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    यह ग्रुप बना रहा क्रिएटिव मास्क, जो सुरक्षा भी करेगा और जागरूक भी | #NayaSabera

    नई दिल्ली। जौनपुर के होनहार लाल, कवि, कलाकार तथा कला समीक्षक पंकज तिवारी ने नया सबेरा डॉट कॉम से अपनी बात साझा करते हुए कहा कि समय कुछ सही नहीं चल रहा फिलहाल लोग त्रस्त हैं आपदा अपने विकराल रूप को अख्तियार किये हुए है हर तरफ निराशा के बादल उमड़ रहे हैं जिसका फिलहाल सफाई, सामाजिक दूरी और सुरक्षा यही उपाय है। सुरक्षा में सबसे जरूरी मास्क है जिसकी अधिक मांग होने से बाजार की स्थिति डावाडोल होने की गुंजाइश है और जिसको इसकी ज्यादा जरूरत है जैसे डाॅक्टर, प्रशासन, कोरोना वॉरियर्स आदि तक हो सकता है ना पहुंच सके इसलिए इस संकट के समय में हम अपने बहादुरों के लिए संकट ना बने, मास्क की कमी ना होने पाये फलत: कुछ कलाकारों ने मिलकर फाइव सेंसेस ग्रुप के माध्यम से डिजाइन मास्क बनाने का बीड़ा उठाये हैं डिजाइन इसलिए ताकि डिजाइन / चित्र के माध्यम से लोगों तक कलाकार अपने सकारात्मक विचार भी पहुंचा सकें। उन्होंने बताया कि उम्मीद है लोग जुड़ते जायेंगे और कारवां बढ़ता जायेगा। 

    वहीं कलाकार सूरज कुमार काशी का कहना है कि मास्क अब हमारे जीवन में जरुरी सा हो गया है अतः मैं इस मास्क को इस तरह डिजाइन किया हूं कि इसका उपयोग काॅस्ट्यूम की तरह हो सके।

    कलाकार संजय कुमार सिंह के कथन दिल में उतर जाने योग्य है "मैंने मास्क पर रोटी का चित्र बनाया है, रोटियां तो हमें घर पर भी मिल जाया करती थी पर अधिक की चाहत ने हमें घरों से दूर कर दिया। आज वही रोटी वही घर (गांव) हमें अच्छे लगने लगे हैं लेकिन दूरी ने हमें मजबूर कर रखा है। हालांकि शब्द में निराशा का पुट है पर सच्चाई भी यही है घर छोड़कर बाहर कौन जाना चाहेगा? कौन अपने मां-बाप परिवार से वियोग की व्यथा को खुद आत्मसात करना चाहेगा, आज बहुत सी बातों के मायने लोग समझने लगे हैं। 

    रुपा रानी घर में बचे कपड़ों से डिजाइन मास्क बनाई हैं और लोगों से भी मास्क बनाकर खुद को, परिवार वालों को और साथ ही औरों को भी उपहार स्वरूप भेंट करने की आग्रह करती हैं।

    कलाकार नम्रता मिश्र का कथन है कि मास्क के थ्रू हम अपने कांसेप्ट लोगों तक पहुंचा सकते हैं और लोगों को सुरक्षित भी कर सकते हैं लोगों के अंदर आत्मविश्वास जगा सकते हैं हताशा, अवसाद से बाहर ला सकते हैं जिसकी इस समय हम सबको ज्यादा जरूरत है।

    कलाकार पंकज तिवारी के मास्क में समय से मानव संघर्ष को दिखाया गया है और अंत में प्रकाशवान वातावरण भी अंकित किया गया है मतलब साफ है अंधेरे से संघर्ष के बाद ही उजाला संभव है। अतः निराशा के बादल तले आने से खुद को बचाने का प्रयास करना हम सब के लिए ज्यादा कारगर सिद्ध होगा। कलाकार वंदना शाह, अरविंद सिंह, कुमार रंजन के मास्क भी संदेशप्रद हैं। पंकज सिंह का कथन है कोरोना से बचाव के लिए मास्क बहुत ही जरूरी है और सार्थक उपाय भी विशेषतः बाहर निकलने पर अतः मास्क लगाने में कोताही ना करें।

    क्यूरेटर उमाशंकर पाठक बड़े ही शालीन किन्तु सजग रहने वाले कलाकार हैं उनके कई चित्र प्रदूषण के बीभत्स रुप से हम सभी को पहले ही परिचित करवा चुके हैं। फाइव सेंसेज उनके ही दिमाग की उपज है। महामारी के इस दौर में सामाजिक दूरी के साथ-साथ जो सबसे ज़रूरी है वो है मास्क अतः हम सभी कलाकार मिलकर समाज में जागरूकता के उद्देश्य से मास्क बना रहे हैं और लोगों को ये संदेश भी दे रहे हैं कि परिस्थितियां कैसी भी हो हमें सदा डटकर, साहस के साथ और सक्रिय रूप से सामना करना चाहिए। चयनित मास्कों के प्रिंट को अगले साल दिल्ली में प्रदर्शित करने का विचार भी है।

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