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    सेवानिवृत्त हुए राकेश श्रीवास्तव : आप जैसा बड़प्पन, नहीं है कहीं, आप जैसा सरल मन, नहीं है कहीं | #NayaSabera

    अंकित जायसवाल
    जौनपुर। अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा, मगर आपकी तरह कौन मुझ को चाहेगा... कभी न बोलने वाला दफ्तर भी शायद आज बोल उठा होगा। जिस दफ्तर में पूरे 33 वर्ष बीत गये, वहां के लोगों से अटूट रिश्ता हो ही जाता है। ऐसा लगता है कि यहां से जाउं ही नहीं, आखिर ये क्षण क्यूं आ गया? मन में तमाम सवाल उठते रहते है लेकिन यह तो समय चक्र है आज मेरा है तो कल किसी और का होगा लेकिन इस लंबे समय अंतराल में आपने जिस ऊर्जा, परिश्रम, ईमानदारी और समाजसेवा के साथ जो कार्य किया उसको कोई भी कभी भुला नहीं सकता। जी हां, हम राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव की ही बात कर रहे हैं। जिनका पूरा परिवार ही समाजसेवा को समर्पित रहता है। उन्होंने एआरटीओ कार्यालय में अपने सेवाकाल के 33 वर्ष पूरे कर लिये। रविवार को इस ऐतिहासिक क्षण को और यादगार बनाने के लिए लायंस क्लब के पदाधिकारियों ने रक्तदान करने का निर्णय लिया।

    आप जैसा बड़प्पन, नहीं है कहीं, आप जैसा सरल मन, नहीं है कहीं, आपको हम विदा, आज कर दें मगर, सीनियर ऐसा सज़्ज़न, नहीं है कहीं... ये पंक्तियां भी आपके व्यक्तित्व को बयां करने में छोटी मालूम पड़ती है। आपने इस लंबे समय के अंतराल में समाजसेवा की नई मिसाल पेश की है। जिस पद पर आप थे उस पद व उसके समान ही पद पर न जाने कितने लोग आयें और गये होंगे लेकिन जितनी कमी आपकी आपके लोगों, साथी कर्मचारियों, अधिकारियों और पूरे स्टाफ को खलेगी उतनी शायद कभी किसी की नहीं खली होगी। किसी शायर ने शायद बिल्कुल सही कहा है कि ''चमन से रुख़्सत-ए-गुल है न लौटने के लिए, तो बुलबुलों का तड़पना यहाँ पे जाएज़ है।'' 

    कर्मचारियों के लिए सदैव खड़े रहे आगे
    बतौर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद जौनपुर के अध्यक्ष के रूप में राकेश कुमार श्रीवास्तव कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए सदैव आर—पार की लड़ाई लड़ी। राज्य कर्मचारियों को उनकी जितनी कमी महसूस होगी शायद और किसको होगी। आज जब वह सेवानिवृत्त हो रहे हैं तो कर्मचारियों में एक मलाल रह जाएगा कि हजारों की संख्या में एक साथ जुटकर अपने साथी का ऐतिहासिक विदाई समारोह भी नहीं कर पाएंगे।

    Rakesh Kumar Srivastava Worker Politician,




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