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    तीर्थ कर

    तीर्थ कर
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             इस समय एक समाचार दूरदर्शन पर खूब चल रहा है।करतापुर साहिब जाने वाले तीर्थ यात्रियों से पाकिस्तान २० डालर प्रति व्‍यक्‍ति लेगा।जो कि गलत है।इसमें पकिस्तान का दोष नहीं है।ये उसके जींस में है।उसके आकाओं ने जब हिंद पर शासन किये थे तो!वे लोग हिन्‍दुओं से जजिया कर लिया करते थे,जजिया कर का मतलब है तीर्थ कर!उसी की पुनरावृत्‍ति वो कर रहा है।
            इसमें हाय तौबा करने से कुछ हासिल नहीं होगा।एक तो पाकिस्तान पडो़सी देश है।वो  तो वैसे ही भारत से खार खाये हुए है।इसलिए अपने यहाँ क्‍या कर रहा है,उस पर माथापच्‍ची करने से बेहतर है कि करतारपुर साहिब को भारत का हिस्‍सा बनाया जाय।जो हमारा है हमें मिलना चाहिए ।दूरदर्शन पर बैठकर चिल्‍ल पों न करें।करतारपुर साहिब को भारत में मिलाने का प्रयास किया जाय।और यदि ऐसा न कर पायें तो पाकिस्तान के अनुसार उसकी माँग को पूरा करते हुए तीर्थाटन करें।
            ये तो हुई करतारपुर साहिब जाने वाले तीर्थ यात्रियों के कर की बात,वो तो पाकिस्तान है,उसकी तो नीयत में ही खोट है।पर यहाँ हमारे देश में महाराष्ट्र के पालघर जिले में वसई तालुकान्तर्गत बहुत प्राचीन मंदिर है तुंगारेश्‍वर महादेव मंदिर है,किंवदंतियों में सुना है कि वह मंदिर भगवान परसुराम द्‍वारा निर्मित है।2014 तक वहाँ लोग उबड़ खाबड़ रस्‍ते से गुजरते हुए लगभग तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर बेरोक टोक  देवाधिदेव भगवान भोले नाथ का दर्शन करने जाते थे।हँसी खुशी लोग तैयारी करके लोग उस कठिन यात्रा को पूरा करते थे।फिर भी चेहरे पर दर्शन करने की खुशी संतुष्‍टि साफ झलकती थी।
             मगर दो हजार चौदह के बाद वहाँ बदलाव देखने को मिला जो बहुत ही तकलीफ दायक है।और हिन्दुओं को शर्मशार कर रहा है।अब वहाँ जाने के लिए पर व्यक्ति पैंतीस रूपये तीर्थ कर देना पड़ता है।रास्‍ते आज भी परसुराम के जमाने वाले हैं।सुरक्षा वही भगवान भोलेनाथ के सहारे है। न रास्‍ते पर लाईट की व्‍यस्‍था है आवागमन के साधन सही नहीं है।
    किसी तरह की सहूलियत नहीं है।हाँ लोगों की जेब वहाँ पर बिना रोंक टोंक काटी जा रही है।हिन्‍दुस्‍तान का ए एक पहला मंदिर है जिसके पास तक पहुँचने के लिए हम हिंदुओं को तीर्थ कर देना पड़ता है।वो भी तब जब देश में हिन्दू वादी सरकार।राज्‍य में हिन्दू वादी सरकार है।
            मुझे आश्चर्य हो रहा है कि इसके लिए कोई आवाज नहीं उठा रहा है।लेकिन करतारपुर साहिब के लिये जो दूसरे देश में है उसके लिए इतना शोरशराबा,यहीं सबकी नाक के नीचे तीर्थ कर वसूला जा रहा है।उसकी कोई खोज खबर नहीं ले रहा कि किस बात का कर लिया जा रहा है।क्‍या वहाँ तक पहुँचने के लिए सड़क बन गई,क्‍या वहाँ तक पहुँचने के लिए साधन सुलभ करा दिया गया।क्‍या लोगों की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था कर दी गई,जवाब होगा ऐसा कुछ भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
              तो? सवाल उठता है कि फिर तीर्थ कर क्‍यों लिया जाता है, तो एक जवाब है मैं सरकार हूँ,मैं कुछ भी कर सकता हूँ।मेरी मर्जी।
    उससे भी बडा़ आश्चर्य इस बात पर है कि इस बिषय पर सभी धर्मदायी संस्‍थायें मौन हैं।इसका जवाब किसी ने सरकार से नहीं माँगा,न ही कोई आंदोलन हुआ।
    पिछले दिनों वहीं पर कोई अवैध आश्रम तोडा़ जा रहा था तो लोगों ने खुब बवाल काटा।जबकी मंदिर प्रबंधन स्‍वयं उस आश्रम को अदालत के आदेश को मानते हुए तोड़ रहा था।फिर भी कथित पोंगापंथी हिन्दूवादी संगठन आंदोलनरत होकर सड़कों पर बवाल काटे।
           मगर तीर्थ कर वसूला जा रहा उस पर कोई कुछ भी नहीं बोल रहा है।यह दोगलापन क्‍यों?
    देश के किसी भी मंदिर में जाने के लिए साधन सुविधा प्रसाद धूप बत्‍ती के खर्च के अलावा कोई कर नहीं देना पड़ता है।लेकिन तुंगारेश्‍वर महादेव मंदिर पर जाने के लिए लोगों को ३५ रूपये कर देना पड़ता है।जो कि हम हिन्‍दुस्तानियों के लिये शर्म की बात है।
           पं. शिवप्रकाश जौनपुरी

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