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    कलात्मक दृष्टि और रचनात्मक सोच से ही दे सकते हैं मिट्टी को आकार : मनोज शर्मा | #NayaSaveraNetwork

    • दो दिवसीय ऑनलाइन पॉटरी वर्कशॉप का समापन
    • व्हील, कॉइल और स्लैप के जरिये पॉट बनाने की सरल तरीकों में दी जानकारी
    नया सवेरा नेटवर्क
    डिजिटल डेस्क। अस्थाना आर्ट फोरम के क्रिएटिव वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर आज दो दिवसीय ऑनलाइन पॉटरी वर्कशॉप का समापन हुआ। इस पॉटरी वर्कशॉप में विशेषज्ञ के रूप में पुणे महाराष्ट्र से पॉटरी विशेषज्ञ मनोज शर्मा रहे। जिन्होंने दो दिन पॉटरी से सम्बंधित सभी जानकारियां वर्कशॉप में प्रतिभागियों को दी। वर्कशॉप में मिट्टी से संबंधित भी जानकारी दी गई जैसे कौन सी मिट्टी का प्रयोग करें, मिट्टी को पॉट बनाने के लिए कैसे तैयार करें, मिट्टी को गूँथना जैसी काफी सारी बारीकियों को मनोज ने प्रतिभागियों को दी।
    कलात्मक दृष्टि और रचनात्मक सोच से ही दे सकते हैं मिट्टी को आकार : मनोज शर्मा | #NayaSaveraNetwork

    मनोज शर्मा ने व्हील पर भी पॉट बना कर दिखाया , उसके बाद कॉइल के माध्यम से भी पॉट बनाने का तरीका बताया दूसरे दिन स्लैप से भी सुंदर, और सजावटी पॉट बनाने का सरलतम तरीका बताया। तीनो माध्यम मनोज ने पॉट बनाकर बताया। साथ ही अपने स्टूडियों को भी दिखाया। सभी पार्टिसिपेंट्स ने इससे संबंधित बीच बीच मे अपने मन मे उठने वाले प्रश्नों को भी मनोज के सामने रखा और एक्सपर्ट ने बड़े ही सरल ढंग से काम के माध्यम से उत्तर दिया।

    कलात्मक दृष्टि और रचनात्मक सोच से ही दे सकते हैं मिट्टी को आकार : मनोज शर्मा | #NayaSaveraNetwork

    मनोज शर्मा ने बताया कि पॉटरी कला हमारे साथ कई हजार सालों से जुड़ा हुआ है क्योंकि इसका संबंध हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले बर्तनों से जुड़ा है यह हमारे जन्म से मृत्यु तक इसकी आवश्यकता होती है जिस तरह मानव एक-एक कदम चलकर विकास की ओर अग्रसर हुआ उसी के साथ-साथ पॉटरी कला काफी विकास हुआ और इसका संबंध सीधे मनुष्य के हृदय से होता है और लोग इसकी और आकर्षित होते हैं।

    कलात्मक दृष्टि और रचनात्मक सोच से ही दे सकते हैं मिट्टी को आकार : मनोज शर्मा | #NayaSaveraNetwork

    परंतु आज भी हमारे भारतवर्ष में बहुत लोग इस कला से अनभिज्ञ हैं पर धीरे-धीरे इसका लोगों के बीच में यह कला अपना स्थान बना रहा है। मैं अपना काम ज्यादातर प्रकृति से प्रभावित होकर करता हूं । मेरे पात्र कला में ज्यादातर क्लासिकल पॉटरी कला है तथा साथ ही कुछ काम मैंने प्रकृति से ही प्रेरित या प्रभावित होकर किया है तथा उसमें जो अगले है वह बहुत ही राहों में प्रयोग किया गया है मुझे काम करके बहुत ही खुशी होती है मैंने रंगो तथा आकार के साथ बहुत से प्रयोग किए हैं।

    कलात्मक दृष्टि और रचनात्मक सोच से ही दे सकते हैं मिट्टी को आकार : मनोज शर्मा | #NayaSaveraNetwork

    मेरे नजर में हमारे भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में जहां तक मानव समाज की सोच काम करती है वहां कला की पूजा की जाती है यह एक ऐसी साधन है जो सारे समाज के लोगों के अंतः मन को छू लेती है चाहे वह चित्रकला, मूर्तिकला या पॉटरी कला या संगीत कला हो कोई भी माध्यम हो। कला का एक अपना ही महत्व है इन्हीं कलाओं  में  एक पॉटरी कला  है जिसका संबंध मुझसे इनमें कई कलाओं का समावेश है और खास बात यह है कि यह कला त्रिआयामी कला के अंतर्गत आता है इस कला में विज्ञान की भूमिका भी सर्वोपरि है इसमें रंगो विलेज ग्राफिक और डिजाइन का अपना एक अलग महत्व है।

    क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना ने बताया कि मनोज शर्मा ने पॉटरी एंड सेरामिक में स्नातक व स्नातकोत्तर (1994 - 2000) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी से किया। वर्तमान में मनोज पुणे में अपने एक बड़े स्टूडियों में काम करते हैं। बहुत से प्रदर्शनियों, कैम्प,कार्यशालाओं में भाग लिया है। 

    मनोज एक विशेष इफेक्ट के भी एक्सपर्ट हैं। क्रिस्टल इफेक्ट। क्रिस्टल इफेक्ट पर काम करने वाले पुणे महाराष्ट्र से मनोज शर्मा ने बताया कि क्रिस्टल में जिंक 20 से 25 प्रतिशत होता है। जिंक की मुख्य भूमिका होती है इसमें। पॉट को मिट्टी से बनाने के बाद बिस्किट फायर करते हैं फिर गलेजिंग करते है क्रिस्टलाइन की फायरिंग 1250 से 1280 तापमान पर किया जाता है। यह सधे हाथों का ही कमाल होता है। नियमित रूप से ग्लेज़ बनाने की प्रक्रिया में काम करने की अपेक्षा क्रिस्टलीय ग्लेज़ बनाने की प्रक्रिया जो अधिक तरीके, तापमान ,समय  काफी महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि इस इफेक्ट के लिए उपयोग में लाने वाले रासायनिक पदार्थ में पात्र से नीचे जाने की प्रवृत्ति होती है और फायर-साइकिल एकदम सही तापमान माप पर निर्भर करती है।ग्लेज के बहुत सारे इफेक्ट के लिए अलग अलग रसायनिक तत्व ग्रिस्टली बोरेट, कॉपर कार्बोनेट के प्रयोग होते हैं।

    मनोज शर्मा जमशेदपुर झारखंड के निवासी है । इन्होंने वर्ष 2000 में सिरेमिक में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया। तब से आजतक पुणे में अपने आप को सेरामिक कलाकार के रूप में स्थापित करने के लिए संघर्ष किया जो अभी भी जारी है। पुणे कात्रज अम्बे गांव में मनोज ने अपना सिरेमिक स्टूडियों बनाया है जहाँ अपने विचारों को सेरामिक माध्यम से कलात्मक प्रयोग कर रहे हैं।

    - भूपेंद्र कुमार अस्थाना

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