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    UP के लाल ने कर दिया कमाल | #NayaSaberaNetwork

    • कृषि विज्ञान में अतुलनीय कार्य कर रूस में शीर्ष 10 वैज्ञानिकों में बनायीं जगह
    नया सबेरा नेटवर्क
    हरदोई के मल्लावां कटरी तेरवा कुल्ली के गुलाब पुरवा में जन्मे डॉ. विष्णु राजपूत ने चंद्रशेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर से कृषि की पढ़ाई करने के बाद 2015 में रूस के दक्षिणी संघीय विश्वविद्यालय में शोध कार्य शुरू किया और मृदा सुधार के क्षेत्र में अतुलनीय परिणाम प्राप्त किए हैं। उनके शोध की मुख्य दिशा रूप से पर्यावरण प्रदूषण, खासकर मृदा प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में प्रभावी तरीकों तकनीकी का विकास करना है, जिसका सीधा संबंध खाद्य पदार्थो अर्थात् कृषि उत्पादों की सुरक्षा से है। उनके द्वारा किया जा रहा वर्तमान अनुसंधान खाद्य व अनाज वाली फसलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।

    उन्होंने बताया कि बढ़ता औद्योगीकरण तथा मानवजनित गतिविधियों के करना अत्यधिक मात्रा में विषाक्त भारी धातुएं कृषि योग्य मिटटी में आ रही है जिनको अलग करने की सुचारु विधि न होने की वजह से मृदा स्वाथ्य ख़राब हो रहा है और खाद्यान को प्रदूषित कर रहा है।
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    उन्होंने मिट्टी से भारी धातुओं को हटाने के लिए प्रौद्योगिकी का विकास किया और धातु प्रतिरोधी बैक्टीरिया की विविधता का भी अध्ययन किया और ऐसे प्रदूषित वातावरण में पौधों को उगाने के लिए विधि भी विकसित की। इन तकनीकों द्वारा प्रदूषित मृदा में स्वाथ्य खाद्यान का उत्पादन किया जा सकता है। साथ की यह मिटटी में सूक्ष्म जीवो की संख्या बढ़ाकर उपज को बढ़ाएगा। डॉ. राजपूत ने 110 उच्च गुणवत्ता के लेख प्रकाशित किये, जिनमें से 46 अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस स्कोपस और वेब ऑफ साइंस में अनुक्रमित हैं और इस डाटा बेस के अनुसार विश्वविद्यालय में कार्यरत पांच हज़ार वैज्ञानिकों अथवा शोध कार्यकर्तओं में से शीर्ष 10 सबसे सफल वैज्ञानिकों में से एक बन गए। साल 2019 के लिए डॉ. राजपूत को “एकेडमी ऑफ बायोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी“, साउथर्न फ़ेडरल यूनिवर्सिटी, रूस द्वारा शिक्षण व शोध में प्रशंसनीय कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र दिया गया और 2020 में रूस सरकार की तरफ से "हाइली क्वालिफाइड स्पेशलिस्ट" का सर्टिफिकेट दिया गया। हाल ही ही में यह न्यूज़ रुसी भाषा में कई पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए (https://sfedu.ru/www2/web/press-center/news/63443)। वर्तमान में विष्णु राजपूत अग्रणीय शोधकर्ता अर्थात एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। 

    अपने शोध टीम के साथ वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विष्णु राजपूत।
    अपने शोध टीम के साथ वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विष्णु राजपूत।

    डॉ. राजपूत द्वारा किए गए शोध के परिणाम न केवल रूस में, बल्कि पूरी दुनिया भर में भूमि संसाधनों की पारिस्थितिक स्थिति में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं। दरअसल, उन पर उगाई जाने वाली फसलों की गुणवत्ता भी मिट्टी की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। जिसमें से भोजन का उत्पादन किया जाता है, जो सीधे तौर पर लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा है।

    डॉ. राजपूत ने ये भी बताया कि आजकल इन भारी धातुओं के नैनोकण (जिसका आकर 100 नैनोमीटर या इससे छोटा हो:- मनुष्य के बालों का व्यास 60 हजार नैनोमीटर होता है) जो भी अत्यधिक प्रयोग हो रहे है, बड़ी समस्याए बनते चले जा रहे है। हालांकि इन कणों के उपयोग से मानव जीवन बहुत आसान हुआ है इसलिए वह इनके सुरक्षित उपयोग की विधि पर कार्य कर रहे है। साथ ही वह अपने प्रयोगों के द्वारा बुंदेलखंड और पूर्वांचल में होने वाली फसलों की उपज संबंधी समस्याओं को नैनोटेक्नोलॉजी प्रयोगों के माध्यम से दूर करना चाहते हैं।

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