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    Mainpuri News: संयम के बिना सार्थक नही है जीवनः विश्रुत सागर महाराज

    Ashish Dhusia
    नया सबेरा ब्यूरो
    पंचकल्याणक महामहोत्सव के चैथे दिन तप कल्याणक मनाया गया
    मैनपुरी। शहर के करहल रोड स्थित श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मन्दिर में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव के चैथे दिन मंगलवार को तप कल्याणक मनाया गया। जिसमें सर्वप्रथम राजा आदिनाथ की बारात निकली। कार्यक्रम में मुनिश्री अश्रुत सागर जी महाराज के प्रवचन हुये।
    मुनिश्री ने कहाकि जब आदिनाथ को एक मृत्यु देखकर वैराग्य उत्पन्न हो सकता है तो आप लोग तो आज तक कितनी बार मरण की क्रिया देख चुके है। अगर आप दीक्षा नही ले सकते तो कम से कम संयम रुपी जीवन बिताइये। उन्होंने कहाकि संयम के बिना जीवन सार्थक नही है। इससे पूर्व आयोजित कार्यक्रम में भगवान आदिनाथ के जीवन से जुड़ी कुछ क्रियाओं को प्रस्तुत किया गया कि जब कल्पवृक्ष समाप्त होने लगे तो लोगों की आकांक्षाऐं पूरी नही हुई। तब सभी प्रजा अपने राजा के पास परामर्श लेने आयी। तब राजा आदिनाथ ने सामधान दिया व प्रजा को असि, मसि, कृषि, कला शिल्प एवं वाणिज्य नामक विधाऐं सिखायी।
    इसके बाद सौधर्म इन्द्र की वैराग्योत्पत्ति का कारण दिखा गया। सौधर्म इन्द्र बड़े चिन्तित हुये और उन्होंने वैराग्य उत्पन्न करने के लिए स्वर्ग की नीलांजना नाम अप्सरा का नृत्य प्रस्तुत हुआ। नृत्य करते-करते नीलांजना की मृत्यु हो गई। यही घटना देखकर राजा आदिनाथ को वैराग्य उत्पन्न हुआ और उन्होंने घर छोड़कर दीक्षा लेने की ठानी। यह सुनकर उनके पिता राजा नाभिराज व माता मरुदेवी की आंखे आंसुओं से भर गई। दीक्षा का भव्य आयोजन देखकर पूरा जनसमूह भाव विभोर हो गया। इस मौके पर दर्जनों की संख्या में जैन समाज सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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