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    क्रॉप-सेंसर (Crop-Sensor) : नए युग का फसल स्वास्थ्य व सटीक प्रबंधन का सरलतम उपकरण

    विकासशील देश जिस में भारत, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका इत्यादि देश आते है तथा इन सभी विकासशील देश में लगभग 500 मिलियन से भी छोटे खेत है, जो की 80 प्रतिशत से अधिक भोजन का उत्पादन करते हैं। वर्ष 2050 तक दुनिया भर में भोजन की मांग 50 प्रतिशत तक और बढ़ जाएंगी, बढ़े हुए इस माँग को पूरा करने लिए हम लोग प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को प्रभावित कर सकते है। ऐसे में लघु व मंझला किसानों  के लिए क्रॉप-सेंसर तकनीकी एक वरदान से कम साबित नहीं हो सकती है। इसके माध्यम से हम किसी भी फसल में उर्वरक व अन्य सामग्रियों की कितनी आवश्यकता हैं उसकी गणना कर सकते कर फसलों के मांग के अनुसार उर्वरक व अन्य सामग्रियों को फसलों को दे सकते हैं। जिससे उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कम करते हुए एक उचित पोषक तत्व से युक्त फसलों का उत्पादन कर सकते है क्योंकि आज के समय मे उर्वरकों और कीटनाशकों का एक उचित मात्रा से अधिक उपयोग कृषि उत्पादों मे बढ़ी हुए इनकी मात्रा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, खासकर ये निर्धारित करना कि उर्वरक विभिन्न फसलों में कब और किस मात्रा में प्रयोग किया जाये कि जिससे किसानों को एक अच्छे पैदावार के साथ एक सकारात्मक परिणाम भी मिले सके।
    सेंसर आधुनिक तकनीक का कृषि में बढ़ता उपयोग
    सेंसर व आधुनिक तकनीक का कृषि में बढ़ता उपयोग इस तकनीकी के सटीक जानकारी के द्वारा किसान या निर्धारण कर पाएंगे कि विभिन्न फसल चक्र में लगाए जाने वाले फसलों को कितनी मात्रा में कीटनाशक वे उर्वरक तत्वों की आवश्यकता है तथा साथ ही साथ किसान पौधे की स्वास्थ्य व खुराक का निर्धारण एक सरल व सटीक जानकारी जोकि क्रॉप सेंसर के द्वारा दी जाती है, से कर पाएंगे, यह तकनीक किसान को यह भी महसूस करने का भी अवसर देती है कि पौधे कैसा महसूस कर रहे हैं, उनकी वृद्धि सामान्य है या नहीं और उर्वरक व कीटनाशक की लीचिंग या सतह अपवाह की संभावना को भी सूचित करता है और इस क्षति को कैसे कम कर सके। क्रॉप सेंसर पौधों के स्वास्थ्य, उन में लगने वाले रोग, उनकी आवश्यकता जैसे विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म तत्व अति सूक्ष्म तत्व तथा पानी का निर्धारण कर सकते हैं जिससे समय से पहले इनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करके किसान भविष्य में होने वाली एग्रोनॉमीकल लॉस की दर को काफी हद तक कम कर पाए। ये सेंसर इस तरह से डिज़ाइन किये गये होते है कि कृषि यंत्रों को निर्देशित करते है की कब और कितना इनपुट कहाँ देना है। वैरिएबल रेट फर्टिलाइजर एप्लीकेशन सेंसर तकनीकी अपना कर अत्यधिक मात्रा में उर्वरक के प्रयोग को कम किया जा सकता है।
    मक्का की फसल में उर्वरक उपयोग का नजदीक दृश्य
    एक शोध के अनुसार इस तकनीक को अपनाकर 45% तक नाइट्रोजन फर्टिलाइजर बचाया गया और इस बचत का उपज पर बहुत ही थोड़ा असर हुआ। खनिजीकरण की वजह से कई बार नाइट्रोजन अगली फसल के लिए मिटटी में संचय हो जाता है, और अगर किसान फिर से नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग करता है तो ये उत्पादकता पर असर डाल सकता है। अतः ऐसे विवरण किसान को अत्यधिक उपज लेने में सहायता कर सकते है। इसको कई रूपों में देख सकते है पहले तो एक उचित पोषक तत्व वाली फसल तथा दूसरा आर्थिक रूप में। ताजा आंकड़ों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और अमेरिका सहित कई देशो में 15-25% अनाज उत्पादक किसान, इस तकनीक को अपना चुके है। पूरे फार्म की फसल को हमेशा एक समान उर्वरक अनुप्रयोग की आवश्यकता नहीं होती है, कुछ क्षेत्रों में यह वहाँ की मिट्टी के गुण, सूर्य के प्रकाश, उपलब्ध विभिन्न पोषक तत्वों आधार पर निर्धारित होती है।

    मक्का की फसल में उर्वरक उपयोग का नजदीक दृश्य
    वैरिएबल रेट फर्टिलाइज़र स्प्रेडर्स का उपयोग फ़र्टिलाइज़र एप्लीकेशन रेट को ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) का उपयोग करके घटाया या बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में मिट्टी की उर्वरता का मानचित्र होना आवश्यक हो जाता है जो जगह-जगह की मृदा की उर्वरक माँग को दर्शाता है। देश में आज कई कृषि संस्थानों के पास मृदा उर्वरता व लवणता से सम्बंधित मानचित्र उपलब्ध है या और सटीक बनाने के लिए शोध चल रहे है। क्रॉप सेंसर तकनीकी अपनाकर न सिर्फ फसलों की उत्पादकता बढ़ाई व उर्वरक की खपत कम की जा सकती बल्कि ईंधन और ऊर्जा की खपत को कम करके कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को भी कम किया जा सकता है जो जलवायु परिवर्तन को रोकने में मदद करेगा, कृषि रासायनिकों का उपयोग कम करने में भी सहायता मिलती है। मृदा स्वास्थ्य की निगरानी और प्रबंधन के माध्यम से पोषक तत्वों की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है एवं जल उपयोग दक्षता बढ़ाकर जल के उपयोग को कम किया जा सकता है जो पर्यावरण के अनुकूल है।

    अभिषेक सिंह
    शोधार्थी छात्र कृषि जैव प्रौद्योगिकी विभाग
    सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मोदीपुरम मेरठ













    क्रॉप सेंसर सिस्टम की मांग उच्च प्रदर्शन वाली फसलों को उगाने में मदद में लायी जा रही है। शोधकर्ता फसलों का विभिन्न मिट्टी और मौसम की स्थिति से मिलान करने के लिए सेंसर का उपयोग कर रहे हैं। जिससे अगले दशकों में बढ़ती विश्व की आबादी को खिलाने के लिए उत्पादन क्षमता का विस्तार करना होगा जिसमें दो महत्वपूर्ण बिंदु शामिल है पहला पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाया जाये दूसरा खेती योग्य क्षेत्रों का विस्तार किए बिना लक्ष्य को प्राप्त किया जाये, इन दोनों बिंदु से कृषि अर्थशास्त्री काफी हद तक सहमत हैं, साथ ही किसानों को गहन खेती और अधिक उत्पादक करने वाले पौधों का हाइटेक कृषि प्रणाली के साथ उपयोग करना होगा जिसमें क्रॉप-सेंसर सिस्टम किसी वरदान से कम नहीं हैं।
    - डॉ विष्णु राजपूत
    कृषि वैज्ञानिक साउदर्न फेडरल यूनिवर्सिटी, रूस


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