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    Ayodhya News : विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण का फैसला

    नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 70 साल पुराने केस पर बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ की विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण का फैसला दिया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड को दूसरी जगह पर 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि दिए जाने आदेश दिया गया है। कोर्ट ने राम मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर एक ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया है। फैसला देते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने अहम सवालों के सिलसिलेवार जवाब भी दिए।

    विवादित स्थल पर मालिकाना हक किसका है?
    पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर 2.77 एकड़ विवादित भूमि किसे मिलेगी। बाबरी ढांचे के नीचे 12वीं सदी का मंदिर होने के सबूत मिलने की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि पर मंदिर निर्माण का फैसला दिया। अदालत ने तीन महीने में ट्रस्ट के जरिए मंदिर बनाने का फैसला दिया है। कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के मालिकाना हक को खारिज कर दिया और कहा कि वह ट्रस्ट में महत्वपूर्ण पक्ष होगा।

    भगवान राम का जन्मस्थान है विवादित स्थल?
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवादित स्थल को भगवान राम का जन्म स्थान मानते रहे हैं। उनकी यह आस्था सबूतों के जरिए साबित हुई है और एएसआई की रिपोर्ट में बाबरी ढांचे के नीचे मंदिर के सबूत मिले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं का यह विश्वास कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था, इस पर कोई विवाद नहीं है।

    क्या ASI की रिपोर्ट सही है?
    चीफ जस्टिस ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि अदालत को लोगों की आस्था और विश्वास को स्वीकार करना होगा। कोर्ट को संतुलन बनाए रखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जमीन पर नहीं हुआ था। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में एएसआई की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता।

    क्या जन्मस्थान को कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है?
    इस सवाल का जवाब भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टता से देते हुए कहा कि जन्मस्थान को नहीं बल्कि राम लला विराजमान को कानूनी पक्ष माना जा सकता है।

    क्या मस्जिद के नीचे मंदिर था?
    शीर्ष अदालत ने इस सवाल को लेकर कहा कि ढांचे की खुदाई के दौरान नीचे मंदिर के अवशेष मिले हैं। कोर्ट ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में मस्जिद के नीचे गैर-इस्लामिक अवशेष मिलने की बात कही गई है।

    विदेशी यात्रियों की बातों पर क्या हैं दावे?
    कोर्ट ने यात्रा वृतांतों को भी इस मामले में अहम मानते हुए कहा कि ऐतिहासिक तथ्य इस बात के प्रमाण देते हैं कि अयोध्या में ही भगवान राम का जन्मस्थान था।

    क्या मंदिर तोड़ा गया था?
    शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐतिहासिक सबूतों के मुताबिक मस्जिद का निर्माण खाली स्थान पर नहीं हुआ था। हालांकि कोर्ट ने मंदिर तोड़कर मस्जिद के निर्माण की बात नहीं कही।

    विवादित स्थल पर पूजा होती थी या नमाज?
    कोर्ट ने कहा कि विवादित स्थल पर 1856 से पहले नमाज पढ़े जाने के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन पूजा वहां हमेशा से होती रही है।

    मस्जिद टूटने के बाद भी मस्जिद रहती है क्या?
    इस संबंध में शीर्ष अदालत ने सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे को यह करते हुए खारिज कर दिया कि आप अपने तर्कों को साबित नहीं कर सके। हालांकि कोर्ट ने कहा कि नमाज पढ़ी जाने वाली जगह को मस्जिद मानने से इनकार नहीं कर सकते।

    क्या विवादित स्थल पर मूर्ति रखी गई?
    कोर्ट ने कहा कि मस्जिद कब बनी, इससे फर्क नहीं पड़ता। 22-23 दिसंबर 1949 को मूर्ति रखी गई।


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