• Breaking News

    मजदूरों की मजबूरी, घर जाना है बहुत जरूरी | #NayaSabera

    • कहीं हादसे व कोरोना का शिकार तो कहीं भूख का...

    विनोद कुमार
    केराकत, जौनपुर। वैश्विक महामारी को लेकर देश में लॉक डाउन पार्ट 3 की शुरुआत के साथ लोगों का पलायन भारी तादात में होने लगा। मजदूर हर हाल में अपने घरों तक पहुंचना चाह रहा है। श्रमिकों के घर भेजने की आड़ में वसूला जा रहा भारी भरकम किराया। भारी संख्या में ट्रकों के सहारे लोगों का अपने गांवों की तरफ आना शुरू हो गया है। अब ऐसी स्थिति में लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। जालौन से आ रहे 16 मजदूरों की भीषण रेल दुर्घटना की खबर हर किसी के दिलों को झकझोर कर रख दी है। ऐसी न जाने कितनी रोज दुर्घटनाओं की खबरें सुनने व देखने को मिल रही हैं। लॉक डाउन लगे 51 दिन हो गये हैं। देश में श्रमिक नामक ट्रेनें चलाई जा रही हैं। पूरी दुनिया में भारतीय रेलवे सबसे बड़ी रेलवे में शुमार रखती है। 


    देश के अधिकतर लोग रेलवे से ही सफर तय करते हैं। भारतीय रेलवे के पास 19966 ट्रेनें हैं जिसमें से 12617 एक्सप्रेस-वे पैसेंजर व 7349 मालगाड़ियां हैं। हर रोज हजारों की संख्या में रेलवे लोगों को ले जाने और लाने का कार्य करती है तो फिर बस कुछ ही श्रमिक ट्रेन चलाने का क्या फायदा? मजदूर अपने परिवार के साथ पैदल जाने को मजबूर हैं। आखिर क्यों मजदूरों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है? आखिर क्यों सरकार पलायन को रोकने में नाकाम साबित हो रही है? विदेशों से लोगों को विशेष वंदे भारत के तहत वापस लाया जा रहा है। कोटा में फंसे छात्रों को विशेष बसों का इंतजाम कर उन्हें वापस लाया गया तो मजदूरों के प्रति ऐसा व्यवहार क्यों? रेल मंत्री पीयूष गोयल का ट्वीट आया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री से श्रमिकों के घर वापसी के लिए 300 ट्रेनों को चलाने की अनुमति मांगी गई है। अगर राज्य सरकार अनुमति दे तो रेलवे 6 दिनों में श्रमिक मजदूरों को उन्हें उनके घर वापस भेजा जा सकता है। 

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रेल मंत्री का ट्वीट आने के 3 घण्टे बाद खबर मिलती है कि रेलवे एसी क्लास की 15 स्पेशल ट्रेन चलाने घोषणा कर दी गयी है। इसका मतलब साफ है कि 15 स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए रेलवे को किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है परंतु श्रमिक ट्रेन चलाने के लिए देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अनुमति लेने की जरूरत है। आखिर ऐसे हालात ही क्यों हैं कि उत्तर प्रदेश से भारी संख्या में लोगों को अन्य प्रदेशों में अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए जाना पड़ता है। देश को कई प्रधानमंत्री देने वाला उत्तर प्रदेश आखिर इतना उपेक्षित क्यों? देश जब से आजाद हुआ है तब से लेकर आज तक सभी पार्टियों की सरकार बनी। सभी बड़े-बड़े वादों के सुनहरे सपने दिखाकर सत्ता पर काबिज हुये, मगर आज तक अन्य प्रदेशों में जाकर अपनी रोजी-रोटी कमाने वालो मजदूरों को अपने राज्य में बेरोजगारी का दंश झेलना पड़ता है। 

    क्या मुम्बई, दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों से भरी संख्या लोग उत्तर प्रदेश आते अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए तो क्यों इतनी बड़ी संख्या में लोग अन्य प्रदेशों में जाने को मजबूर हैं? जबकि उत्तर प्रदेश ने इस देश को लगातार कई बार देश को प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व रक्षा मंत्री दिये है। देश के पहले प्रधानमंत्री का सौभाग्य भी उत्तर प्रदेश ने ही दिया, फिर भी उत्तर प्रदेश का सुधि लेने वाला कोई नहीं है। तमाम सरकारें आयीं और गयीं लेकिन केवल वादा दिखा, विकास नहीं दिखा।

    Youtube :



    जौनपुर : जौनपुरवासियों को तोहफा, जल्द ही खाने को मिलेगा अच्छी क्वालिटी का पिज्जा, खुल रहा है Pizza PARADISE'S
    Ad
    Pizza PARADISE'S, Jaunpur, recent,
    Ad

    प्रवेश प्रारम्भ सत्र 2020—21 - कमला नेहरू इण्टर कालेज | प्रथम शाखा — अकबरपुर आदमपुर निकट शीतला चौकियां धाम जौनपुर | द्वितीय शाखा — कादीपुर—कोहड़ा निकट जमीन पकड़ी जौनपुर | तृतीय शाखा — करमहीं निकट सेवईनाला जौनपुर | सम्पर्क सूत्र — 7755817891, 9415896695, 9453725649, 8853746551
    Ad

    No comments