• Breaking News

    एक तरफ काल, दूसरी ओर आक्सीजन की कालाबाजारी | #NayaSaberaNetwork

    अजय कुमार, लखनऊ
    कोरोना महामारी में भी कुछ ‘शैतानी ताकतें’ अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही हैं। लॉक डाउन के समय जरूरत की चीजों की कैसे कालाबाजारी हुई थी, किसी से छिपा नहीं है। आटा जैसी आवश्वयक वस्तु बाजार से गायब हो गई थी। जो आटा आम दिनों में २०-२२ रूपए किलो बिकता था, वह ३० रूपए किलो तक बेचा गया। शायद ही कोई खाद्य पदार्थ ऐसा होगा जिसकी कीमत नहीं बढ़ाई गई हो। कालाबाजारियों ने मुनाफा कमाने के चक्कर में घटिया माल तैयार करना शुरू कर दिया। बाद में यह कालाबाजारी कोरोना के लिए जरूरी चीजों में भी देखने को मिली जो आज तक जारी है। एक तो कोरोना में मरीज के जान के लाले पड़े है, दूसरी तरफ कोरोना के उपचार के लिए जरूरी सामानों की कालाबाजारी ने मरीजों और शासन-प्रशासन की नींद उड़ा रखी है। कोरोना प्रकोप जब शुरू हुआ था तब कालाबाजारियों ने मास्क और सेनेटाइजर के लिए मनमाने पैसे वसूले थे जो बिल्कुल भी उचित नहीं था। इसके बाद रेनी डे सिवियर दवा की कालाबाजारी शुरू हो गई जिसे कोरोना से निपटने में कारगर माना जा रहा था लेकिन यह दवा बड़े प्राइवेट अस्पतालों को छोड़कर बाकी जगह उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में अगर किसी मरीज को इस दवा को खरीदना होता है उन्हें ब्लैक मार्केट में कई गुना दाम देने पड़ते।
    एक तरफ काल, दूसरी ओर आक्सीजन की कालाबाजारी  #NayaSaberaNetwork


    जिस समय कोरोना वायरस के संक्रमण और उससे उपजा खतरा दुनिया भर में चिंता का विषय बना हुआ है, उसमें इसके इलाज से संबंधित दवाओं की कालाबाजारी की खबरें यही दर्शाती हैं कि कैसे कुछ लोग या समूह देश और समाज के सामने पैदा संकट को भी मुनाफे का मौका बना लेते हैं। ऐसे में सरकार से यही उम्मीद होती है कि वह दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और इस पर रोक के लिए एक ठोस नियमन की व्यवस्था करे।

    यह विडंबना ही है कि कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए औषधि कीमत नियामक को दवाओं की कीमत सीमा और मूल्यों में स्वीकार्य वृद्धि के संदर्भ में दवा (कीमत नियंत्रण) आदेश, २०१३ का उल्लंघन नहीं होना सुनिश्चित करने के लिए अलग से निर्देश जारी करना पड़ता है जबकि यह राज्यों के नियमित दायित्व में शामिल होना चाहिए। अगर दवा की कीमतों और उसके कारोबार से संबंधित कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद हैं तो उसके पालन के लिए सरकार को अलग से निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी। यह एक सामान्य व्यवस्था होनी चाहिए थी जिस पर अमल अनिवार्य हो।
    उक्त कालाबाजारी से सरकार निपट ही रही थी कि अब आक्सीजन सिलेंडरों की कालाबाजारी ने सरकार की नींद उड़ा कर रख दी है जबकि कोरोना पीड़ितों के लिए आक्सीजन की बेहद जरूरत रहती है। यह और बात है कि न कम्पनियां और न ही सरकार यह मानने को तैयार हैं कि आक्सीजन सिंलेडरों की कमी है। आक्सीजन की काला बाजारी पर उत्पादकों ने आश्वस्त किया है कि आक्सीजन के उत्पादन में कोई कमी नहीं है। समस्या सप्लाई को लेकर है परंतु सच्चाई यही है कि मेडिकल कालेज ऑक्सीजन की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है। कीमतों का बढ़ना भी यही बताता है कि स्थिति हाथ से बाहर जा सकती है। इसी के चलते १४ सिंतबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा० हर्षवर्धन  को संसद में बयान देना पड़ गया। सरकार कह रही है कि देश में इस समय केवल ५.८ प्रतिशत मामलों में (कोरोना रोगियों के) ऑक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता पड़ रही है। वहीं अस्पतालों का हाल कुछ और बता रहा है।

    उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो अन्य राज्यों की तरह यूपी में भी ऑक्सीजन के बढ़ते दाम और अब पर्याप्त उपलब्धता न होने से कोरोना वायरस के संक्रमण का इलाज करवा रहे मरीजों की जान सांसत में है। सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत अचानक २ से ३ गुना तक बढ़ गई है जबकि ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली कंपनियों के प्लांट में उसका उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं हो रहा है। ऑक्सीजन की बढ़ती डिमांड के चलते  ऑक्सीजन के वेंडर्स ने कालाबाजारी शुरू कर दी है। जरूरतमंदों से निर्धारित मूल्य से दोगुना तक वसूला जा रहा है।

    दरअसल जमशेदपुर में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में ताला लगने और महाराष्ट्र, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल आदि कई राज्यों में किल्लत होने से उत्तर प्रदेश में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत है, उन्हें इसकी मनमानी कीमत चुकानी पड़ रही है। होम आइसोलेशन में रह रहे तकरीबन ३४ हजार मरीजों को तो छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर का ५ हजार और बड़े सिलेंडर के लिए १० हजार रुपये सुरक्षा राशि के तौर पर भी जमा करनी पड़ रही है। निजी अस्पतालों में तो ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती मरीज को पहले एक दिन का १००० से १५०० रुपये देना पड़ता था, अब वह ३००० रुपये तक वसूल रहे हैं। आइसीयू में भर्ती मरीजों से पहले २५०० रुपये प्रतिदिन चार्ज लिया जाता था। अब करीब ५ हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। वहीं बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर की रिफलिंग अभी तक २१३ रुपये थी अब अचानक इसके दाम ३५० रुपये तक पहुंच गए हैं। १.५ क्यूबिक मीटर वाले छोटे ऑक्सीजन वाले सिलेंडर की रिफलिंग १३० रुपये में हो रही है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन कम पड़ रही है।

    हालात को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने इंडस्ट्रीयल ऑक्सीजन के उत्पादकों को भी मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन का लाइसेंस दे दिया है। वहीं नए प्लांट्स स्थापित किये जाने की बात भी हो रही है। ऑक्सीजन उद्योग की बात करें तो देश में कुल १२ बड़े और ५०० मझौले-छोटे ऑक्सीजन उत्पादक हैं। इनमें गुजरात बेस्ड कपंनी आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स प्रा.लि. देश की सबसे बड़ी ऑक्सीजन उत्पादक फर्म है। देश भर में इसके अनेक प्लांट्स हैं। इसी के समकक्ष दिल्ली बेस्ड गोयल एमजी गैसेस प्रा.लि. और कोलकता बेस्ड कंपनी लिंडे इंडिया हैं।

    ‘ऑल इंडिया इंडस्ट्रीयल गैसेस मेन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन‘ का कहना है कि मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन ४ गुना तक बढ़ा दिया गया है। मार्च २०२० में जहां हम प्रतिदिन ७५० टन मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहे थे। आज २७०० टन प्रतिदिन कर रहे हैं। पहले जहां औद्योगिक ऑक्सीलन का उत्पादन ७० प्रतिशत हो रहा था और मेडिकल ऑक्सीजन का ३० प्रतिशत, वह अनुपात मार्च के बाद उलट गया है। संगठन का कहना है कि उद्योग पर जबरर्दस्त दबाव है। मार्च में जब प्रधानमंत्री ने मेडिकल इमरजेंसी सप्लाई से जुड़े सभी साझीदारों से चर्चा कर आपूर्ति का आकलन किया था, तब पर्याप्त आपूर्ति  का आश्वासन दिया गया था किंतु अनलॉक बाद सभी उद्योग-धंधे शुरू हो गए जिससे औद्योगिक ऑक्सजीन की मांग भी बढ़ गई । इधर कोरोना मामलों की रफ्तार कई गुना आगे निकल चुकी है। मांग की पूर्ति कैसे होगी? इस पर केंद्र यही कह रहा है कि ऑक्सीजन की कमी नही है। कुल खपत और मांग से लगभग ६० प्रतिशत अधिक उत्पादन हो रहा है। समस्या सप्लाई की है। कोरोना महामारी के चलते एक तरफ काल मरीजों के ऊपर मौत बनकर मंडरा रहा है तो वहीं आक्सीजन की कालाबाजारी ने भी मरीजों की नींद उड़ा रखी है कि कहीं आक्सीजन की कमी उनका दम न तोड़ दे।

    *विज्ञापन : अपनों के साथ बांटें खुशियां, उन्हें खिलाएं उनका favourite Pizza | Order now - Pizza Paradise 9519149897, 9918509194 Wazidpur Tiraha Jaunpur*
    Ad

    *विज्ञापन : देव होम्यो क्योर एण्ड केयर | खानापट्टी (सिकरारा) जौनपुर | डॉ. दुष्यंत कुमार सिंह  मो. 8052920000, 9455328836*
    Ad

    *विज्ञापन : पूर्वांचल का सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठान गहना कोठी भगेलू राम रामजी सेठ 1. हनुमान मंदिर के सामने, कोतवाली चौराहा, 9984991000, 9792991000, 9984361313, 2. सद्भावना पुल रोड नखास, ओलन्दगंज, 9838545608, 7355037762*
    Ad

    No comments