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    कृषि छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत बन रहे है, रूस में कार्यरत यूपी के डॉ विष्णु राजपूत | #NayaSaberaNetwork

    कानपुर से की पढाई, अब दक्षिणी रूस के सबसे बड़े विश्वविद्यालय "साउथर्न फ़ेडरल यूनिवर्सिटी, रोस्तोव-आन -डॉन, मे अपने महत्वपूर्ण शोधो से प्रदेश का नाम रोशन कर रहे है।_  

    यूपी के हरदोई जिले के मल्लावां कटरी तिर्वा के छोटे से गांव गुलाब पुरवा में जन्मे डॉ0 विष्णु राजपूत पिछले पांच वर्षो से पर्यावरण प्रदुषण पर कार्य कर रहे है और अपने शोधो से विश्वविद्यालय में कार्यरत पांच हज़ार वैज्ञानिको में "टॉप टेन" में जगह बनाने के साथ, साल के अंत में "अपने उच्च शोधो व हाई इम्पैक्ट प्रकाशन के लिए विश्वविद्यालय की तरफ से "सर्टिफिकेट आफ ऑनर" भी प्राप्त किया। प्रोफसर "एनातोली मेतेलीत्सा" वाईस रेक्टर आफ साइंस एंड रिसर्च, द्वारा पहली बार किसी विदेशी वैज्ञानिक को दिया गया। जून 2020 में ही डॉ0 राजपूत को एजुकेशन मिनिस्ट्री, रूस तथा विश्वविद्यालय द्वारा "हाइली क्वालिफाइड स्पेशलिस्ट इन एग्रीकल्चर एंड बायोलॉजिकल साइंस" का स्टेटस भी दिया गया।

    डॉ0 राजपूत ने 131 अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अत्यधिक उपयोगी शोध, तथा पांच साइंटिफिक बुक्स प्रकाशित की है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिये कृषि छात्रों खासकर ग्रामीण परिवेश से आये छात्रों को प्रोत्साहित करते है, देश विदेश में पढाई, प्रॉब्लम सॉल्विंग रिसर्च, शोधलेखन व प्रकाशन में मदद करते है। अर्ली करियर रिसर्चर के लिए ऐसी जानकारी बहुत ही उपयोगी है।


    डॉ0 राजपूत ने कृषि की पढाई कानपूर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से की और रूस में नैनो कणों के विभिन्न क्षेत्र में बढ़ते उपयोग से मानव स्वास्थ्य व पौधों पर होने वाले प्रभाव पर शोध कर रहे है और इन कणो का सही सही कृषि में उपयोग कैसे करे। हर वो कण जिसका आकर 100 नैनोमीटर या इससे छोटा हो “नैनोकण” माना जाता है। इतने छोटे आकार पर इन पदार्थो की क्रियाशीलता बदल जाती है। इन्ही विशिष्ट विशेषता के कारण आज ये कण हर क्षेत्र में खास कर कृषि में नैनो फर्टीलिज़ेर्स, नैनो पेस्टीसिड्स के रूप के उपयोग के लिए तैयार है जिनकी थोड़ी सी मात्रा ही कृषि उत्पादन के लिए काफी लाभकारी कारगर हो सकती है।

    डॉ0 राजपूत के अनुसार  छात्रों को अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आकर, अपने सामाजिक वातावरण से थोड़ा बाहर निकल कर अलग, नये परिवेश में तकनीकी ज्ञान अर्जित करना चाहिए जो नई सोच विकसित करने के लिए बहुत ज़रूरी है। उनके छोटे से गांव से रूस के टॉप विश्वविद्यालय में सम्मान प्राप्त करना सिर्फ कठिन परिश्रम और विभिन्न साइंटिफिक ग्रूप के साथ कार्य करने की शैली ही है।

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