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    माफिया के बदलते स्वरूप : जौनपुर में हज़म कर गए झील, नाले का अस्तित्व भी खतरे में | #NayaSaberaNetwork

    कैलाश नाथ सिंह
    60 के दशक में बनी महायोजना लापता, मास्टर प्लान विभाग के पास भी जवाब नहीं।
    ---बानगी के तौर पर जौनपुर उदाहरण है। उत्तर प्रदेश को हाल के दशकों में कल्याण सिंह के बाद पहली बार कड़े फ़ैसले लेने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मिले हैं। ये जाति, परिवार, लोभ आदि से परे हैं। पार्टी लाइन पर चलना जरूरी और मज़बूरी दोनों है, लेकिन माफ़िया( विविध रूपों में) उनके हंटर से अपना गिरेबान बचाने में सफल हैं। यहां हम भू- माफिया और उनकी संपत्ति पर बात कर रहे वह भी समूचे प्रदेश की। बस बानगी जौनपुर है। 60 के दशक में शहरों, कस्बों के विकास के लिए महायोजना बनी। तमाम जिलों में जौनपुर भी शामिल रहा। इसके तहत जौनपुर में आज का क्रीम प्लेस वाजिदपुर टू जेसीज चौराहा। यहां 12 बीघा से अधिक ज़मीन झील के लिए और काफी गोमती पार लेकिन किनारे पर कूड़ा डंपिंग ग्राउंड, कुछ बस्तियों के निर्धारण भी थे।   सिविल कोर्ट बार के पूर्व मंत्री व सीनियर एडवोकेट का. जय प्रकाश सिंह कहते हैं खुद मास्टर प्लान ही लापता है। झील की तस्दीक वह महायोजना के साथ करते हैं। यानी माफ़िया की बाज़ नज़र झील पर पड़ी तो वह नाला और ऊँची अट्टालिकाओं में बदल गई। माफ़िया के भेष बदलने का यह पुख़्ता प्रमाण है। सरकारें बदलने से पूर्व माफ़िया उसमें अपनी पैठ बना लेते हैं। झील की फ़ाइल जब भी कोई डीएम खोलता है तब तब तहसील, लापता हो चुके मास्टर प्लान विभाग, तथाकथित नेता, पत्रकार बड़े माफ़िया और फ़ाइल खोलने वाले अफ़सर तक धन वर्षा बिना बादलों की ग़रज़ के साथ हो जाती है और फ़ाइल डीएम के तबादले तक बंद। इन दिनों झील की ज़मीन पर कब्ज़ा कर रहे लोग भाजपा में गहरी पैठ बनाए हुए हैं। यही कारण है कि पूर्वांचल के जिस माफ़िया पर सी एम की भृकुटि टेढ़ी है उसके मज़बूत गुर्गे झील में अट्टालिका खड़ी करने में एक मारे गए माफ़िया से कमाए गए पैसे को लगा रहे हैं। आज यहां एक से चार स्टार होटल खड़े हो रहे हैं। यहां हर तरह के व्यावसायिक काम्प्लेक्स हैं और बन भी रहे। किसी को नहीं पता कि ज़मीन कौन और किस हैसियत से बैनामा कर रहा। जबकि ये जमीन आज भी पिकनिक स्पॉट और झील के रूप में जिंदा रखी जा सकती है क्रमशः,,,,,,,,

    माफ़िया के बदलते स्वरूप 2
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    -तस्वीर में यही झील बची दिख रही, जलकुम्भी जहां है
    -दरअसल इसके भी मालिक हैं, अधिकार चुटकी बैनामा से है
    - 50 साल पुराने कागज़ पर बैक डेट में चलता है चुटकी से धंधा
    - राजस्व को चोट पहुंचाने वाले भू- माफ़िया को उपाय बताता है एक चर्चित लेखपाल
    यहां पैसे की माई पहाड़ नहीं चढ़ती बल्कि झील में उतर गई
    जौनपुर। जिले के प्राइम लोकेशन वाजिदपुर से जेसीज चौराहे तक 50 फ़ीट से अधिक गहराई में कभी जलजीव और जलकुम्भी ही दिखती रही। वर्ष 1956 में तत्कालीन सरकार ने विनियमित क्षेत्र के तौर पर झील घोषित किया था जैसा यहां के कानूनविद कपिलदेव सिंह व जय प्रकाश बताते हैं।
    कालांतर में शहर के बीच से जाने वाला लुम्बिनी-दुद्धी मार्ग का बाईपास झील के पूर्वी छोर से बन गया। तब नई पीढ़ी को लगा कि हाइवे के पश्चिम में खाली तालाब कभी न कभी पंछियों के कलरव से गुंजायमान होगा, लेकिन इसी तालाब में पहले एक मोटर वर्कशाप खुली, मैरेज़ लॉन फिर तो एक बड़ा होटल, अस्पताल, बाइक एजेंसी समेत तमाम व्यावसायिक काम्प्लेक्स बढ़ते गए। इसमें सफेदपोश भू-माफिया कूद पड़े। प्रशासन के पास ज़मीन की वल्दियत का जवाब नहीं है। पूर्व में यह भूमि राजा जौनपुर की बताई जाती है। उनके गुजरने के बाद खुश्की और चुटकी बैनामा की बाढ़ से झील ओवरफ्लो करने लगी। सत्ता में ऊपर तक पहुंच रखने और काला धन के मालिक थम थम कर अट्टालिका खड़े करते जा रहे हैं। किसी भवन का वैधानिक नक्शा भी नहीं पास है। ज़मीन किसकी है पता नहीं, किससे खरीदा? इसके जवाब में वही पीला क़ागज़ दिखेगा की 50 साल पूर्व मेरे परदादा को चुटकी बैनामा से मिली। हमने फ़ला को बेच दी। यहां बाहुबल भी दिखता है। बदलते अफसर भी मुहँ भरने के बाद चुप्पी साधे रहते हैं। किसी ने फ़ाइल खोली तो क़ीमती पान से उनकी जुबान बन्द हो जाती है।
    मुख्यमंत्री प्रदेश के जिन बड़े माफ़िया और उनके गुर्गों पर सख्ती बरत रहे हैं, उन्हीं माफ़िया के गुर्गे यहां भी हैं और झील में एक विस्वा चुटकी बैनामा की आड़ में 15 विस्वा ज़मीन कब्जा करने में लगे हैं, इसकी जानकारी यहाँ के अफ़सर उनके तक नहीं पहुंचने देते हैं क्योंकि उन्हें सत्ताधारी दल में होने की धौंस दी जाती है। कुछ तल विचल हुआ तो ये खुद पत्रकार बने दिखेंगे या मीडिया वालों को जरखरीद बता देंगे। 
    दशकों के इस बड़े झमेले वाले धंधे में नगरपालिका भी कम दोषी नहीं है। आखिर यह झील उसी के दायरे में आती जो है। यहां तो पैसे की माई पहाड़ चढ़ती रहती है। इस तरह झील को भू- माफिया डांगर सरीखे नोंच रहे हैं,,,,,,,,क्रमशः

    माफ़िया के बदलते स्वरूप 3
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    -भू-माफ़िया की बाज़ नज़र मिशनरी की ज़मीन पर भी गड़ी
    -भाजपा का जिला कार्यालय हुआ मोबाइल वैन, बैनर ज़मीन कब्जे के काम आ रहा
    -सालभर पूर्व तक झील के ऊपर लगा था भाजपा कार्यालय का बोर्ड
    जौनपुर। पाठकों के लिए जिले का विनियमित क्षेत्र झील की ज़मीन और माफ़िया के बदलते स्वरुप शीर्षक से मिलने वाली विशेष रिपोर्ट फ़िल्म की एकता कपूर के सीरियल की तरह मिलेगा लेकिन चिंता न करें कुछ दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के सामने रिपोर्ट की कॉपी  होगी। अभी मैं भू- की गहराई नाप रहा हूँ, इसमें प्याज के छिलके की तरह परत दर परत देख रहा हूँ। यहां माफ़िया फ़िल्म बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी में किरदार निभाने वाले कादर खान को भी पीछे छोड़ दिए हैं। वह जिस ज़ेल में बंद था उसे बेचकर ही बाहर निकला। उसका थोड़ा सा बदला रूप यहां है। इसके ज़िक्र से पूर्व एक सख़्त ब्यूरोक्रेट का ताज़ा उदाहरण देखिए, चन्दौली के डीएम संजीव सिंह ने जिला पंचायत के प्रशासक का अतिरिक्त कार्यभार सम्भालते ही सत्ताधारी दल भाजपा के जसुरी मौजा चन्दौली के जिला कार्यालय के नाम विगत 12 फरवरी को नोटिस जारी किया कि पार्टी कार्यालय भवन का नक्सा नहीं पास है, उसपर लगभग 21 हजार का जुर्माना लगा दिया। ऐसा उन्होंने इसलिए किया कि अक्टूबर 2017 में उत्तर प्रदेश का शासनादेश था कि अब ग्रामीण क्षेत्र के आवासीय, व्यावसायिक भवनों का नक्सा जिला पंचायत से पास कराना अनिवार्य है। ये है योगी आदित्यनाथ के भाजपा का शासन, लेकिन कानून का पालन कराना तो प्रशासन का काम है। 
    जौनपुर में जितने भी डीएम आ रहे उनमें से कोई भी चन्दौली के डीएम संजीव जैसा नहीं दिखा। यहॉ 1956 में झील के लिए विनियमित क्षेत्र वाजिदपुर से जेसीज चौराहा यानी गोमती किनारे तक तमाम भवनों में अरबों का कारोबार फैला है, इनमें प्रशासन के साथ नगरपालिका भी मिला है। झील में बने भवनों का नक्शा तक पास नहीं है, कोई अधिकारी नोटिस रूपी कागज़ भी झील में फेंकता है तो उसे भी नोटों की सीढ़ी चढ़नी पड़ती है। वह भी पांच पायदान पहुंचकर दम तोड़ देता है। 
    झील से ही एक मगरमच्छ निकला और लाइनबाजार स्थित फ्रेजर स्कूल की चार एकड़ से अधिक ज़मीन के 50/ 60 स्क्वायर फ़ीट में अपना जबड़ा गड़ा दिया। उसने यहां भी बचाव के लिए भाजपा के जिला कार्यालय को ढाल बना लिया। पहले झील पर लगा बोर्ड अब यहां आ गया। 
    यह ज़मीन सीएनआई यानी चर्च ऑफ़ नार्थ इंडिया 25 महात्मा गांधी मार्ग इलाहाबाद विशप हाउस की है। इसके केयर टेकर भाजपा नेता व अधिवक्ता सन्तोष सिंह हैं। पिछले तीन वर्ष पूर्व फ्रेजर की ही ज़मीन कब्जा करने में छह लोग जेल गए और हाईकोर्ट से बाद में जमानत पर हैं। इसी ज़मीन की बाउंड्री में मिशनरी की एक टीचर को आवास एलाट था। उनसे एक भू- माफिया ने 2005 में किराए 1000 प्रति माह और बिजली बिल देयता पर लिया। हाल में उस भवन को तोड़कर बहु मंजिली इमारत बनी और शो रूम खुलने के साथ भाजपा कार्यालय भी खुल गया। ऐसा इसलिए होता है कि भाजपा का जिला पदाधिकारी परिवार का ही जो है। केयर टेकर उन दिनों बीमार थे और शहर से बाहर भी रहे। वह कहते हैं कि मिशनरी की कोई भूमि नहीं बिकी है---क्रमशः

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