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    "मधुबनी चित्रकला लोक संस्कृति का अंग है" | #NayaSaberaNetwork

    • मिथिला (मधुबनी) कला से जुड़ने का अवसर क्रिएटिव वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर
    नया सबेरा नेटवर्क
    लखनऊ। सौंदर्य की बात हमेशा के लिए एक खुशी है । कला सौंदर्य की चीजों को बनाने और सराहना करने का कार्य है। मनुष्य ने पाषाण युग से कला के लिए एक आंख विकसित की है । कला सूचना संवाद कर सकती है और हमारे जीवन को आकार दे सकती है।मधुबनी चित्रकला को मिथिला चित्रकला भी कहा जाता है जो पारंपरिक रूप से बिहार के मिथिला क्षेत्र में विभिन्न समुदायों की महिलाओं द्वारा निर्मित की जाती है।इन चित्रों को विशेष अवसरों, त्योहारों, धार्मिक अनुष्ठानों आदि सहित आनुष्ठानिक सामग्री के प्रतिनिधित्व के लिए जाना जाता है। कागज और कैनवास पर चित्रकला का अभी हाल ही में जो विकास हुआ वह मुख्य रूप से मधुबनी के आस-पास के गांवों में हुआ।धीरे-धीरे इस लोक कला ने अनेक कला पारखियों को आकर्षित किया और अब वह वैश्वीकृत कला का रूप बन गई है। पारंपरिक रूप से इस पेंट को कई टूल्स के साथ किया जाता है जैसे अँगुलियों, टहनियाँ, ब्रश, निब-पेन और मैचस्टिक्स।प्राकृतिक रंगों और रंगद्रव्य को रंगने के लिए उपयोग किया जाता है। इस पर ध्यान देने योग्य ज्यामितीय नमूने दिखाई देत हैं।

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        भारत की अनेक जातियों व जनजातियों में पीढी दर पीढी चली आ रही पारंपरिक कलाओं को लोककला कहते हैं। इनमें से कुछ आधुनिक काल में भी बहुत लोकप्रिय हैं जैसे मधुबनी और कुछ लगभग मृतप्राय जैसे जादोपटिया। भारत मे मधुबनी,कोहबर, कलमकारी, कांगड़ा, गोंड, चित्तर, तंजावुर, थंगक, पटचित्र, पिछवई, पिथोरा चित्रकला, फड़, बाटिक, मधुबनी, यमुनाघाट तथा वरली, कालीघाट, राजस्थानी लघु चित्र आदि भारत की प्रमुख लोक कलाएँ हैं।
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        मधुबनी पेंटिंग खास तरह की कला है। दरअसल मिथिला क्षेत्र में इस पेंटिंग की शैली की उत्पत्ति की वजह से इसे मिथिला पेंटिंग के नाम से भी जाना जाता है। इस पेंटिगशैली का इस्तेमाल आज भी महिलाएं अपने घरों और दरवाजों को सजाने के लिए किया करती हैं। किंविदंती के अनुसार इस कला की उत्पत्ति रामायण काल में हुई थी। मधुबनी पेंटिंग प्रकृति और पौराणिक कथाओं की तस्वीरें उकेड़ी जातीं हैं। इन चित्रों में कमल के फूल, बांस, चिड़िया, सांप आदि कलाकृतियाँ भी पाई जाती हैं। इन पेंटिंग को झोपड़ियों की दीवार पर किया जाता था, लेकिन अब यह कपड़े, हाथ से बने कागज और कैनवास पर भी की जाने लगी हैं। मधुबनी पेंटिंग दो तरह की होतीं हैं- भित्ति चित्र और अरिपन। 
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    मिथिला (मधुबनी) चित्रित मास्क - 
    मास्क पर बनी मधुबनी पेंटिंग को कोरोना काल में भी काफी लोकप्रियता हासिल हुई है। मधुबनी पेंटिंग के कलाकार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अपना योगदान दे रहे हैं।जुलाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी मन की बात में मास्क पर बनी मधुबनी पेंटिंग और इसके बढ़ते उपयोग की जमकर तारीफ की। इस कठिन परिस्थितियों में भी कलाकारों ने अपने लिए खुद रोजगार ढूंढ़ निकाला।
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    उत्तर प्रदेश लखनऊ के चित्रकार भूपेंद्र अस्थाना ने बताया कि पहली बार मधुबनी चित्रित मास्क को सोशल मीडिया पर देखा और मधुबनी (बिहार) से 6 मास्क अपने और परिवार के इस्तेमाल के लिए मंगवाया। इस्तेमाल में भी बहुत ही आराम दायक लगा साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से भी और कलात्मकता की दृष्टि से भी। इस प्रकार अस्थाना के संपर्क में लोगों ने इस मास्क लेने की इच्छा जाहिर की । और भूपेंद्र अस्थाना के माध्यम से आज की तारीख में दिल्ली,लखनऊ, आजमगढ़, ग़ाज़ीपुर,बनारस, जौनपुर,बुलंदशहर जैसे शहरों में इस मास्क का प्रयोग कर रहे हैं। मधुबनी मास्क उत्तर प्रदेश में अस्थाना के माध्यम से पहुच रहा है।

         इस मधुबनी मास्क को बिहार से पूरे देश और विदेश में भी पहुचाने वाले मधुबनी (क्राफ्ट वाला) के राकेश झा ने बताया कि मास्क पर बनी मधुबनी पेंटिंग अब पूरे देश-विदेश में ख्याति प्राप्त कर लिया है। हजारों कलाकारों की आजीविका का साधन बन गया है। मधुबनी के जितवारपुर, जगतपुर, रांटी, रघुनी देहत, राजनगर के सिमरी, मधुबनी शहर, सेराम सहित कई गांवों के कलाकार लाभांन्वित हो रहे हैं।
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       भूपेंद्र कुमार अस्थाना उत्तर प्रदेश में युवा चित्रकार के साथ साथ कला लेखन, और कला व कलाकारों के प्रोत्साहन में कई वर्षों से कार्य कर रहे हैं। कई बड़े और अच्छे कला के कार्यक्रम भी किये हैं। इसी प्रकार इस कोरोना काल मे भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पिछले ढाई महीने से ऑनलाइन पेंटिंग के कार्यशाला और युवा कलाकारों के प्रोत्साहन और सहयोग हेतु अस्थाना आर्ट फोरम के क्रिएटिव वर्चुअल प्लेटफॉर पर ऑनलाइन स्टूडिओं प्रेजेंटेशन भी कर रहे हैं। अब तक 10 कार्यशाला और 3 आर्टिस्ट प्रेजेंटेशन किया है। लगभग देश के 8 कलाकार और लगभग 450 प्रतिभागियों ने इस ऑनलाइन कला के गतिविधि में भाग लिया। 
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      अब अगली श्रृंखला में भारत के लोक कला को लेकर ऑनलाइन कार्यशाला प्रारंभ होने जा रही है। जिसमे 26 व 27 सितंबर 2020 को मधुबनी पेंटिंग की कार्यशाला होगी। इस कार्यशाला में मधुबनी कला विशेषज्ञ प्रीति दास होंगी जो खुद मधुबनी से हैं। इस कार्यशाला के माध्यम से हम कला की अमर सुंदरता को इस जीवंत और पारंपरिक मधुबनी कला के सृजन के लिए सराहना करते हैं। मधुबनी चित्रकला लोक संस्कृति का अंग है। जो ग्रामीण जीवन के सहज जीवन को प्रदर्शित करती है। मधुबनी कला को और करीब से जानने और समझने और मधुबनी चित्रित मास्क प्राप्त करने और मधुबनी कार्यशाला में भाग लेने के लिए भूपेंद्र अस्थाना से इस नम्बर 7011181273,9452128267 पर संपर्क कर सकते हैं।

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