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    जौनपुर : '...तो ईश्वर को भी जन्नत का पता बदलना पड़ेगा' | #NayaSabera

    जौनपुर। 'अगर सभी खुद से पहले, दूसरों की भलाई सोचे, तो ईश्वर को भी जन्नत का पता बदलना पड़ेगा...' यह पंक्तियां उपजिलाधिकारी मंगलेश दुब पर बिल्कुल सटीक बैठती है। हम ऐसा क्यूं कह रहे है यह जानकार आप भी हमारी बात को ही दोहराएंगे और कहेंगे कि वाकई इस अधिकारी ने ऐसा कार्य​ किया है जो अमूमन ऐसे पदों पर रहने वाले अधिकारी बहुत कम ही करते है। 
    जौनपुर : '...तो ईश्वर को भी जन्नत का पता बदलना पड़ेगा' | #NayaSabera

    फेसबुक पर उन्होंने बड़ा मार्मिक पोस्ट किया है। उन्होंने न सिर्फ यह जता दिया कि और लोगों को भी ऐसे लोगों की मदद करनी चाहिए बल्कि एक कदम स्वयं ही आगे बढ़ाते हुए उन्होंने इसकी शुरूआत भी कर दी है। अब आप खुद ही पढ़ लीजिए उन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर क्या पोस्ट किया है... 

    ''मेरे ड्यूटी के आने जाने के रास्ते में 4 या 5 दिन से मैं एक मोची बाबा को देखता था। एक दिन उनके पास रुका, पूछा की कितनी कमाई हो जाती है बाबा, तो बाबा ने अपना आगे वाला जेब उलट दिया। उत्तर तो तत्काल ही मिल गया लेकिन फिर बाबा ने बताया कि "साहब लॉकडाउन में केहू चप्पल और जूता ठीक करावे नहीं आवेला"। फिर मैंने पूछा कि राशनकार्ड तो होगा तो जबाब मिला कि साहब शादी नहीं किया हूं अकेले ही रहता हूं 1 यूनिट राशन से पूरा महीना नहीं चल पाता है। रोज 40 से 50 रुपये कमाई होती थी, उसी से कम चल जाता था। यह बीमारी के कारण थोड़ी दिक्कत बा और बातचीत के क्रम में पता चला कि उनको किसी योजना, किसी भी प्रकार के कार्ड (राशनकार्ड छोड़कर), बैंक अकॉउंट की बहुत जरूरत नहीं समझ में आयी और मेरा समझाना भी की बाबा ये योजना है सरकार की, फल कार्ड है, वगैरह वगैरह। फिर मेरे पास जो भी जेब में था सब दे दिया और कहा कि कुछ दिन आराम से घर पे रह के खाइये।
    ये बताने का सिर्फ इतना ही मकसद है कि ऐसे निरीह लोग मिले तो इस संकट में जरूर मदद करें, बाकी तो सब मोह माया है जिसमें आप भी फंसे है और मैं भी और हां मोची बाबा वादे के पक्के निकले तब से उस रास्ते पर दिखाई नहीं दिए।''


    Youtube : Naya Sabera | Jaunpur Live 



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