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    सेवानिवृत्ति पर विशेष : डॉ. रणजीत सिंह ने विद्यालय की कीर्ति को चतुर्दिक फैलाया, छोड़ी अमिट छाप | #NayaSaveraNetwork

    अविस्मरणीय 31 जुलाई 2020 के दिन सेवानिवृत्त डॉ. रणजीत सिंह का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है।ऐसी शख्सियत जिन्होंने समोधपुर जैसी बंजर भूमि को न केवल शैक्षिक दृष्टिकोण से उर्वरक बनाया, बल्कि ऐसा बीजारोपण किया जिसका फल यहां की भावी पीढ़ियां प्राप्त करती रहेंगी। 
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    डॉ. रणजीत सिंह का जन्म आजमगढ़ जिले की लालगंज तहसील स्थित खनियरा गांव में हुआ है। प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक पाठशाला खनियरा लालगंज से प्राप्त की तथा 6 से 10 तक की शिक्षा श्री कृष्ण गीता राजश्री इंटर कॉलेज लालगंज में ग्रहण की।
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    1971 में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात वाराणसी चले गए, जहां प्रसिद्ध उदय प्रताप कॉलेज से 1973 में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। श्री गणेश राय महाविद्यालय डोभी जौनपुर से 1975 में बीएससी तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय से 1977 में एमएससी (Zoology) की परीक्षा उत्तीर्ण की। B.Ed की उपाधि आपने 1981 में श्री गणेश राय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोभी से ग्रहण किया जहां आप गोल्ड मेडलिस्ट रहे। श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा आपको पुरस्कृत भी किया गया। आपको गोरखपुर यूनिवर्सिटी कोर्ट का मेंबर भी बनाया गया पुनः M.Ed की उपाधि 1982 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से प्राप्त किया।

    पूर्वांचल विश्वविद्यालय से 2008 में पीएचडी की उपाधि ग्रहण की, इस दौरान देश-विदेश में आपके कई पेपर प्रकाशित हुए, जिसमें अमेरिका में प्रकाशित जर्नल ड्रॉप आउट्स आफ स्टूडेंट्स भी शामिल है। 
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    आपने श्री गणेश राय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोभी जौनपुर में प्रवक्ता पद पर दिसंबर 1978 से 2 जुलाई 1986 तक कार्य किया तत्पश्चात 3 जुलाई 1986 से 26 अप्रैल 1989 तक प्रधानाचार्य श्री गायत्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रुस्तमपुर रायबरेली के पद पर कार्य किया।

    27 अप्रैल 1989 से 31 जुलाई 2020 तक अपनी सेवाएं श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज समोधपुर को अनवरत प्रदान की। आपको 2015 में राज्यपाल द्वारा अध्यापक राज्य पुरस्कार से नवाजा गया, जो माध्यमिक विद्यालय के लिए जौनपुर में जौनपुर जिले का पहला और अब तक का एकमात्र पुरस्कार है। इस हेतु आपको 3 वर्ष का सेवा विस्तार भी प्रदान किया गया।
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    इंटर कॉलेज समोधपुर में रहकर आपने इसकी भरपूर सेवा की तथा विद्यालय की कीर्ति को चतुर्दिक फैलाया। विद्यालय के मूल ढांचे को परिष्कृत कर विद्यार्थियों के लिए हर सुविधा पर जोर दिया जो उचित शुल्क लेने वाले तथाकथित पब्लिक स्कूल प्रदान करते हैं। विद्यालय के परिवेश को हरित बनाने के लिए प्रतिवर्ष भरपूर वृक्षारोपण करवाया जिससे यहां आने पर सुखद अनुभूति होती है। विद्यालय के भीतर अपने ही छात्र अमर द्वारा बनाए गए मूर्तियां विद्यालय की शोभा बढ़ा रही हैं। स्वामी विवेकानंद, मां सरस्वती एवं डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है। विद्यालय की बिल्डिंग एवं केंपस को इस प्रकार बनाया गया है कि नब्बे के दशक में पढ़ रहे छात्र आसानी से पहचान नहीं पाते। बच्चों के पीने के लिए आरओ की व्यवस्था जौनपुर जिले के किसी अनुदानित कॉलेज में नहीं है। डॉ. रणजीत सिंह के प्रयास से ही जिले में प्रथम और एकमात्र अटल टिंकरिंग लैब जो नीति आयोग द्वारा प्रदत्त है, विद्यालय में स्थापित है। इसमें छात्र रोबोटिक्स एवं बेसिक इंजीनियरिंग की जानकारी प्राप्त करने के साथ अपनी वैज्ञानिक जिज्ञासा को शांत करते हैं।

    स्काउट के क्षेत्र में विद्यालय का परचम कई बार राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर फहराया जा चुका है एवं राष्ट्रीय स्तर पर लोग स्काउट में जौनपुर को केवल समोधपुर के नाम से पहचानते हैं। रणजीत सिंह तीन बार अर्थात 9 वर्ष तक लगातार जौनपुर स्काउट जिला आयुक्त पद पर रहे।सम्प्रति मुख्यायुक्त स्काउट गाइड जौनपुर के पद पर कार्यरत हैं। आप स्काउट की प्रदेश कार्यकारिणी में भी सक्रिय सदस्य रहे। स्काउट के क्षेत्र में किए गए कार्यों से उच्च शिक्षा अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी आपको पहचानते हैं और सम्मान देते हैं। संगीत के क्षेत्र में मंडल स्तर पर हुई प्रतिस्पर्धा में विद्यालय का लोहा मनवाया। अपने सहयोगियों के साथ छात्रों को जहां भी ले गए विजयश्री हासिल की।कव्वाली, एकांकी, कवि दरबार, भजन सभी विधाओं में विद्यालय मंडल स्तर पर प्रथम रहा।

    राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में छात्र विगत 15 वर्षों से लगातार प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए। इस प्रतियोगिता के लिए जयपुर, गांधीनगर, तिरुवनंतपुरम तथा अन्य स्थानों पर गये। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जब तक जीवित थे, प्रतिवर्ष इस आयोजन का उद्घाटन करते थे, उनसे विद्यालय के छात्रों को बातचीत करने का बहुत बार अवसर मिला है। 

    विद्यालय के चतुर्दिक एवं सर्वांगीण विकास के केवल एक ही सूत्रधार है, डॉ. रणजीत सिंह। छात्र-छात्राएं आपको दिल से चाहते हैं, अभिभावक आपको दिल से सम्मान देते हैं। समोधपुर के 15 से 20 किमी परिधि में ऐसा गांव एवं गांव का ऐसा घर नहीं रहा होगा, जहां का कोई छात्र यहां न पढ़ा हो, इसलिए जनता आपका सम्मान करती है। प्रवेश से लेकर शिक्षा और परीक्षा की पूरी प्रक्रिया आपने चुस्त दुरुस्त कर दिया। विद्यालय के शिक्षकों को एक साथ लेकर चले। हम शिक्षकों को भी अपनी क्षमता के अनुसार उचित कार्य देकर आपने हमारा संवर्धन किया। आपके सानिध्य में रहकर हमने बहुत कुछ सीखा। आपके द्वारा दिए गए उदाहरण और कोटेशन किसी भी समस्या के निराकरण में सक्षम हैं, और हम आपसी बातचीत के दौरान उसका उद्धरण भी देते हैं। हम सभी अध्यापक रेलगाड़ी के डिब्बे की तरह आप जैसे सक्षम इंजन के पीछे लगे रहे। जैसे क्षतिग्रस्त डिब्बों को भी इंजन उसी रफ्तार से आगे बढ़ाता रहता है, आपने वहीं किया। हमारी व्यक्तिगत समस्याएं सुनकर आपने निराकरण करने का प्रयास किया। आपके रहने पर हम अपने चारों तरफ सुरक्षा प्रकोष्ठ का अनुभव करते रहे। किसी भी समस्या को आप अपने ऊपर ओढ़ लेते थे। आप के न रहने पर यह कमी खलेगी। आपका कार्यकाल विद्यालय के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। आपने जो कार्य किए हैं, वे मील का पत्थर और मानक बन गए हैं। ऐसे कार्य जो आप सहज ढंग से कर लेते थे, उसके लिए विद्यालय परिवार को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। आपको हम विश्वास दिलाते हैं कि हम अपना पूरा जोर लगा कर उसी तरह विद्यालय को आगे बढ़ाएंगे जैसा आप चाहते थे। लेखन कला में अकुशल होते हुए भी आप के प्रति उमड़े भाव ने लिखने को बाध्य किया। विस्टन चर्चिल ने गांधी जी के लिए कहा था कि हांड मांस से बनी अस्थिप्राय शरीर वाले इस व्यक्ति का प्रभाव भारत में जितना रहेगा, उतना भविष्य में किसी भी अन्य नेता का नहीं होगा। उनके दुबले पतले शरीर से मेल खाते हुए आपके लिए यह बातें विद्यालय हेतु बिल्कुल सटीक बैठती हैं। आप हम सभी को अपना प्यार मार्गदर्शन सुझाव लगातार देते रहें। हम आप से जुड़े रहना चाहते हैं और जुड़े रहेंगे।हमें आपके स्नेह लेप की आवश्यकता है ।मैं आपका शिष्य भी हूं, विगत 14 वर्षों से सहयोगी भी हूं, पुत्रवत हूं, यदि कोई गलती जाने अनजाने में हुई हो तो आप उसे क्षमा कर देंगे। मैं और समूचा विद्यालय परिवार सदैव आपका ऋणी  रहेगा।

    आपको कोटिशः प्रणाम, सादर अभिवादन
    (धर्मदेव शर्मा, प्रवक्ता — भौतिक विज्ञान, की कलम से)

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    वहीं जितेंद्र बहादुर सिंह बबलू ने बताया कि इतने वर्षों तक छाया की तरह उनके साथ रहने का सौभाग्य मिला, उनके जाने के बाद अकेलापन महसूस हो रहा है। सेवानिवृत्ति के बाद से ही हम लोगों को काफी तकलीफ हो रहा है। 

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