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    असमंजस में 'भविष्य'.....!

    कोरोना महामारी में समाज का प्रत्येक वर्ग प्रभावित हुआ है परंतु तमाम वर्गों के बीच छात्र एक ऐसा वर्ग है जो देश का भविष्य है और आज वह बेहद असमंजस में है।

    भारत में कुल छात्रों की संख्या लगभग 32 करोड़ है जिसमें स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर के छात्र शामिल है। स्कूल के वह छात्र को बोर्ड की परिक्षा दे रहे थे वह बेहद ऊहापोह की स्थिति में है।

    कालेज व विश्विद्यालय स्तर के छात्र एक अलग पीडा से गुजर रहे है जिनके सामने परिक्षा की चिंता के साथ साथ भविष्य की रणनीति भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में छात्र मानसिक समस्या से दो चार हो रहे है।

    आज इस संकट काल में हर वर्ग को रियायत दी जा रही है परन्तु छात्र को ऑनलाइन के बोझ ताले दबाया जा रहा है। ऑनलाइन क्लास उन छात्रों के साथ अन्याय होगा जो ग्रामीण परिवेश से आते है और तकनीक से दूर है।

    हमे यह समझना होगा कि हमारे पास जो मोबाइल है और उसमे आने वाला नेटवर्क हमारा प्राप्तांक नहीं तय कर सकता क्योंकि यह अवसर की समानता का उलंघन है। छात्र हमारा भविष्य है और इसके साथ कोई भी अनहोनी हमारे भविष्य को अंधकार में ला सकती है। इस बीच भारतीय राष्ट्रिय छात्र संगठन (NSUI) ने एक सुझाव दिया है कि प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों को प्रमोट किया जाए और उनका भविश्य सुनिश्चित किया है।

    संगठन की इस मुहिम को समर्थक देने के लिए ट्विटर पर 1 लाख से ज्यादा छात्रों ने #PromoteStudentsSaveFuture को समर्थन दिया था। आशा है कि छात्रों को उचित न्याय मिलेगा और इस असमंजस की स्थिति को जल्द दूर किया जाएगा।


    अमिष तिवारी
    प्रदेश महासचिव NSUI उप्र

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