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    माफ़िया का बदलता स्वरूप 8 | #NayaSaberaNetwork

    जौनपुर की झील में मोटबोट की जगह चलती हैं महंगे ब्रांड की लग्जरी कार।
    -झील में बने अवैध व्यावसायिक भवनों की अकूत कमाई से मजबूत है प्रशासनिक अर्थव्यवस्था।
    -इसी कमाई से ज़मीन के माफ़िया शहर के अन्य हिस्सों में भी लगाए रहते हैं गिद्ध नज़र।
    -शहर के वॉलीवुड फ़िल्म कलाकार राजेश विवेक को भी नोचने से बाज़ नहीं आए धरती के गिद्ध रूपी माफ़िया
    नया सबेरा नेटवर्क
    जौनपुर। छह दशक पूर्व प्रदेश में लागू हुई महा योजना को भू- माफ़िया कैसे पलीता लगाए हैं इसकी बानगी केवल जौनपुर को देखने से ही लग जाती है। इस शहर के विनियमित क्षेत्र में बने अवैध भवनों में कानूनी और गैर कानूनी धंधे बेधड़क चल रहे हैं। धंधेबाज जहां हर महंगे ब्रांड की लग्जरी कार झील में उतारकर मोटरबोट को मुंह चिढ़ा रहे हैं वहीं मौन सहमति देने वाले सरकारी कारिंदों की अर्थव्यवस्था को निरन्तर मजबूती प्रदान किए रहते हैं। गिद्ध की तरह झील को नोंचने वाले भू-माफिया शहर के विभिन्न हिस्सों में भी अपने खूनी ज़बड़े गड़ाते जा रहे हैं।कोई सत्ता तो कोई पैसों के बल पर यह धंधा जारी रखे हुए है।
    फ़िल्म लगान समेत सैकड़ों फिल्मों में बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों के चहेते रहे स्व. राजेश विवेक ( उपाध्याय) पांच साल पूर्व शरीर छोड़ने से पहले इसी शहर के जहांगीराबाद मोहल्ले में जार- जार कर रोए थे मीडिया के सामने अपना छोटा सा घर बचाने के लिए, तब कोई भी सम्भ्रांत आगे नहीं आया इस जिले की ज़िंदा धरोहर को बचाने के लिए। शायद मुख्तार अंसारी जैसे कथित माफ़िया के गुर्गों से टक्कर लेने की हिम्मत किसी के पास नहीं थी। मैं नहीं, यहां के मीडिया वालों को अपने घर के कागज़ दिखाकर इस फ़ानी दुनिया से राजेश विवेक रुख़सत हो गए। ये तो बानगी है, न जाने कितने लोग अपनी एक टुकड़ा ज़मीन व मकान बचाने को गिद्धों से जूझ रहे हैं। ज़ाहिर है प्रशासन से उमीद लगाना बेमानी है क्योंकि वह विनियमित क्षेत्र खुद नहीं बचा पा रहा। भाजपा से जुड़े कुछ ईमानदार लोगों को उम्मीद है कि कभी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नज़र इस ओर पड़ेगी, तब न माफ़िया के गुर्गे रहेंगे और न ही सत्ताधारी दल में पैठ बनाने वाले ऐसे लोग।,,,,,,,क्रमशः

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