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    एआईसीटीई विनियमों के अनुसार तकनीकी संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए पीएचडी अनिवार्य - सुप्रीम कोर्ट | #NayaSaberaNetwork

    एआईसीटीई विनियमों के अनुसार तकनीकी संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए पीएचडी अनिवार्य - सुप्रीम कोर्ट   | #NayaSaberaNetwork


    नया सबेरा नेटवर्क
    शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए शिक्षा प्रदान करने वालों की विशेषज्ञता जरूरी - एड किशन भावनानी
    गोंदिया - वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा है कि यहां बौद्धिक क्षमता कूट-कूट कर भरी हुई है क्योंकि यहां का शैक्षणिक इंफ्रस्ट्रक्चर याने शैक्षणिक बुनियादी ढांचा बहुत मजबूत है। कोविड-19 से सबक सीख कर हम स्वास्थ्य क्षेत्र में भी शैक्षणिक स्तर पर मजबूती कर रहे हैं। जिसकी घोषणा 2021-2022 के बजट में भी की गई है 35 हजार करोड़ का आवंटन स्वास्थ्य क्षेत्र पर किया गया है। भारत में अनेक देशों से छात्र यहां भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं निम्न,मध्यम, व उच्च स्तर की शिक्षा के लिए अलग-अलग नियम विनियमन और बोर्ड बने हुए हैं। उच्च शिक्षा के लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) बना हुआ है। यह एक कानून हैं, जो 1987 में संसद द्वारा बनाया गया था जो संपूर्ण देश में तकनीकी शिक्षासंस्थाओं को दिशानिर्देश देता है और उच्च तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के लिए नियम व विनियम निर्धारित कर, लागू कर इंप्लीमेंट करता हैं और भिन्न-भिन्न राज्य इसे अडॉप्ट करते हैं और अपने शिक्षा संस्थाओं में इसी के अनुसार नियुक्तियां करते हैं और राज्यों में भी अपने अपने स्तर पर नियम विनियम होते हैं, जिसका वे समय-समय पर संशोधन करते रहते हैं कि प्रिंसिपल, प्रोफेसर ,असिस्टेंट प्रोफेसर, की नियुक्ति के संबंध में एआईसीटीई के नियम के अनुसार राज्य के स्टाफ सिलेक्शन कमीशन, के द्वारा नियुक्ति की जाती है और यदि इसमें इससे संबंधित जुड़े किसी शिक्षाविद को कुछ असहमति है तो फिर मामला अदालतों की चौखट पर पहुंच जाता है।... ऐसा ही एक मामला बुधवार दिनांक 3 फरवरी 2021 को माननीय सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की एक बेंच जिसमें माननीय न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, माननीय न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी तथा माननीय माननीय न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की बेंच के समक्ष स्पेशल लीव पिटिशन सिविल 1917/2021 याचिकाकर्ता बनाम स्टेट ऑफ केरला आया। यह आईटम क्रमांक 6 कोर्ट क्रमांक 9 वीडियो कांफ्रेंसिंग में के रूप में आया, जो  केरला हाई कोर्ट एर्नाकुलम द्वारा आदेश दिनांक 3 दिसंबर 2020 केस क्रमांक 236/2020 से उदय हुआ था जिसमें माननीय हाई कोर्ट ने अपने 73 पृष्ठो में अपना आदेश सुनाया था और अपील खारिज़ की थी जिसे माननीय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसपर माननीय बेंच ने अपने 2 पृष्ठों के आदेश में कहा कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश से सहमत हैं और स्पेशल लीव पिटिशन खारिज कर दी। बेंच ने आगे कहा कि एआईसीटीई विनियमों के अनुसार 5.3.2010 के बाद सहायक प्रोफेसर के पद के लिए पीएचडी अनिवार्य है। बेंच ने केरल हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में असिस्टेंट प्रोफेसरों की ओर से दायर बारह याचिकाओं के एक बैच का निस्तार‌ित किया था। उन्हें आशंका थी कि पीएचडी डिग्री के अभाव में उन्हें पदावनत कर दिया जाएगा।एक दशक पुराने मुकदमे का समापन करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है,हम इस विचार से सहमत हैं कि एसोसिएट प्रोफेसर (जिसे बाद में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नामित किया गया) के पद के लिए पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के लिए सात वर्ष का समय देने वाली 18.02.2003 की अधिसूचना 2010 में समाप्त हो जाएगी और इस प्रकार वे व्यक्ति जो बाद की तारीख में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करते हैं, वे केवल उसी तिथि से विचार के पात्र होंगे जब उन्होंने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की हो।ज‌स्ट‌िस कौल की अध्यक्षता वाली पीठ 03-12-2020 को दिए गए फैसले को चुनौती दे रही थी, जिसके तहत हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा था कि केरल तकनीकी शिक्षा सेवा, 1967 (विशेष नियम) के विशेष नियमों के नियम 6A(ii) 5/3/2010 के बाद लागू नहीं है। 2003 में जोड़े गए उक्त नियम ने पीएचडी की डिग्री हासिल करने के लिए सात साल का समय दिया था। विशेष नियमों के नियम 6A (ii) के अनुसार,असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को पीएचडी डिग्री रखने से छूट दी गई है, लेकिन उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति पाने के सात साल के भीतर पीएचडी डिग्री हासिल करनी है, जैसा कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन द्वारा निर्धारित किया गया है।हाईकोर्ट में ज‌स्ट‌िस एएम शफीक़ और पी गोपीनाथ की खंडपीठ ने कहा,नियम 6A (i) और 6A (ii) का 5-3-2010 से आगे कोई आवेदन नहीं है, जिस तिथि पर एआईसीटीई ने वेतनमान, सेवा शर्तें और शिक्षक और अन्य शैक्षणिक स्टाफ के लिए योग्यताएं शैक्षणिक संस्थान डिग्री विनियम, 2010 जारी किया था। दूसरे शब्दों में, 5-03-2010 के बाद, प्रिंसिपल, प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर (बाद में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नामित पद) के पदों के लिए पीएचडी की योग्यता अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 309, केरल लोक सेवा अधिनियम, 1968 के साथ पढ़ें, प्रावधानों के तहत राज्य द्वारा निर्धारित केरल तकनीकी शिक्षा सेवा नियम योग्यता, नियुक्ति आदि के संबंध में एआईसीटीई के बनाए गए विनियमों के अधीन होगा और राज्य द्वारा बनाए गए नियम, केंद्रीय अधिनियम/विनियमों के प्रतिकूल होने की हद तक, शून्य और निष्क्रिय हैं। राज्य नियमों में किसी भी सक्षम नियम या विनियमन की अनुपस्थिति में भी एआईसीटीई विनियमों का पालन किया जाना चाहिए।
    संकलनकर्ता कर विशेषज्ञ एड किशन भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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