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    कवि पुष्पेंद्र अस्थाना को सखी साहित्य परिवार सम्मान | #NayaSabera

    आज़मगढ़। बिंद्राबाज़ार आज़मगढ़ के कवि लेखक डॉ. पुष्पेंद्र कुमार अस्थाना को गुवाहाटी असम के सखी साहित्य परिवार के स्थापना दिवस पर परिवार की तरफ से इनके काव्य रचना प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया गया। श्री अस्थाना को काव्य रचना के लिए कई मंचो पर भी सम्मान किया जा चुका है।

    कवि पुष्पेंद्र अस्थाना अपने बारे में बताते हुए आगे बताया कि मैं आध्यात्मिक विचारधारा वाले माता-पिता के घर में 5 मई 1972 को जन्म लिया जिससे मेरी रचनाओं में रूहानियत का प्रभाव स्वतः परिलक्षित हो जाता है। मैं क्लास-6 में जब था तभी से लिखने लगा और सत्संगों में सुनाता था, प्रोत्साहन मिलने पर और लिखने लगा। अपने विद्वान ब्रह्मज्ञानी सन्त परम पूज्य पिता प्रेम नारायण लाल जी की प्रेरणा व सद्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की देवी कृपा से अंतराष्ट्रीय सन्त समागम दिल्ली में आयोजित कवि-सभा में पहली बार बड़े मंच पर 1988 में कविता बोलने का सुअवसर मिला, फिर तो जैसे मेरे हौसले को उड़ान मिल गई। वैसे मैं बाबा हरदेव जी एवम उनसे प्राप्त ब्रम्हज्ञान से बेहद प्रभावित था तो रचनाओं में सच्चाई, रूहानियत, मानवता, खरापन व व्यवहारिकता ज्यादा शब्दबद्ध होने लगे। 1987 से मन मे प्रेम का प्रादुर्भाव हुआ तो कुछ रचनाएं प्रेमिका के प्रभाव में भी बनने लगीं। अब गीत के साथ ग़ज़ल भी लिखने लगा था। फिल्मी धुनों पर भी सैकड़ों रचनाएं बनी। शेरो-शायरी भी सैकड़ों लिखे हैं। संस्मरण, रिपोर्ताज़, सूक्तियां, लेख, दोहा, छंद, सोरठा व कवित्त के साथ अतुकांत रचनाएं भी निरंकार-सद्गुरु ने लिखवाए हैं। वैसे 22 पुस्तकें पूरा करने में लगे हैं जो समयाभाव के नाते अधूरे हैं। जैसे ग़ज़ल संग्रह एहसास मेरे दिल का, महाकाव्य सुचितावली, समस्यावली, प्रेम वाणी चाह की आह आदि-आदि। अब तक मुझे सुखनवर, आफताब-ए-ग़ज़ल व सदस्य सखी साहित्य परिवार के सम्मान से सम्मनित किया गया है जो मेरी काबिलियत नहीं बल्कि गुरु-कृपा का फल है। वैसे मेरे जीवन की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि दुनियां मुझे मेरे क़लम से जाने..। इस समय अपने वंदनीय पूज्य पिता जी की जीवनी लिखने में लगा हूँ। यह मेरे गुरु की कृपा है कि मैं सरे-आम सच को सच व झूठ को झूठ कहने व लिखने में विश्वास करता हूँ।शायद इसीलिए अब तक मुझे जहां तक पहुचना था... नहीं पहुँच सका क्योंकि मुझे ख़ुशामद करना आता ही नहीं। ये भी प्रभु की कृपा ही है कि मेरी लेखनी दूसरी पीढ़ी में भी पहुंच रही है यानी मेरा बेटा रोहित अस्थाना भी गज़ल लिखने लगा है।

    अब तक सब कुछ मिला के लगभग 5000 के ऊपर रचनाएं लिखी जा चुकीं हैं अर्थात 40 डायरियां भर चुकी हैं, पर लिखने से मन नहीं भरता। मेरी दिली इच्छा है कि लेखन की दुनियां में समर्पित होकर उतरना चाहता हूँ।
    ज्ञातव्य हो कि सखी साहित्य परिवार की तरफ से यह काव्य सभा ऑनलाइन प्रस्तुति हुई है। इसमें देश—विदेशों के कवियों ने भाग लिया। इस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के लिए लगभग 50 कवियों को चुना गया जिसमें पुष्पेंद्र अस्थाना भी हैं।

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