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    "अमूर्त कला का दायरा बहुत विस्तृत है" | #NayaSaveraNetwork

    एब्स्ट्रैक्ट इन नेचर ऑनलाइन वर्कशॉप सम्पन्न
    शीर्षक से चित्र सीमित हो जाते हैं
    16 अगस्त 2020, एब्सट्रेक्ट क्या है? हमारे दैनिक जीवन के विशिष्ट अनुभवों से पृथक करके उनके अनिवार्य तत्वों को अमूर्त रूपों के माध्यम से प्रस्तुत करना अमूर्त कला है इसमे पहचानी जाने वाली वस्तुओं का चित्रण नहीं होता और न किसी घटना अथवा कहानी का भी चित्रण किया जाता है, बल्कि भाव अथवा विचार को रेखा,रंग अथवा प्रकाश आदि के माध्यम से ही प्रस्तुत किया जाता है। रूप अमूर्त ज्यामितीय अथवा अज्यामितिय होते हैं और इन्ही का संयोजन किया जाता है प्रकृति का पुनः संयोजन भी इसी का एक रूप है। सामने दिखाई देने वाले दृश्य अथवा वस्तुओं में जो पैटर्न दिखाई दे उन्ही को कला में और अधिक विकसित या पूर्ण कर लिया जाता है। इस विधा में रंगों की पूर्ण समझ होना बहुत जरूरी है।

    "अमूर्त कला का दायरा बहुत विस्तृत है" | #NayaSaveraNetwork

    उक्त बातें अस्थाना आर्ट फोरम के ऑनलाइन मंच पर चल रहे वर्कशॉप में रविवार को विषय एब्स्ट्रैक्ट इन नेचर पर बात चीत और डेमोंस्ट्रेशन में नागपुर महाराष्ट्र से महिला चित्रकार श्रीमती सुहानी जैन ने कही।

    "अमूर्त कला का दायरा बहुत विस्तृत है" | #NayaSaveraNetwork

    सुहानी जैन ने इस वर्कशॉप में एक डेमोंस्ट्रेशन भी दिया डेमोंस्ट्रेशन के दौरान ऐक्रेलिक और चारकोल माध्यम में एक अमूर्त चित्र की रचना भी की। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने बहुत सारे एब्सट्रेक्ट को लेकर प्रश्न भी किये जिसके जवाब में सुहानी ने बड़े ही सरलतापूर्वक उत्तर दिए। सुहानी ने अपने काम करने की तकनीक को भी शेयर किया। तथा तकनीकी में प्रयुक्त सामग्री के लाभ और सावधानी को भी बकायदे बताया।

    "अमूर्त कला का दायरा बहुत विस्तृत है" | #NayaSaveraNetwork

    कलाकृति जो स्वतंत्र भाव से बनाई जाती है, उदाहरण के लिए विशिष्ट रूप से रंगों और रूपों को बदलना, जिससे दर्शक पर एक विशिष्ट प्रभाव पड़े, उसेआंशिक रूप से अमूर्त कला कहा जा सकता है। अमूर्तता की यह भावना विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों, साथ ही बिंदुओं, रेखाओं और शुद्ध रंगों के उपयोग के माध्यम से प्राप्त की जाती है। सुहानी जैन ने अंत मे कहा कि अपने काम मे अपनी ख़ुद की मौलिकता होनी चाहिए।

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    भूपेंद्र कुमार अस्थाना के संयोजन में यह कार्यशाला सम्पन्न हुई। इस ऑनलाइन कार्यशाला में लक्ष्मी समवेदम (हैदराबाद), निराली गोराडिया (बड़ोदरा गुजरात),रचित पांडेय (लखनऊ उत्तर प्रदेश), प्रसन्ना (अकोला महाराष्ट्र), कप्परी कृष्ण (हैदराबाद), प्रदीप सोलन (सोलापुर), करुणा (लुधियाना पंजाब) इशिता जाधव (मध्यप्रदेश), पल्लवी (लखनऊ, उत्तर प्रदेश), मनीषा वर्मा (बुलंदशहर उत्तर प्रदेश) ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों को कलाकार के हस्ताक्षर के ई-प्रमाण पत्र भी दिए गए।

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