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    आभासी दुनिया के दोस्तों का क्या भरोसा बचपन के मित्रों को सजो के रखिए

    डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर
    दोस्तों के बिना जीवन अधूरा होता है। हर सुख दुख के साथी दोस्त होते हैं। कभी उनके कारण डांट मिलती है तो कभी उनके साथ खेल कर दुनिया की ढेर सारी खुशियां मिल जाती है। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसका मतलब वही समझ सकता है जिसने दोस्त बनाया हो। आज वास्तविक के दोस्त दूर और आभासी दुनिया के दोस्त करीब होते जा रहे हैं।

    याद करिए कहां है बचपन का दोस्त
    स्कूल में सब पढ़ाई किए होंगे एक दूसरे के टिफिन से खाना खाना भी याद होगा बिना जाति धर्म पूछे सब एक साथ खाना खाते थे कभी कोई इसके टिफिन से कुछ निकाल लिया तो कभी कोई उसके।


    गलियां हुई सूनी
    मोहल्लो, पार्कों में शाम होते और छुट्टी के दिनों में दूर से ही बच्चों के शोर सुनाई देते थे एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले में अपने दोस्त के साथ खेलना बहुत आनंद भरा रहता था मां बाप से खेलने की परमिशन मिल जाना अपने आप में खुशियों से भरा होता था आज दिन बदल रहा है गली मोहल्लों में बच्चों के आइस पाइस, कबड्डी जैसे खेल दिखाई नहीं देते वही पिता अपने बच्चे के साथ बैट बॉल खेलते दिख जाते है।

    अपने दूर आभासी दुनिया के दोस्त हुए करीब
    फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर आज मित्र सूची बढ़ाना स्टेटस सिंबल हो गया है। पूरे जीवन में जिससे कभी मिल ना पाए और किसी मौके पर काम ना आए वह भी हमारी मित्र सूची में है सुबह-सुबह उसे गुड मॉर्निंग और उसकी फोटो को लाइक करना एक फैशन सा हो गया है लेकिन अपने पड़ोसी को अभिवादन करना एक प्रोजेक्ट सा लगता है।

    दोस्त बनाने के लिए प्ले स्टोर पर ऐप्स की भरमार
    नए जमाने की दोस्ती के लिए लिखते समय जानकारी जुटाने शुरू की तो पता चला कि हजारों एप्स प्ले स्टोर पर मौजूद है जिनसे आप विश्व के तमाम देश के लोगों से दोस्ती कर सकते है। लेकिन यह सिर्फ दिखावा साबित होते हैं। इस तरह के एप्स पर दोस्त कभी जीवन में किसी काम यह नहीं हो सकते न तो दुख दूर कर सकते हैं और ना ही कभी साथ दे सकते हैं। बहुत सारे लोगों को एप्स पर चैटिंग का रोग भी लगा हुआ है कुछ पेड है तो बहुत सारे अनपेड भी हैं चेक करने पर पता चला कि कई फेक भी है।

    आभासी दुनिया में चीटिंग का भी है खतरा
    आजकल फेसबुक पर दूसरे देश के  लोगों के फ्रेंड रिक्वेस्ट अगर आपको आते हैं एलर्ट हो जाइए बहुत सोची-समझी रणनीति के तहत फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर लंबे समय तक चैटिंग कर यह चीटिंग करते है। देश भर में ऐसे तमाम उदाहरण आए हैं जहां पहले ऑनलाइन दोस्ती की और फिर बाद में मूर्ख बनाकर लाखों रुपए ऑनलाइन ले लिया।

    पैरंट्स अपने बच्चों के सोशल मीडिया फ्रेंड्स पर रखें नजर
    आजकल मल्टीमीडिया मोबाइल बच्चों को देना एक फैशन सा हो गया है। बहुत जरूरतों के लिए ठीक भी है लेकिन पेरेंट्स को अपने बच्चों के सोशल मीडिया पर फ्रेंड लिस्ट पर भी कभी कभार नजर घुमा लेनी चाहिए उससे उन्हें पता चल जाएगा कि कैसे लोगों के वह संपर्क में है। जरूरत पड़ने पर हिदायत भी दे सकता है।

    डॉ दिग्विजय सिंह राठौर
    असिस्टेंट प्रोफेसर
    जनसंचार विभाग
    वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय
    जौनपुर।

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