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    चिकित्सीय ऑक्सीजन का औद्योगिक उपयोग तुरंत स्थगित हो - नागरिकों का जीवन बचाने ऑक्सीजन की अत्यंत तात्कालिक आवश्यकता | #NayaSaberaNetwork

    चिकित्सीय ऑक्सीजन का औद्योगिक उपयोग तुरंत स्थगित हो - नागरिकों का जीवन बचाने ऑक्सीजन की अत्यंत तात्कालिक आवश्यकता   | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    केंद्र सरकार को उद्योगों के ऑक्सीजन स्टॉक आपूर्ति को चिकित्सीय ऑक्सीजन में बदलना जरूरी - एड किशन भावनानी
    गोंदिया - वैश्विक रूपसे कोरोना महामारी 2021 का आघात बड़ी तेजी से और बहुत ही घातक हुआ है। हालांकि 2020 की अपेक्षा 2021 में इसका इंफ्रास्ट्रक्चर और पिछले वर्ष का अनुभव काफी बड़ा हैं और साथ ही साथ कोरोना मारक वैक्सीन भी कुछ देशोंने कई परीक्षणों और प्रक्रियाओंं के बाद खोज कर उपलब्ध कराईहै और टीकाकरण युद्ध स्तर पर जारी है फिरभी यह महामारी अपना उग्र रूप धारण किए हुए हैं।...बात अगर हम भारत की करें तो यहां विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है और 12 करोड़ से अधिक लोगों को टीका लगाया जा चुका है और तीसरे चरण का टीकाकरण 1 मई 2021 से 18 वर्ष के ऊपर वाले सभी नागरिकों को लगाना चालू होंगा, उसके बाद कुल 90 करोड़ नागरिक इस टीकाकरण को लगाने की योग्यता में आ जाएंगे। परंतु वर्तमान परिस्थिति में महामारी ने भारतपर तीव्रतासे आघात कियाहै और उपलब्ध संसाधन कम पड़ रहे हैं।... बात अगर हम ऑक्सीजन की करें तो पिछले कुछ दिनों से कई राज्य ऑक्सीजन की कमी की शिकायत केंद्र सरकार से कर रहे हैं और 20 अप्रैल 2021 के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री महोदय ने भी ऑक्सीजन की आपूर्ति और उसका उत्पादन तीव्रता से बढ़ाने की बात कही थी। मेरा मानना है कि इस पर अगर विशेष ध्यान नहीं दिया गया तो  अनेक प्रतिष्ठित अस्पतालों और राज्यों को ऑक्सीजन की आपूर्ति कुछ हद तक बाधित हो सकती है।..... बात अगर हम ऑक्सीजनऔर उसके औद्योगिक उपयोग की करें तो हालांकि सरकार ने उनकी आपूर्ति को रोका भी है,पर उसके उपयोग पर तुरंत रोक लगाने का आदेश जारी करना चाहिए और बचा हुआ स्टॉक वापस चिकित्सीय प्रयोग के लिए अधिग्रहण कर लेना चाहिए। हालांकि अभी की स्थिति को देखते हुए अंबानी और टाटा ग्रुप की तरह सभी औद्योगिक घरानों को आगे आकर ऑक्सीजन की आपूर्ति में सहयोग करने की जरूरत है और अपने हिस्से की ऑक्सीजन या अपना स्टॉक को चिकित्सीय प्रयोग के लिए उपलब्ध करवाना चाहिए। उद्यगपतियों को आगे आकर इसका स्वतः संज्ञान लेकर अपने हिस्से की ऑक्सीजन या अपना स्टॉक को चिकित्सीय प्रयोग के लिए उपलब्ध करवाना चाहिए। यह कार्य मानवीय जीवन बचाने के लिए करना अत्यंत जरूरी है। कुछ टीवी चैनलों द्वाराऑक्सीजन की कमी की ग्राउंड रिपोर्टिंग दिखाई जा रही है और केंद्र सरकार भी इस पर पूरी नजर बनाए हुए हैं इसका उदाहरण हम बुधवार दिनांक 21 अप्रैल 2021 को देख सकते हैं जहां केंद्र सरकार ने दिल्ली, एमपी, महाराष्ट्र उत्तराखंड सहित सात राज्यों को ऑक्सीजन का कोटा बढ़ा दिया है। दिल्ली का कोटा 378 मेट्रिक टन प्रति दिवस से बढ़ाकर 480 मेट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है।हालांकि दिल्ली में ऑक्सीजन की अभी कुल मांग 700 मेट्रिक टन प्रतिदिन है। एक दिन पहले ही दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी है,जो 4-6 घंटे ही चलेगी। फिर केंद्र सरकार, उप राज्यपाल और मुख्यमंत्री के तालमेल से तुरंत ऑक्सीजन का कोटा बढ़ाकर दिया गया जिसके लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर इसका धन्यवाद भी केंद्र सरकार को किया। ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा अभी अदालतों की दहलीज तक जा पहुंचा है जहां माननीय दिल्ली हाईकोर्ट में दिनांक 21 अप्रैल 2021 के को रात्रि 8 बजे अर्जेंट सुनवाई में बेंच ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि मानवीय जान खतरे में है और औद्योगिक आपूर्ति को रोका जाना चाहिए। फैक्ट्रियां ऑक्सीजन का इंतजार कर सकती है,मरीज नहीं उल्लेखनीय है कि एक अस्पताल ने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी इस पर अर्जेंट सुनवाई हुई।..उधर मीडिया के अनुसार हरियाणा के एक मंत्री द्वारा दिल्ली प्रशासन पर उनके ऑक्सीजन के टैंकर रोकने का आरोप लगाया, तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर बताया कि उनके टैंकर यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात में रोके गए हैं दिल्ली के उपमुख्यमंत्री नें बयान में कहा कि उनके ऑक्सीजन टैंकर हरियाणा में रोके गए हैं। याने ऑक्सीजन टैंकरों परभी राज्य सरकारें आपस में भिड़ गई है। हालांकि बता दें कि ऑक्सीजन का निर्माण किसी भी राज्य में हो रहा हो परंतु उस पर कोटा फिक्स करने का अधिकार केंद्र सरकार का होता है, किस राज्य में ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है इससे किसी को मतलब नहीं है उस राज्य को अपना कोटा  देकर बाकी अन्य राज्यों या स्थानों पर भेज दिया जाता है..उधर बुधवार दिनांक 21 अप्रैल 2021 को महाराष्ट्र के नासिक में एक अस्पताल में टैंकर से ऑक्सीजन लिकेज होने पर अस्पताल में भर्ती मरीजों की ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम बाधित होने  के कारण 24 मरीजों की मृत्यु हुई और इस संबंध में आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गयाहै। अतः अब ऑक्सीजन स्टोर, मेंटेनेंस और और सुरक्षा के लिए सुरक्षा कर्मचारियों की नियुक्ति करना जरूरी हो गया है क्योंकि एक टीवी चैनलने दिखाया के मध्य प्रदेश के दमोह में हॉस्पिटल में जब ऑक्सीजन सिलेंडरों से भरी गाड़ी आई तो मरीजों के परिजनों ने आक्सीजन सिलेंडरों को लूटना शुरू कर दिया हर कोई दो तीन सिलेंडर ले जा रहे थे, तो कोई अपने करीबी रिश्तेदारों के बेड के पास लगा रहे थे कोई अपने घर ले जा रहे थे, और कलेक्टर साहब ने बयान दिया कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा प्रकरण एक टीवी चैनल पर दिखाया गया। अगर हम उपरोक्त पूरी बातों का विश्लेषण करें तो हम देखेंगे कि यह पूरा मामला ऑक्सीजन की कमी को लेकर हो रहा है जिसे पूर्ति करने का एक बहुत बड़ा साधन उद्योगों के पास पढ़े ऑक्सीजन के स्टॉक यदि उपलब्ध हैं तो, को अधिग्रहण करके उसका उपयोग चिकित्सीय ऑक्सीजन के रूप में किया जा सकताहै या उद्योगोंके ऑक्सीजन के उपयोग पर रोक लगाकर किया जा सकता है क्योंकि आज मानवजीवन की जान बचाना अत्यंत तात्कालिक आवश्यकता है जो करना जरूरी है।
    -संकलनकर्ता लेखक-कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावना ने गोंदिया महाराष्ट्र

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