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    जानिए इस बार कैसे होगा हज, क्या कहते हैं धर्मगुरू | #NayaSabera

    दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस का खौफ बरकरार है। सऊदी अरब में कोरोना से 2.13 लाख लोग अबतक संक्रमित हो चुके हैं। 1,968 लोगों की मौत हो चुकी है। इसलिए सऊदी अरब की सरकार ने इस साल कोरोना वायरस को मद्देनज़र रखते हुए हज करने वालों की संख्या सीमित रखने का फ़ैसला किया है। सऊदी अरब ने इस साल हज के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। मक्का में होने वाले हज के लिए हर साल लाखों लोग जुटते थे, लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से हज करने की इजाजत करीब एक हजार लोगों को ही होगी। इस बार यात्रियों को हज से पहले और बाद में पृथकवास में रहना होगा और उन्हें कोरोना वायरस की जांच भी करानी होगी।
    जानिए इस बार कैसे होगा हज, क्या कहते हैं धर्मगुरू | #NayaSabera

    इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभ हैं, जिसमें सबसे आख़िरी हज माना जाता है। शारीरिक रूप से ठीक और आर्थिक रूप से संपन्न मुसलमान जीवन में कम से एक बार हज करने की इच्छा रखते हैं। यही वजह है कि हर साल 20 लाख से ज़्यादा मुसलमान हज के लिए मक्का पहुंचते हैं। हालांकि इस बार दूसरे देशों से मुसलमान हज करने के लिए सऊदी अरब नहीं जा पाएंगे। 

    किसे मिलेगी हज करने की इजाजत
    सऊदी अरब सरकार ने कोरोना महामारी को देखते हुए बहुत ही समिति संख्या में लोगों को हज करने की इजाजत देने का फैसला किया है।और यह पहली बार है जब देश के बाहर के हज यात्रियों को मक्का आने की अनुमति नहीं होगी। सऊदी अरब ने कहा कि देश में रह रहे विदेशियों को ही हज करने की इजाजत होगी। 70 फीसदी विदेशियों और 30 प्रतिशत सऊदी नागरिकों को हज की अनुमति दी जाएगी। साथ ही सऊदी अरब में रह रहे विदेशी नागरिकों की उम्र 20 से 50 साल के बीच होनी चाहिए और उन्होंने पहले कभी हज नहीं किया हो। उन्हें ही इस साल हज की इजाजत मिलेगी।

    जीवन में एक बार हज करना फर्ज 
    इस्लाम धर्म यह मानता है कि अल्लाह की रजा लिए हज करना बेहद जरूरी है। जिस प्रकार हर मुसलमान नमाज और रोजे अदा करके अल्लाह के करीब हो जाता है, ठीक इसी प्रकार वह हज करके अल्लाह के करीब हो जाते है। वह गुनाहों से पाक-साफ हो जाते हैं। इसलिए इसे पूरा करके वह मुसलमान होने का फर्ज अदा करता है और अपने जन्म को सफल मानता है। पूरे दुनिया से हज अदा करने के लिए मुसलमान मक्का में एकत्रीत होते हैं। मक्का का मतलब केंद्र। कहते हैं कि मक्का शहर दुनिया के मध्य में स्थित है। यही कारण है कि चारों दिशाओं के मुसलमान ‘हाजिर हूं, मैं हाजिर हूं’ कहते हुए मक्का पहुंचते हैं।

    - मुफ्ती जाकिर नूरी, हैदराबाद 

    हज करने की नीयत से सवाब 
    जीवन में एक बार हज करना फर्ज माना गया है। अगर कोई व्यकिति इस साल हज करने पर नहीं जा पाता है तो वो अगले साल जाने के लिए नीयत कर सकते हैं। अगर अगले साल भी किसी कारण से वह हज पर नहीं जा पाता है और उनकी मौत हो जाती है। तो उनको हज का सवाब मिलेगा। इसलिए हज की नीयत करना भी सवाब का काम है।  
    - हाफिज नौमान अहमद सिंपुर, गोड्डा

    मुसलमानों के अलग-अलग वर्गों को आपस में जोड़ता है
    हर मुसलमान के लिए जरूरी है कि अगर वह आर्थिक रूप से मजबूत है तो वह जिंदगी में एक बार हज करे। हज न सिर्फ गुनाहों की माफी का मौका देता है बल्कि मुसलमानों के अलग-अलग वर्गों को आपस में भी जोड़ने का काम करता है। 
    - मौलाना जावेद निजामी, हैदराबाद 

    इस बार हाजियों को साथ में लाना होगा ये समान
    सऊदी अरब की सरकार ने हज यात्रियों के लिए एक दिशा निर्देश जारी कर दिया है। इस बार हाजी को जमजम कुएं का मुकद्दस (पवित्र) पानी ही पीने को मिलेगा और यह भी प्लास्टिक की बोतल में पैक होगा। वहीं शैतान को मरने के लिए जमा की जाने वाली कंकड़ियों को सेनेटाइज किया जाएगा और वक्त से पहले ही इकट्ठा किया जाएगा। इसके अलावा नमाज़ पढ़ने के लिए मुसल्ले (जिसे बिछाकर नमाज़ पढ़ते हैं) भी खुद ही लाने होंगे। 

    आप को यह बता दें कि इस साल से पहले कई बार हज को रद्द करना पड़ा था.....  

    हज कब-कब रद्द हुआ?  
    इतिहास में पहली बार हज 629 ई. (छह हिजरी, इस्लामिक कैलेंडर) को मोहम्मद साहब के नेतृत्व में अदा किया गया था। इसके बाद हर साल हज अदा होता रहा। लेकिन इसके बावजूद इतिहास में लगभग 40 बार ऐसा हुआ है जब हज अदा ना हो सका और कई बार 'ख़ाना ए काबा' हाजियों के लिए बंद रहा। 

    सन 865: अल-सफ़ाक का हमला
    सन 865 में स्माइल बिन यूसुफ़ ने, जिन्हें अल-सफ़ाक के नाम से जाना जाता है, उन्होंने बग़दाद में स्थापित अब्बासी सल्तनत के ख़िलाफ़ जंग का एलान किया और मक्का(पवित्र स्थल) में अरफ़ात के पहाड़ पर हमला किया। इस मले में वहां मौजूद हज के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इस हमले की वजह से उस साल हज न हो सका। 

    जब कड़ाके की सर्दी ने हज रोक दिया
    सन 417 हिजरी को इराक में बहुत अधिक सर्दी और बाढ़ की वजह से श्रद्धालु मक्का की यात्रा न कर सके। इस तरह बहुत ठन्डे मौसम की वजह से हज को रद्द करना पड़ा था। 

    किस्वा पर हमला
    सन 1344 हिजरी में ख़ाना-ए काबा के खिलाफ़, किस्वा को मिस्र से सऊदी अरब लेकर जाने वाले काफिले पर हमला हुआ जिसकी वजह से मिस्र का कोई हाजी भी ख़ाना-ए-काबा न जा सका। ये ईसवी के हिसाब से 1925 का साल बनता है। लेकिन ये बात भी महत्वपूर्ण है कि जब से सऊदी अरब अस्तित्व में आया है, यानी 1932 से लेकर अब तक, ख़ाना-ए-काबा में हज कभी नहीं रुका।

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