।  इस प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कलाकार , कला समीक्षक एवं कला इतिहासकार श्री अखिलेश निगम ने किया। इस अवसर पर कला समीक्षक श्री अखिलेश निगम ने विजय मा ढोरे की कला पर अपने टिप्पणी में कहा कि कला का अपना एक अद्भुत संसार है - जहां कला का उत्स, उसके सृजन से आच्छादित है. कलाकार के अवलोकन, गुनने और रूपांकन द्वारा नये-नये मुहावरे गढ़ना...आकृतिमूलकता से अमूर्तन तक का सफर - शब्द- नि:शब्द है। विजय मा ढोरे  के सैरा चित्रों को अमूर्तन की संज्ञा दी गयी है! पर मेरा मानना है कि अमूर्तन की स्थिति 'मूर्त' को आत्मसात करने के पश्चात् ही आती ह। आकार सरल होते सूक्ष्म होते जाते हैं -  एक स्वप्निल लोक की तरह. पर क्या वे वास्तव में सूक्ष्म हो जाते हैं या फिर ये  दृष्टि-भ्रम मात्र है? जैसे ज़मीं- आस्मां मिलते दीखते तो हैं पर वास्तव में ऐसा होता नहीं है! सच तो यह है कि एक कठिन साधना के बाद  ही अमूर्तन की मंज़िल आती है। विजय ढोरे  के सैरे घनत्वपूर्ण बस्तियों को दर्शाते हैं - शहरीकरण का गठन लिए. उनकी रंग- योजना धूसर से चटक रंगों की ओर जाती है. हाईलाइट्स लिए वास्तुकारिता के प्रगटन सहित





    श्री निगम ने आगे कहा कि  प्रदर्शनी संयोजिका वंदना सहगल को साधुवाद कि इस शहर में वे  विभिन्न आयोजनों द्वारा कला की अलख जलाये रखती हैं. एक वातावरण पनपता है सन्नाटे को तोड़ता.
      साथ ही इस मौके पर क्यूरेटर वंदना सहगल ने आये हुए मुख्य अतिथि , कलाकारों एवं कलाप्रेमियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए  बताया की कलाकार विजय मा ढोरे  का काम 'सीमाओं के परे अमूर्त शैली' के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। जो पूरी तरह से अमूर्त हैं… वे बनावट, रंग और भावनाओं का विस्तार है।  परिदृश्य के प्रभाववादी पहलू ने दर्शकों और कलाकारों को कभी नहीं छोड़ा हमेशा प्रभावित किया है। लेकिन इसके साथ ही गति की परतों से यह आच्छादित हो जाता है। समानांतर अर्थ और भावनाएं जो आंखों को कैनवास एक आत्मिक प्रसन्नता प्रदान करता है। धोरे के कैनवास पर एक नया आयाम है जो पहली नजर में शहरी जीवन पर रूमानी लगाव है, किंतु जैसे-जैसे इसमें गहरी पैठ जाती है, शहरी मूल-रूपकों का एक-दूसरे के प्रति काफी विस्तार दिखाई देता है और इंद्रियों पर भी एक प्रभाव होता जाता है। ऐसा लगता है कि यादों, रूपांकनों, छापें, अंधेरे गलियों, खिड़कियां, दरवाजे…ये सभी परतें लय के साथ लय में तैरती नज़र आती हैं। उनके अपने शब्दों में… "कला में मेरी अभिव्यक्ति हमेशा अमूर्त रूप में आती है, क्योंकि मैं आकृति, रूप और रेखा की दृष्टि से उस रचना को बनाने में प्रयोग करता हूँ"… इन रचनाओं में जीवन का श्वास होता है जो जीवन का सार तत्त्व भी है।

    " कला में मेरी अभिव्यक्ति हमेशा अमूर्त रूप में आती है..." - चित्रकार विजय मा ढोरे  | #NayaSaberaNetwork





    चित्रकार विजय मा ढोरे  का जन्म 6 जनवरी 1971 को हैदराबाद में हुआ। कला में स्नातक 1997 में नागपुर विश्वविद्यालय से और स्नातकोत्तर 1999 में हमीदिया आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज भोपाल विश्वविद्यालय से पूर्ण किया। साथ ही कला के क्षेत्र में अनेकों सम्मान से भी नवाज़े गए हैं। और कई राष्ट्रिय अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनीयो में भी भागीदारी कि है। इन्होने शुरुआत के दिनों से फिगरेटिव से वर्तमान समय में अमूर्तन तक एक लम्बा सफर तय किया जो आज उनकी मौलिकता और उनकी विकसित शैली को हम देख पा रहे हैं। ड्ढोर ने अपने काम में बहुत प्रयोग किया है।  इन्होने निसर्ग से प्रभावित होते रहे साथ ही भारत कि अनेको राजस्थानी , हम्पी , मुग़ल आर्किटेचर शैली से भी प्रभावित हुए।  जिसका प्रयोग उनके चित्रों में देखने को मिलता है।  इनकी रेखाएं जो कि सदा के लिए अमरता के रूप में प्रदर्शित हैं।  जो युगों से सुंदरता को प्रमाणित करती हैं। इनकी शैली और बनावट प्राचीन वास्तुकला से प्रभावित होने के साथ समकालीन परिदृश्य पर एक हस्तक्षेप करती हैं।  यह कहना अतिसंयोक्ति नहीं होगी कि यह " ओल्ड इज गोल्ड "।  इस अवसर पर भूपेंद्र कुमार अस्थाना, धीरज यादव, रवि अग्रहरि, गिरीश चन्द्र, रत्नप्रिया कांत, पूनम , सुनीता, अश्वनी प्रजापति, रंजू कुमारी, जूलिया, हरि सीता विश्वकर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।
    ज्ञातव्य हो कि यह कला प्रदर्शनी दिनांक 10 मई 2021 तक कलाप्रेमियों के अवलोकन के लिए लगी रहेगी कृपया कोविद 19 को ध्यान में रखते हुए इस खास प्रदर्शनी का अवश्य अवलोकन करें
    - वंदना सहगल 
        क्यूरेटर

    *Advt : DALIMSS Sunbeam | ENGLISH MEDIUM CO-EDUCATIONAL SENIOR SECONDARY SCHOOL - HAMAM DARWAZA, JAUNPUR http://dalimssjaunpur.com | ADMISSIONS OPEN - SESSION 2021-22 | FROM CLASS PLAY GROUP TO CLASS IX & XI | (Science & Commerce)| ON COMPLETION OF OUR 10th YEAR SPECIAL OFFER FOR PARENTS | One month tuition fees free | Two months transport facility free | Special Discount in March-2022 Fees Teachers team will meet you at your door steps. Special Kids Lab first time in Jaunpur. For Admission you can also Register your child Online at our website. Admission Form available at the School Office on all working Days between 08:30 a. m. to 3:00 p. m. | CLASSES START From 5th APRIL, 2021 | Contact: 9235443353, 8787227589, E-mail: dalimssjaunpur@gmail.com, Website: http://dalimssjaunpur.com*
    Ad


    *Ad : प्राथमिक शिक्षक संघ डोभी के अध्यक्ष आलोक सिंह रघुवंशी की तरफ से रंगों के पर्व होली और चैत्र नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ*
    Ad


    *ADMISSION OPEN : KAMLA NEHRU ENGLISH SCHOOL | PLAY GROUP TO CLASS 8TH Karmahi ( Near Sevainala Bazar) Jaunpur | कमला नेहरू इंटर कॉलेज | प्रथम शाखा अकबरपुर-आदम (निकट शीतला चौकियां धाम) जौनपुर | द्वितीय शाखा कादीपुर-कोहड़ा (निकट जमीन पकड़ी) जौनपुर  | तृतीय शाखा- करमहीं (निकट सेवईनाला बाजार) जौनपुर | Call us : 77558 17891, 9453725649, 8853746551, 9415896695*
    Ad

    No comments