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    कोविड-19 के दौर में हमें अपने जीवन शैली में परिवर्तन लाना होगा : प्रो. मिताली चिनारा | #NayaSabera

    वाराणसी। भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार जिसका शीर्षक "कोविड-19 का भारत पर प्रभाव : शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य" का समापन किया गया। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर एचसी पुरोहित संकाय प्रमुख प्रबंध संकाय दून विश्वविद्यालय देहरादून ने किया।

    इस सत्र की मुख्य वक्ता प्रो. मिताली चिनारा निदेशक HRDC उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर ने कहा कि कोविड-19 के दौर में हमें अपने जीवन शैली में परिवर्तन लाना होगा। इन्होंने कहा कि यूजीसी से निवेदन करना चाहिये कि 25 प्रतिशत पाठ्यक्रम ऑनलाइन मोड में पढाया जाना चाहिये क्योंकि सफलता दर ऑनलाइन पाठ्यक्रम की नेट की उपलब्धता और गति पर निर्भर करती है। इन सभी चीजों का नीति निर्धारण के समय ध्यान देना होगा। हमारी संस्कृति का वैश्विक रूप होना ही इसकी विशेषता है। 

    डॉ. कंचन फूल माली मुंबई विश्वविद्यालय मुंबई ने कहा की शिक्षा और संस्कृति का सीधा सम्बन्ध है। अगर आप शिक्षित और सुसंस्कृत हैं तो कोविड-19 में सरकार द्वारा दिये गए निर्देशों का  पालन करते हैं। 
    शोधपत्र प्रस्तुत करते हुये सुश्री पारुल प्रिया ने कहा कि इस संकट के दौर में हर संसाधन का शिक्षा और सांस्कृतिक विकास के लिये आवश्यकता है। डॉ रमेश कुमार सिंह पत्रकारिता विभाग काशी विद्यापीठ ने कोविड-19 से पड़ने वाले भारत पर प्रभाव के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक चिंतन को व्यक्त करते हुए आने वाले समय में देश के सामने चुनौतियों का वर्णन किया। डॉ रुपेश  कुमार सिंह ने ऑनलाइन शिक्षा का विरोध किया और कहा की ये हमारी गुरुकुल शिक्षा पद्धति के विरुद्ध है। श्री भीम सिंह चंदेल ने पूंजीवादी व्यवस्था का सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक सम्पदा पर पड़ने वाले प्रभाव को कोविद-19 का कारण माना। डॉ. पुष्पा कुमारी  ने कोविड-19 के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को बताया । डॉ. गौरव सिंह ने दूरवर्ती एवं सतत शिक्षा की उपयोगिता पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। डॉ. लकी कुमारी नें शैक्षणिक परिद्रिस्य में हो रहे परिवर्तन का छात्रों पर हो रहे प्रभाव का अधययन किया। डॉ. जमील हसन दरभंगा ने कोविड-19 के शिक्षा पर प्रभाव को बताया। डॉ. अरुण कुमार सिंह जौनपुर ने अपने शोधपत्र में लिखा कि कोविड-19 में उपयोग की क्षमता और विकल्प नियंत्रण में रहेगा। डॉ. के.एस.आर. शर्मा हैदराबाद ने कोविड-19 से रोजगार के प्रभाव पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। डॉ. तनूजा सिंह ने यूनेस्को के कोविड-19 के डाटा का विश्लेषण किया। सुश्री निधि सोनकर ने अपने शोधपत्र में तकनिकी के प्रयोग से छात्र केन्द्रित शिक्षा देने की बात की। डॉ. पंकज समदरिया ने ग्रामीण छात्रों को गुणवत्ता परक शिक्षा उपलब्ध करने पर जोर दिया। डॉ. आलोक दास एवं झाँसी मिश्रा जौनपुर ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर कोविड-19 के समय में ध्यान देना आवश्यक है। डॉ. सोनिया सिंगला चित्तौरगढ़ ने पाठ्यक्रम को गाँधी जी के सिद्धांतो पर बनाये जाने की बात की। डॉ. प्रियंका कुमारी दरभंगा ने शोधपत्र में चीन के साथ व्यापार पर पुनः विचार की बात कही। डॉ. प्रियंका वर्मा ने कोविड-19 के सामाजिक एवं राजनैतिक प्रभाव पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। डॉ. सौरभ मिश्र ने ई कंटेंट के ऑनलाइन कक्षा में होने वाले दुरुपयोग पर चर्चा किया। डॉ. देवेष पाल ने कोविड-19 के वित्तीय एवं सांस्कृतिक प्रभाव पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। डॉ. रामचन्द्र जी प्रयागराज ने भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कोविड-19 में परिवार में रहने और अध्ययन करने के फायदे पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। डॉ. मंजू सिंह प्रयागराज ने शिक्षा एवं रोजगार की बात अपने शोधपत्र में कही। डॉ. पराग शुक्ला बड़ोदरा ने अपने शोधपत्र में शिक्षा के मध्यम से सांस्कृतिक विकास की संभावनाओं पर बात किया।
    समापन सत्र में स्वागत भाषण प्रोफेसर एच.एस. उपाध्याय, अध्यक्ष दर्शनशास्त्र विभाग प्रयागराज विश्वविद्यालय एवं उपाध्यक्ष भारतीय शिक्षण मंडल काशी प्रांत ने दिया तथा
    मुख्य अतिथि का परिचय डॉ. संतोष कुमार सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक काशी हिंदू विश्वविद्यालय एवं मंत्री भारतीय शिक्षण मंडल काशी प्रांत द्वारा कराते हुये कहा गया कि आने वाले समय की चुनौतियो के लिये हमें तैयार रहना होगा और पर्यावरण से ताल मेल बना कर चलना पड़ेगा। युवा को ग्राम आधारित लघु एवं कुटीर उद्योग के लिये प्रशिक्षण देना होगा जिससे वह स्वावलंबी बने और राष्ट्र के उत्थान में अपना योगदान दे सके।
    मुख्य अतिथि शंकरानंद अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री भारतीय शिक्षण मंडल ने कहा कि हमको अपने मूल की तरफ वापस जाना पड़ेग। और स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने के अलावा राष्ट्र को भी स्वावलम्बी करने पर जोर देना पड़ेगा । आपने कहा विचार आधारित व्यवस्था राष्ट्र के लिये आवश्यक है। कोविड-19 के कारण आज लोग अपने को अपने परिवार  से जोड़ रहे हैं, अपने को जानने का यह सबसे अच्छा समय है, स्वावलंबी होने के लिये अपने विकास के लिये सभी को शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए इसलिए हमें स्पर्धा नहीं सहयोग को बढावा देना होगा साथ ही कुशलता के साथ मूल्यों का विकास भी होना चाहिए।
    प्रोफ़ेसर ओमप्रकाश सिंह आयुर्वेद संकाय काशी हिंदू विश्वविद्यालय एवं अध्यक्ष भारतीय शिक्षण मंडल काशी प्रांत ने वेबिनार के उद्घाटन से समापन तक मार्गदर्शन किया। 
    संचालन प्रोफेसर एच.के. सिंह वाणिज्य संकाय काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने किया और प्रो. मानस पाण्डेय ने दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार में दिये गए उद्बोधन एवं प्रस्तुत किये गये शोधपत्रों की सारान्सिका को प्रस्तुत किया। शांति मंत्र का पाठ कुँवर सोनू जी संगठन मंत्री काशी प्रान्त ने किया।
    वेबीनार में मुख्य रूप से आशीष श्रीवास्तव काशी प्रान्त कोष प्रमुख, प्रोफेसर वंदना राय, डॉ. अनिल कुमार सिंह काशी प्रान्त सम्पर्क प्रमुख, डॉ. रमेश कुमार सिंह सह सम्पर्क प्रमुख, डॉ. शांतनु सौरभ का विशेष सहयोग रहा तथा 900 से अधिक देश, विदेश एवं अनेक विश्वविद्यालय के प्रतिभागियों ने वेबीनार में भाग लिया। देश और विदेश से कुल 84 शोधपत्र प्राप्त हुए, जिसमें प्रथम तकनीकी सत्र में 21 और द्वितीय तकनीकी सत्र में 23  शोध पत्र प्रस्तुत किया गया।


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