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    अस्पतालों में आग आखिर कब तक - राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा एक्शन बोर्ड बनाया जाए | #NayaSaberaNetwork

    अस्पतालों में आग आखिर कब तक - राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा एक्शन बोर्ड बनाया जाए   | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    अस्पतालों और जंगलों में आग पर अत्यंत तात्कालिक राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाना जरूरी - एड किशन भावनानी
    गोंदिया - वैश्विक स्तर पर आज कोरोना की इस नई लहर के साथ जंग लड़ी जा रही है। हर देश अपने अपने नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा चाक-चौबंद कर कोरोना रूपी दुश्मन के साथ पूरे स्वास्थ्य इन्फ्राट्रक्चर के साथ युद्ध करने भिड़ गया है।....बात अगर हम भारत की करें,तो यहां भी कोरोना से लड़ाई में शासन, प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है और जवाबदार अधिकारी, नेता, शासन, प्रशासन, दिन-रात इस लड़ाई में शामिल हैं। कोरोना वॉरियर्स ने पूरी ताकत लगा दी है और जनताभी शासन की नीतियों का पालन कर जन योगदान कर रही है, परंतु भारत में पिछले साल से कोरोना की लड़ाई केसाथ-साथ अस्पतालों में आग की भी घटनाएं बहुत बढ़ गई है। यह घटनाएं एक राज्य में नहीं बलकि अनेक राज्यों में हो रही है और सरकारी ही नहीं निजी अस्पतालों में भी आग की घटनाएं बढ़ी है जो एक चिंता का विषय बना हुआ है। पिछले दिनों दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल की चौथी मंजिल पर आग, अहमदाबाद के कोविड अस्पताल में आग, भंडारा महाराष्ट्र के सरकारी अस्पताल में आग, रायपुर हॉस्पिटल में आग, मुंबई के एक कोविड अस्पताल में आग, नासिक अस्पताल में चिकित्सीय ऑक्सीजन लीकेज और अब दिनांक 23 अप्रैल 2021 को विरार के कोविड अस्पताल में आग इत्यादि अनेक राज्यों में आग की अनेक घटनाएं हुई है। अगर हम इनकी लिस्ट बनाएंगे तो बहुत लंबी चौड़ी होगी और इन घटनाओं में मृत मरीजों की भी लंबी चौड़ी लिस्ट होगी। साथियों, प्रश्न यह है कि आखिर कैसे हो रहा है यह सभ? आज का भारत पहले वाला भारत नहीं है। आज भारत तेजी से तकनीकी क्षेत्र में विकास कर रहा है और अनेक तकनीकी माध्यमों से लेंस भारत में इस प्रकार की घटनाएं एक अत्यंत गंभीरता से सोचने का विषय है, कि आखिर इतनी बड़ी और हाई सिक्योरिटी वाले अस्पतालों के आईसीयू और अन्य भागों में आग को बुझाने या सुरक्षा करने संबंधी अनेक यंत्र लगे रहते हैं, और अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही किसी भी प्रतिष्ठान, अस्पताल, सिनेमाघर या बड़े बड़े मॉल और बिल्डिंग्स इत्यादि को एनओसी मिलती है। फिर इस तरह की घटनाएं होकर सैकड़ों लोगों लोग इसकी चपेट में आकर अपना जीवन गवा देते हैं, ऐसा क्यों? क्यों नहीं एक निश्चित अवधि के भीतर ऐसी सेंसेटिव जगहों का फायर ऑडिट किया जाता? क्यों अग्नि दमकल विभाग या जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते? क्यों बारबार इस तरह की घटनाएं पूरे देश में रिपीट होती है? यह एक गंभीर सोचनीय विषय है। एक बार फिर महाराष्ट्र में विरार के कोविड अस्पताल में आग से मरीजों की जान चली गई है। जिसमें कई सीनियर सिटीजन और महिलाएं भी शामिल थी और माननीय पीएम, सीएम महोदयने मुआवजे का ऐलान किया है और मुख्यमंत्री द्वारा इसकी जांच क्राइमब्रांच विभाग को सौंप दी है। हमें याद होगा बहुत साल पहले दिल्ली के एक उपहार सिनेमा गृह में आग लगी थी और अनेक संख्या में लोगों की जान चली गई थी और मामला अदालतों की दहलीज पर चला गया था और न्याय पाने में मृतकों के परिवार वालों को सालों लग गए, हालांकि इसमें किसी का दोष नहीं है क्योंकि न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन तो करना ही होगा। ठीक उसी प्रकार हम आज देश के अनेक जंगलों में भी आग लगने के की अनेक घटनाएं देखते और सुनते आ रहे हैं। हाल ही में उत्तराखंड राज्य में भी जंगलों में तीव्र आग लगी हुई है और पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि जंगलों में आग का पता लगाने में और उस पर नियंत्रण करने में हो सकता है कि शासन प्रशासन को कुछ कठिनाई महसूस होती हो, परंतु अस्पतालों, सिनेमाघरों, मॉल, बड़ी बड़ी बिल्डिंग, में आग पर उसका फायर ऑडिट कर जवाबदार का पता आसानी से लगाया जा सकता है, और यदि हर राज्य, नगर व एरिया का अग्निशमन  विभाग चुस्त दुरुस्त हो और मासिक, त्रैमासिक, छह मासिक या सुविधा अनुसार अन्य किसी तरीके से हर ऐसे स्थलों का फायर ऑडिट, निरीक्षण होतो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। हालांकि हम अस्पतालों, सिनेमाघरों में आग विरोधी संसाधनों को लगे हुए देखते हैं, परंतु वह कितने कारगर हैं, उपयोगी है या चालू स्थिति में है यह किसी को मालूम नहीं होता। हो सकता है कहीं अग्नि सुरक्षा संसाधन लगे भी ना हो या अग्नि सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन नहीं किया गया हो, अगर इन सब व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण निश्चित अवधि के दौरान संबंधित विभाग करे तो व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त हो जाएगी और मेरा यह सुझाव है कि सारे देश में एक,,, राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा एक्शन बोर्ड, बनाया जाए जो हर राज्य के बड़े प्रतिष्ठानों,अस्पतालों सिनेमाघरों, बिल्डिंग्स, के अग्नि सुरक्षा मानकों पर निगरानी रखें और फायर ऑडिट कराएं एवं उनका औचक निरीक्षण कर संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों की जवाबदारी निश्चित कर उन पर कार्रवाई की जाए, तो स्थानीय अधिकारियों पर और अस्पतालों, सिनेमाघरों, बिल्डिंग्स, मॉल मालिकों में एक डर भी बना रहेगा और अग्निसुरक्षा मानकों की ओर सभ का विशेष ध्यान रहेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं नहीं होने का एक भरोसा कायम हो सकता है। अतः जब तक अस्पतालों, बिल्डिंग्स, सिनेमाघरों, माल में अग्नि सुरक्षा मानकों पर सख़्ती  के साथ कदम नहीं उठाया जाएगा तब तक ऐसी घटनाओं को रोक पाने में असमर्थता होगी और नागरिकों का जीवन यूं ही खतरो में रहेगा। अतः इस ओर अत्यंत तात्कालिक स्तरपर नीति बनाना अब जरूरी हो गया है।
    -संकलनकर्ता लेखक-कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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