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    'धारावी मॉडल' : बच गयीं लाखों जिंदगियां, कैसे सफल हुआ ये मॉडल, पढ़िए यह रिपोर्ट | #NayaSabera

    मुंबई। दुनिया भर कोरोना महामारी थमने का नाम नहीं ले रही है। लाखों की संख्या में इस बीमारी ने जीवन लीलाएं खत्म कर दी। भारत में भी यह बीमारी अभी भी बढ़ रही है। इस महामारी का सबसे ज्यादा प्रकोप अगर देश में कहीं दिखा तो वो राज्य महाराष्ट्र है। इसी कड़ी में इस महामारी ने धारावी में भी अपनी घुसपैठ बना ली। धीरे-धीरे मौतों की सिलसिला भी शुरू हो गया था। धारावी में एक अप्रैल को कोरोना महामारी का पहला मामला देखा गया था।
    'धारावी मॉडल' : बच गयीं लाखों जिंदगियां, कैसे सफल हुआ ये मॉडल, पढ़िए यह रिपोर्ट | #NayaSabera

    एशिया की सबसे बड़ी बस्ती है धारावी
    आपको बता दें धारावी मुंबई की एक ऐसी बस्ती है, जहां 8 से 10 लाख की संख्या में लोग रहते हैं। इसे एशिया की सबसे बड़ी बस्ती के तौर पर भी जाना जाता है। आलम ये है कि यहां छोटी—छोटी झुग्गियों में 10 से 12 लोग रहते हैं। वहीं 80 प्रतिशत लोग सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं।

    बड़े खतरे की थी आशंका ऐसे में आशंका जताई जा रही थी कि, यहां बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके पीछे जो वजह सामने आई वो थी 'धारावी माडल', इस मॉडल का प्रयोग कर लाखों की संख्या में लोगों की जिंदगी को बचा लिया गया। यहीं वजह रही कि दुनिया भर में इस मॉडल की तारीफ हो रही है। WHO ने भी इस माडल के माध्यम से कोरोना को रोकने की तारीफ की है।

    WHO के महानिदेशक ट्रेडोस एडहानम गेब्रेयेसेस ने ट्वीट कर कहा कि, भले ही महामारी कितनी भी खतरनाक हो, इसे नियंत्रण में लाया जा सकता है। जिसका उदाहरण इटली, स्पेन और दक्षिण कोरिया, और यहां तक कि भारत का धारावी भी है।

    WHO के संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्य प्रमुख ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि, मुंबई के धारावी में सोशल डिस्टेंसिंग, टेस्टिंग, ट्रेसिंग और संक्रमित मरीजों का तुरंत इलाज के कारण यहां के लोगों ने इस महामारी पर जीत दर्ज की।

    क्या है 'धारावी मॉडल'? 
    इस मॉडल के तहत 'चेस द वायरस' के तहत काम करना शुरू कर दिया। इसके लिये कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग, फीवर कैंप, लोगों को आइसोलेट करना और टेस्ट करना शुरू किया गया। स्कूल, कॉलेज को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया। वहां अच्छे डॉक्टर, नर्स और 3 टाइम का अच्छा भोजन दिया गया। मुस्लिम के लोगों को रमजान के दौरान क्वारंटीन सेंटर में बेहतर सुविधाएं दी गयीं। इससे काम काफी आसान हो गया। जिसका नतीजा ये रहा कि यहां 77 प्रतिशत लोग ठीक हुए, जबकि केवल 23 प्रतिशत एक्टिव केस हैं। 

    बीएमसी और मेडिकल की टीमों का अहम योगदान धारावी में कोरोना संक्रमण को काबू करना मुश्किल कार्य था, लेकिन इस चुनौती को बीएमसी के 2450 लोगों ने पूरा कर दिखाया। जिसमें सफाई वाले से लेकर पानी खोलने वाले तक शामिल थे। वहीं यहां 1250 लोगों की मेडिकल टीम कॉन्ट्रेक्ट पर जुटी हुई थी। इसमें कई डॉक्टर भी शामिल रहे। इन सभी ने अहम भूमिका निभाई।

    सार्वजनिक शौचालय की समस्या से भी योजनाबद्ध तरीके से निपटा गया
    यहां बड़ी चुनौती सार्वजनिक शौचालय भी थे, जिनकी संख्या केवल 450 के करीब है। इन सार्वजनिक शौचालयों को 5 से 6 बार सेनेटाइज किया गया। शौचालयों के बाहर हैंडवाश रखे गये। कई सामाजिक संस्थाओं ने इसमें अहम रोल अदा किया। 

    तो 'धारावी मॉडल' को आज दुनिया भर में तारीफ मिल रही है, तो क्या इस मॉडल को देश में अन्य जगहों पर भी अपनाया जा सकता है। जवाब है, जी हां, इस मॉडल को कहीं भी, जेल, अस्पताल, अनाथालय, या फिर अन्य स्थानों जहां ज्यादा संख्या में लोग रहते है, उन जगहों पर अपनाया जा सकता है। जरूरत है तो सिर्फ मजबूत इच्छा शक्ति और समर्पण की भावना की।

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