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    मानव जब दानव बनकर, धरती पर संघार किया....... | #NayaSabera

    मानव जब दानव बनकर, धरती पर संघार किया.......
    मानव कर्मों ने जब पीड़ा की सीमा पार किया,
    प्रकोपित हो प्रकृति ने भी, धरती पर हाहाकार किया।
    अन्न, फलों को छोड़ मनुष्य, जब जीवों को खाते हैं,
    प्राण पर संकट आते ही, ईश्वर से आस लगाते हैं।
    जो भी हम देते प्रकृति को, वही लौटा कर देता है,
    जैसा जिसने बीज को बोया, वो वैसा ही फल देता है।
    भूल के ईश्वरी शक्ति को, जो अभिमान में ऐठ गये,
    प्रकृति के हल्के थपेड़े में ही, वो घरो में बैठ गये।
    बड़े भाग्य से जन्म मिला है तो,
    मानवता का कार्य करो,
    अपने जीवन को समझो और जीवो का सम्मान करो।
    जहां भी जैसे हो,
    तुम, मिलना नही जरूरी है,
    तुमको इस दुनिया में होना बहुत जरूरी है।
    कही बाहर न निकलो तुम,
    हवाएं यू ही कातिल हैं,
    कोरोना के इस रुख से, बचना बहुत जरूरी है।


    रानी तिवारी अध्यक्ष ओजस्वनी
    अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद, बदलापुर-जौनपुर (काशी प्रान्त)

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